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बेकाबू हुई घाघरा, 50 गांव बाढ़ की चपेट में
Updated Wed, 15 Aug 2018 01:05 AM IST
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निरंतर बढ़ रहा जलस्तर, हालात बिगड़ने की संभावना
रेउसा/सीतापुर। घाघरा नदी एक बार फिर से बेकाबू हो गई। लगातार बढ़ते जलस्तर से क्षेत्र के करीब 50 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। वहीं नदी का जलस्तर निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। इससे हालात और बिगड़ने के आसार हैं।
उधर, बैराजों से मंगलवार को भी करीब तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिससे आने वाले एक-दो दिनों में बाढ़ का रूप विकराल होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बाढग़्रस्त इलाके में पहुंचकर स्थिति को देखा और पीड़ितों को हरसंभव मदद पहुंचाने का आश्वासन दिया है।
रेउसा इलाके के कोनी गांव में घाघरा बीते एक सप्ताह से कटान कर रही थी। इससे इस गांव के अधिकांश परिवार बेघर हो गए हैं। सोमवार की रात नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई। जिस कारण रात से ही तटीय क्षेत्र के गांवों में पानी घुसने लगा था।
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मंगलवार की सुबह तक फौजदार पुरवा, कोनी, परमेश्वर पुरवा, दुर्गा पुरवा, लोधपुरवा, जैतहिया, मरेली, कटैला पुरवा, ठेकेदार पुरवा, पासिनपुरवा, दर्जिन रेती, जिन्ना पुरवा, रामलाल पुरवा, सलामतपुरवा, सोमवारी पुरवा, जंगल टपरी आदि करीब 50 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए।
इनमें तटीय क्षेत्र के करीब 25 गांव जबर्दस्त तरीके से बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। दुर्गापुरवा जाने वाले मार्ग पर कई स्थानों पर बाढ़ का पानी बह रहा है। जबकि जैतहिया गांव में भी बाढ़ के पानी ने प्रमुख मार्ग को अपनी चपेट में ले लिया है। तटीय क्षेत्र के करीब पांच सरकारी स्कूल फिर से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
खासकर जैतहिया गांव के प्राथमिक विद्यालय व जूनियर हाईस्कूल में काफी पानी भर गया है। यूं कहें कि प्राथमिक विद्यालय से होकर बाढ़ की धार बह रही है। जिसमें स्कूली बच्चे हादसे का शिकार हो सकते हैं। चहलारी स्कूल में भी पानी भर गया है।
उधर चहलारी घाट के पास बाढ़ का पानी त्यागी बाबा के आश्रम को अपनी चपेट में ले रहा है। बाढ़ का पानी तेजी से नगीनापुरवा की तरफ बढ़ रहा है। पूरे इलाके में पांच हजार बीघे से अधिक की खेती बाढ़ की चपेट में आ गई है। खेत से लेकर गांवों तक बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है।
नदी का विकराल रूप देखकर तटीय क्षेत्र में एक बार फिर से हड़कंप मच गया है। लोग एक बार फिर से सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन करने लगे हैं। जहां बाढग़्रस्त इलाके के हालात ऐसे हैं, वहीं आने वाले दिनों में हालात और खराब होने के आसार नजर आ रहे हैं।
मंगलवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 2,97,134 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे आने वाले दिनों में बाढ़ के पानी में और इजाफा होने की संभावना है। कुल मिलाकर आने वाले एक-दो दिनों में जिले के गांजरी इलाके के बाशिंदों को बाढ़ से और सामना करना पड़ेगा।
इधर, सूचना मिलते ही एडीएम विनय पाठक, एसडीएम शशिभूषण राय, तहसीलदार गिरीश झा दल बल के साथ बाढ़ प्रभावित इलाके में पहुंचे। अधिकारियों ने जैतहिया गांव जाकर बाढ़ के हालात देखे। इसके बाद दुर्गापुरवा आदि गांवों में जाकर बाढ़ के हालात का जायजा लिया।
हालात बाढ़ जैसे नहीं, लेकिन साहब गांव नहीं पहुंचे
इन दिनों बाढ़ की वजह से कोनी गांव में त्राहि-त्राहि मची है। एक तरीके से कोनी गांव के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। अधिकांश घर कटकर बह गए हैं। जबकि जो बचें हैं उनमें कमर तक पानी भरा हुआ है। जिंदगी नाव पर आकर टिक गई है। सोना, बैठना, लेटना, खाना सबकुछ नाव पर ही हो रहा है।
