{"_id":"5c59d77cbdec224df422d9a4","slug":"131549391740-sitapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफसरों को है असलहों का शौक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफसरों को है असलहों का शौक
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डीएम ने एक साथ 36 असलहों के शस्त्र लाइसेंस को दी मंजूरी
सीतापुर। जिले के आला अफसरों को असलहा रखने का शौक है। इनका यह शौक अब पूरा भी हो गया है। जिलाधिकारी ने एक साथ 36 शस्त्र लाइसेंस को मंजूरी दी है। असलहों के लाइसेंस पाने वालों में सीडीओ, एसडीएम, सीएमओ, डीएसओ सहित कई अन्य अफसर शामिल हैं।
इसके अलावा जनप्रतिनिधियों के कई करीब भी लाइसेंस पाने में सफल हो गए हैं। वहीं यह सूची जारी होते ही पूरे जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। हो भी क्यों न, क्योंकि करीब छह साल बाद लगी रोक के बाद एक साथ इतने लाइसेंस जारी किए गए है। वह भी रसूखदार लोगों के हैं। इस सूची में आम आदमी के नाम गायब है।
नए शस्त्र लाइसेंस निर्गत करने पर रोक लगी हुई थी। करीब चार माह पहले प्रदेश सरकार ने यह रोक हटा ली थी। नए निर्देश जारी करके असलहा प्रक्रिया शुरू कर दी थी। यह प्रक्रिया करीब छह साल बाद शुरू हुई थी। इससे एकाएक नए असलहा के आवेदनों की बाढ़ सी आई।
विज्ञापन
कुछ ही दिनों में हजारों आवेदन आ गए। इनकी जांच में पता चला जिले के अफसरों को भी शस्त्र रखने का शौक है। वह इसमें पीछे नहीं बल्कि शुरुआत में ही आवेदन कर दिया था। इनमें एक से बढ़कर एक अफसर है। खास बात यह है कि पुलिस के अफसर भी अपना रिजर्व असलहा लेना चाहते हैं।
पुलिस व तहसील से प्रक्रिया पूर्ण के बाद फाइलें डीएम कार्यालय में लंबित पड़ी थीं। इस पर डीएम ने एक साथ 36 लाइसेंस को मंजूरी दे दी है। लाइसेंस पाने वालों में सीडीओ संदीप कुमार, एसडीएम महोली शशिभूषण राय, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट नीरज पटेल, सीएमओ डॉ. आरके नैय्यर, डीसीओ डॉ. दुष्यंत कुमार, वरिष्ठ कोषाधिकारी जान्हवी मोहन, सीओ उदय प्रताप सिंह शामिल हैं।
मंगलवार दोपहर को यह सूची जारी हुई तो हर तरफ खलबली मच गई। लोग अपना नाम देखने को आतुर रहे। वहीं इस सूची पर चर्चाएं भी खूब हुई। क्योंकि डीएम शीतल वर्मा छुट्टी पर चली गई हैं। जबकि सूची आज प्रकाशित हुई है। इससे चर्चाएं होना तो आम है।
रसूखदार को मिले असलहे
जिन 36 लोगों के असलहे की सूची जारी की गई है। उस सूची में आम आदमी कम खास ज्यादा है। सीडीओ, एसडीएम, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट, सीएमओ, डीसीओ, वरिष्ठ कोषाधिकारी, सीओ के अलावा केंद्रीय उपभोक्ता भंडारन के अध्यक्ष अनुपम राठौर, रामनरेश राठौर को भी लाइसेंस मिला है।
इस सूची में अधिकतर लोग रसूखदार हैं। सूत्रों का कहना है कि लाइसेंस उन्हीं को मिला है जिनकी या तो राजनीतिक पहुंच थी या किसी तरह उीएम के करीबी हो गए थे। वहीं जिले के कई माननीय की सिफारिशें भी नहीं चली है। इस सूची में जिले के सत्ताधारी कुछ माननीय व सांसद के ही करीबी ही सफल हुए हैं।
लंबी-लंबी हांकने वालों को मिली निराशा
शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया शुरू होते ही एक पुलिस अफसर, राजनेता व कुछ पत्रकार लंबी-लंबी हांकते थे। हर जगह पर कहते थे। जब भी लाइसेंस निर्गत किए जाएंगे तो हमारा नाम जरुर होगा। जब चाहेंगेे तब लाइसेंस मंजूर करा लेंगे। लेकिन आज उनको मुंह की खानी पड़ी। अब वह यह कहते नहीं थक रहे हैं कि हमने तो प्रयास ही नहीं किया वरना हो जाता।
