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विकराल हुई घाघरा, बाहर आया नदी का पानी

Sun, 15 Jul 2018 01:04 AM IST
Updated Sun, 15 Jul 2018 01:04 AM IST
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विकराल हुई घाघरा, बाहर आया नदी का पानी
नदी का रौद्र रूप देखकर तटीय इलाकों के बाशिंदों में मचा हड़कंप, बाढ़ के आसार
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रेउसा/सीतापुर। पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर अब मैदानी इलाके में दिखने लगा है। हालत यह है कि वहां की बारिश से बैराजों पर जमा जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है। जिसके चलते बैराजों से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। इससे मैदानी इलाके से गुजरने वाली घाघरा नदी के जलस्तर में उफान आ रहा है।

नदी ने विकराल रूप ले लिया है। शुक्रवार रात नदी का पानी तमाम जगहों पर बाहर आ गया है। घाघरा का रौद्र रूप देखकर तटीय क्षेत्र के बाशिंदों में हड़कंप है। उधर, बैराजों से शनिवार को सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, इससे आने वाले दिनों में जलस्तर में और इजाफा होने की उम्मीद है।
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घाघरा में बीते एक सप्ताह से जलस्तर में इजाफा हो रहा है। शुक्रवार रात नदी ने विकराल रूप ले लिया। नतीजा, कोनी, दुर्गा पुरवा, लोधपुरवा, कटैला पुरवा, जैतहिया, नगीना पुरवा आदि गांवों के निकट नदी का पानी बाहर आ गया है। चहलारी पुल के करीब नदी तेजी से कटान कर रही है।
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नदी ने त्यागी बाबा आश्रम के की एक एकड़ जमीन को काटकर बहा दिया है। जबकि उफान मारती नदी का पानी आश्रम में प्रवेश कर गया है। हालत यह है कि करीब 500 बीघा से अधिक खेतों में नदी का पानी भर गया है। दुर्गा पुरवा, कटैला पुरवा के निकट बरसाती नाले के माध्यम से नदी का पानी आबादी की तरफ बढ़ रहा है।

वहीं चहलारी पुल के करीब से श्याम नगर जाने वाले नाले में भी पानी आबादी की तरफ बढ़ रहा है। तटीय क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि अब बाढ़ आने वाली है, शायद इसी वजह से पानी निरंतर बढ़ रहा है। तटीय क्षेत्र के बाशिंदों ने घरेलू सामान समेटकर सुरक्षित ठिकानों की तरफ रुख कर लिया है।

पीड़ित परिवार हाइवे व अन्य स्थानों पर झोपड़ियां डाल रहे हैं। जहां नदी विकराल रूप ले चुकी है, वहीं आने वाले दिनों में भी राहत के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। शनिवार को घाघरा व शारदा बैराजों से करीब 2,30,005 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। माना जा रहा है कि जब यह पानी तटीय क्षेत्र से गुजरेगा, तब नदी का रूप और विकराल हो जाएगा।

इससे तटीय क्षेत्र के गांवों में बाढ़ आना लगभग ही है। उधर पहाड़ों से भी कोई राहत भरी खबर नहीं मिली है। पहाड़ों पर हो रही बारिश की वजह से बनबसा बैराज पर काफी पानी जमा हो रहा है। शनिवार को बनबसा बैराज से 88,408 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। आने वाले दिनों में यह पानी भी सीतापुर से गुजरेगा। जिससे बाढ़ के पानी में और इजाफा होगा।

बांध पर मंडराए संकट के बादल
घाघरा के कहर से तटीय क्षेत्र की आबादी को बचाने के लिए चहलारी पुल के करीब घाघरा पर बनाये रामनगर बांध पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हालत यह है कि समय रहते देखरेख न होने के कारण बांध में गहरे खड्ड व दरारें पड़ रहीं हैं।

क्षेत्र के बाशिंदों का कहना कि अगर समय रहते इस बांध की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में यह बांध तटीय क्षेत्र के बाशिंदों के लिए मुसीबत का सबब बन जाएगा। क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि अगर बांध फटा तो घाघरा का सीधा असर थानगांव तक देखने को मिलेगा।

पानी बढ़ा पर बाढ़ नहीं
घाघरा का पानी जरूर बढ़ा है, लेकिन अभी बाढ़ नहीं आई है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है। बांध में नुकसान की खबर मिली है, जल्द ही बांध को दिखवाकर मरम्मत कराई जाएगी।
-शशिभूषण राय, एसडीएम

आशियाना बसाने के लिए ठिकानों की तलाश
सीतापुर। घाघरा नदी उफनाने लगी है, तटीय क्षेत्र पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में तटीय क्षेत्र के बाशिंदे खतरे को भांप गए हैं। यही वजह है कि घाघरा के तट के किनारे बसे परिवार सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं। हालत यह है कि आशियाने भर की जमीन तलाशने के लिए उन्हें पसीने छूट रहे हैं।

जिसकी वजह से वे बहराइच हाइवे पर ही अपना डेरा डालने को मजबूर हैं। बहुत से ऐसे परिवार हैं, जो क्षेत्र के संपर्क मार्गों को ही अपना आशियाना बनाए हुए हैं। श्याम नगर के विनोद कुमार, बिल्लर पुरवा के जंगू शनिवार को चहलारी मार्ग पर नई झोपड़ियों को बना रहे थे।

दोनों ने बताया कि वे पूरे इलाके में घूम कर देख आए हैं। लेकिन कहीं भी उन्हें आशियाना भर की जमीन नहीं मिल सकी है। नतीजा उन्हेें बहराइच हाइवे के किनारे झोपड़ी डालने को मजबूर होना पड़ रहा है। दोनों ने बताया कि बरसात का मौसम है, ऐसे में खेतों में भी पानी भर जाएगा।


इससे सड़क से सुरक्षित कोई स्थान नहीं है। इसी तरह से महंतपुरवा के हीरा लाल व बेचन समेत करीब 20 परिवारों ने क्षेत्र के रामलाल पुरवा संपर्क मार्ग को ही अपना आशियाना बना रखा है। ये संपर्क मार्ग ही इन दिनों पीड़ित परिवारों के लिए शरण स्थली बने हुए हैं।
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