लोग पानी में फंसकर रह गए हैं। बावजूद इसके जिम्मेदारों का ऐसा बयान कि अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं है। पीड़ितों को मुंह चिढ़ाने जैसा है। मंगलवार की ही बात है, प्रशासनिक अधिकारियों की टीम कोनी गांव के निकट दुर्गा पुरवा गांव तक पहुंची, लेकिन टीम के अधिकारी चंद कदमों की दूरी पर स्थिति कोनी गांव तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
क्योंकि दुर्गा पुरवा गांव के निकट बाढ़ के पानी में उठ रही लहरों को देख अधिकारियों ने नाव से गांव जाना मुनासिब नहीं समझा और दुर्गा पुरवा गांव से ही कोनी को देख वापस चले आए। अधिकारियों को वापस जाते देख बाढ़ पीड़ितों का कहना था कि अगर हालात बाढ़ जैसे नहीं है, तब साहबानों को कोनी तक जाना चाहिए थे। हालांकि स्थिति भयावह है, लेकिन जिम्मेदार इसे बेहद हल्के अंदाज में आंक रहे हैं।
लेखपाल की शिकायत
अधिकारी बाढ़ग़्रस्त इलाके में पहुंचे हैं, इस बात की जानकारी बाढ़ पीड़ितों को हो गई थी। इस वजह से बाढ़ पीड़ित उस स्थान पर पहुंच गए थे, जहां पर अधिकारियों की टीम मौजूद थी।
कोनी गांव के सुंदर, मुन्नीलाल, सरोज आदि ने अधिकारियों को बताया कि उनका घर कटकर बह गया है, लेकिन अभी तक लेखपाल ने उसका आंकलन नहीं किया है। इस पर अधिकारियों ने क्षेत्रीय लेखपाल को फटकार लगाई और पीड़ितों की सूची दुरुस्त करने को कहा।
तो और बिगड़ेंगे हालात
बैराजों से जिस हिसाब से पानी छोड़ा जा रहा है। उससे हालात में सुधार के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पहाड़ों पर हो रही बारिश की वजह से मैदानों में हालात बिगड़ रहे हैं। पहाड़ों पर हो रही बारिश से बैराजों पर जलस्तर बढ़ रहा है और वहां से नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। जिससे बाढ़ के पानी में इजाफा हो रहा है।
बाक्स
बैराजों से छोड़ा गया पानी
घाघरा 170505 क्यूसेक
शारदा 126629 क्यूसेक
बनबसा 101086 क्यूसेक
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रेउसा/सीतापुर। घाघरा नदी एक बार फिर से बेकाबू हो गई। लगातार बढ़ते जलस्तर से क्षेत्र के करीब 50 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। वहीं नदी का जलस्तर निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। इससे हालात और बिगड़ने के आसार हैं।
उधर, बैराजों से मंगलवार को भी करीब तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिससे आने वाले एक-दो दिनों में बाढ़ का रूप विकराल होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बाढग़्रस्त इलाके में पहुंचकर स्थिति को देखा और पीड़ितों को हरसंभव मदद पहुंचाने का आश्वासन दिया है।
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रेउसा इलाके के कोनी गांव में घाघरा बीते एक सप्ताह से कटान कर रही थी। इससे इस गांव के अधिकांश परिवार बेघर हो गए हैं। सोमवार की रात नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई। जिस कारण रात से ही तटीय क्षेत्र के गांवों में पानी घुसने लगा था।
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मंगलवार की सुबह तक फौजदार पुरवा, कोनी, परमेश्वर पुरवा, दुर्गा पुरवा, लोधपुरवा, जैतहिया, मरेली, कटैला पुरवा, ठेकेदार पुरवा, पासिनपुरवा, दर्जिन रेती, जिन्ना पुरवा, रामलाल पुरवा, सलामतपुरवा, सोमवारी पुरवा, जंगल टपरी आदि करीब 50 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए।
इनमें तटीय क्षेत्र के करीब 25 गांव जबर्दस्त तरीके से बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। दुर्गापुरवा जाने वाले मार्ग पर कई स्थानों पर बाढ़ का पानी बह रहा है। जबकि जैतहिया गांव में भी बाढ़ के पानी ने प्रमुख मार्ग को अपनी चपेट में ले लिया है। तटीय क्षेत्र के करीब पांच सरकारी स्कूल फिर से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