विज्ञापन
सीतापुर। जिले के आला अफसरों को असलहा रखने का शौक है। इनका यह शौक अब पूरा भी हो गया है। जिलाधिकारी ने एक साथ 36 शस्त्र लाइसेंस को मंजूरी दी है। असलहों के लाइसेंस पाने वालों में सीडीओ, एसडीएम, सीएमओ, डीएसओ सहित कई अन्य अफसर शामिल हैं।
इसके अलावा जनप्रतिनिधियों के कई करीब भी लाइसेंस पाने में सफल हो गए हैं। वहीं यह सूची जारी होते ही पूरे जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। हो भी क्यों न, क्योंकि करीब छह साल बाद लगी रोक के बाद एक साथ इतने लाइसेंस जारी किए गए है। वह भी रसूखदार लोगों के हैं। इस सूची में आम आदमी के नाम गायब है।
विज्ञापन
नए शस्त्र लाइसेंस निर्गत करने पर रोक लगी हुई थी। करीब चार माह पहले प्रदेश सरकार ने यह रोक हटा ली थी। नए निर्देश जारी करके असलहा प्रक्रिया शुरू कर दी थी। यह प्रक्रिया करीब छह साल बाद शुरू हुई थी। इससे एकाएक नए असलहा के आवेदनों की बाढ़ सी आई।
विज्ञापन
कुछ ही दिनों में हजारों आवेदन आ गए। इनकी जांच में पता चला जिले के अफसरों को भी शस्त्र रखने का शौक है। वह इसमें पीछे नहीं बल्कि शुरुआत में ही आवेदन कर दिया था। इनमें एक से बढ़कर एक अफसर है। खास बात यह है कि पुलिस के अफसर भी अपना रिजर्व असलहा लेना चाहते हैं।
पुलिस व तहसील से प्रक्रिया पूर्ण के बाद फाइलें डीएम कार्यालय में लंबित पड़ी थीं। इस पर डीएम ने एक साथ 36 लाइसेंस को मंजूरी दे दी है। लाइसेंस पाने वालों में सीडीओ संदीप कुमार, एसडीएम महोली शशिभूषण राय, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट नीरज पटेल, सीएमओ डॉ. आरके नैय्यर, डीसीओ डॉ. दुष्यंत कुमार, वरिष्ठ कोषाधिकारी जान्हवी मोहन, सीओ उदय प्रताप सिंह शामिल हैं।
मंगलवार दोपहर को यह सूची जारी हुई तो हर तरफ खलबली मच गई। लोग अपना नाम देखने को आतुर रहे। वहीं इस सूची पर चर्चाएं भी खूब हुई। क्योंकि डीएम शीतल वर्मा छुट्टी पर चली गई हैं। जबकि सूची आज प्रकाशित हुई है। इससे चर्चाएं होना तो आम है।
रसूखदार को मिले असलहे
जिन 36 लोगों के असलहे की सूची जारी की गई है। उस सूची में आम आदमी कम खास ज्यादा है। सीडीओ, एसडीएम, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट, सीएमओ, डीसीओ, वरिष्ठ कोषाधिकारी, सीओ के अलावा केंद्रीय उपभोक्ता भंडारन के अध्यक्ष अनुपम राठौर, रामनरेश राठौर को भी लाइसेंस मिला है।
इस सूची में अधिकतर लोग रसूखदार हैं। सूत्रों का कहना है कि लाइसेंस उन्हीं को मिला है जिनकी या तो राजनीतिक पहुंच थी या किसी तरह उीएम के करीबी हो गए थे। वहीं जिले के कई माननीय की सिफारिशें भी नहीं चली है। इस सूची में जिले के सत्ताधारी कुछ माननीय व सांसद के ही करीबी ही सफल हुए हैं।
लंबी-लंबी हांकने वालों को मिली निराशा
शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया शुरू होते ही एक पुलिस अफसर, राजनेता व कुछ पत्रकार लंबी-लंबी हांकते थे। हर जगह पर कहते थे। जब भी लाइसेंस निर्गत किए जाएंगे तो हमारा नाम जरुर होगा। जब चाहेंगेे तब लाइसेंस मंजूर करा लेंगे। लेकिन आज उनको मुंह की खानी पड़ी। अब वह यह कहते नहीं थक रहे हैं कि हमने तो प्रयास ही नहीं किया वरना हो जाता।