खासकर जैतहिया गांव के प्राथमिक विद्यालय व जूनियर हाईस्कूल में काफी पानी भर गया है। यूं कहें कि प्राथमिक विद्यालय से होकर बाढ़ की धार बह रही है। जिसमें स्कूली बच्चे हादसे का शिकार हो सकते हैं। चहलारी स्कूल में भी पानी भर गया है।
उधर चहलारी घाट के पास बाढ़ का पानी त्यागी बाबा के आश्रम को अपनी चपेट में ले रहा है। बाढ़ का पानी तेजी से नगीनापुरवा की तरफ बढ़ रहा है। पूरे इलाके में पांच हजार बीघे से अधिक की खेती बाढ़ की चपेट में आ गई है। खेत से लेकर गांवों तक बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है।
नदी का विकराल रूप देखकर तटीय क्षेत्र में एक बार फिर से हड़कंप मच गया है। लोग एक बार फिर से सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन करने लगे हैं। जहां बाढग़्रस्त इलाके के हालात ऐसे हैं, वहीं आने वाले दिनों में हालात और खराब होने के आसार नजर आ रहे हैं।
मंगलवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 2,97,134 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे आने वाले दिनों में बाढ़ के पानी में और इजाफा होने की संभावना है। कुल मिलाकर आने वाले एक-दो दिनों में जिले के गांजरी इलाके के बाशिंदों को बाढ़ से और सामना करना पड़ेगा।
इधर, सूचना मिलते ही एडीएम विनय पाठक, एसडीएम शशिभूषण राय, तहसीलदार गिरीश झा दल बल के साथ बाढ़ प्रभावित इलाके में पहुंचे। अधिकारियों ने जैतहिया गांव जाकर बाढ़ के हालात देखे। इसके बाद दुर्गापुरवा आदि गांवों में जाकर बाढ़ के हालात का जायजा लिया।
हालात बाढ़ जैसे नहीं, लेकिन साहब गांव नहीं पहुंचे
इन दिनों बाढ़ की वजह से कोनी गांव में त्राहि-त्राहि मची है। एक तरीके से कोनी गांव के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। अधिकांश घर कटकर बह गए हैं। जबकि जो बचें हैं उनमें कमर तक पानी भरा हुआ है। जिंदगी नाव पर आकर टिक गई है। सोना, बैठना, लेटना, खाना सबकुछ नाव पर ही हो रहा है।
लोग पानी में फंसकर रह गए हैं। बावजूद इसके जिम्मेदारों का ऐसा बयान कि अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं है। पीड़ितों को मुंह चिढ़ाने जैसा है। मंगलवार की ही बात है, प्रशासनिक अधिकारियों की टीम कोनी गांव के निकट दुर्गा पुरवा गांव तक पहुंची, लेकिन टीम के अधिकारी चंद कदमों की दूरी पर स्थिति कोनी गांव तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
क्योंकि दुर्गा पुरवा गांव के निकट बाढ़ के पानी में उठ रही लहरों को देख अधिकारियों ने नाव से गांव जाना मुनासिब नहीं समझा और दुर्गा पुरवा गांव से ही कोनी को देख वापस चले आए। अधिकारियों को वापस जाते देख बाढ़ पीड़ितों का कहना था कि अगर हालात बाढ़ जैसे नहीं है, तब साहबानों को कोनी तक जाना चाहिए थे। हालांकि स्थिति भयावह है, लेकिन जिम्मेदार इसे बेहद हल्के अंदाज में आंक रहे हैं।
लेखपाल की शिकायत
अधिकारी बाढ़ग़्रस्त इलाके में पहुंचे हैं, इस बात की जानकारी बाढ़ पीड़ितों को हो गई थी। इस वजह से बाढ़ पीड़ित उस स्थान पर पहुंच गए थे, जहां पर अधिकारियों की टीम मौजूद थी।
कोनी गांव के सुंदर, मुन्नीलाल, सरोज आदि ने अधिकारियों को बताया कि उनका घर कटकर बह गया है, लेकिन अभी तक लेखपाल ने उसका आंकलन नहीं किया है। इस पर अधिकारियों ने क्षेत्रीय लेखपाल को फटकार लगाई और पीड़ितों की सूची दुरुस्त करने को कहा।
तो और बिगड़ेंगे हालात
बैराजों से जिस हिसाब से पानी छोड़ा जा रहा है। उससे हालात में सुधार के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पहाड़ों पर हो रही बारिश की वजह से मैदानों में हालात बिगड़ रहे हैं। पहाड़ों पर हो रही बारिश से बैराजों पर जलस्तर बढ़ रहा है और वहां से नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। जिससे बाढ़ के पानी में इजाफा हो रहा है।
बाक्स
बैराजों से छोड़ा गया पानी
घाघरा 170505 क्यूसेक
शारदा 126629 क्यूसेक
बनबसा 101086 क्यूसेक