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मोक्षदायिनी सरायन का जल्द होगा उद्धार
Updated Tue, 05 Jun 2018 12:04 AM IST
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नदी तट से अवैध कब्जे हटाकर कराई जाएगी सफाई
सीतापुर। सबकुछ ठीक रहा तो अतिक्रमण व प्रदूषण से बुरी तरह जकड़कर सिसक रही मोक्षदायिनी सरायन का जल्द ही उद्धार होने वाला है। भूमाफिया की कारस्तानी से सिकुड़कर नाला बन गई सरायन नदी को पुनर्जीवित करने की कवायद डीएम शीतल वर्मा शुरू करने जा रही हैं।
इसके बाद एक बार फिर सरायन में कल-कल करती पानी की लहरें हिलोरें मारेंगी। डीएम ने नदी के तट पर अवैध कब्जों को चिन्हित करने के लिए एडीएम को मुआयने के निर्देश दिए हैं। शहर की लाइफ लाइन कही जाने वाली सरायन नदी का उद्गम गोला गोकरननाथ के निकट अहमदनगर से है।
जिले की सीमा में इसका प्रवेश ऐलिया ब्लॉक के सधुवापुर के पास से होता है। शहर के बीचोबीच से होकर बहने वाली सरायन नदी की लंबाई जिले में करीब 120 किलोमीटर है। सीतापुर, रामकोट, कमलापुर क्षेत्रों में होकर बहने वाली सरायन नदी सिधौली इलाके में भटपुर के पास आदि गंगा गोमती में मिल जाती है।
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पिछले तीन दशकों से सरायन के तटीय क्षेत्र पर भूमाफिया ने कब्जा कर रखा है। जबकि फैक्ट्रियों व नालों का गंदा पानी भी इसमें गिराया जाता है। जिसके चलते यह अपना वजूद खोती जा रही है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि सरायन ने सिकुड़कर नाले का स्वरूप ले लिया है।
अब यह अपना अस्तित्व बचाने को जूझ रही है। डीएम शीतल वर्मा ने सरायन को पुनर्जीवित करने की कवायद शुरू कर दी है। उन्होंने नदी के तट पर अवैध कब्जे चिन्हित करने के निर्देश एडीएम को दिए हैं। चिन्हांकन के बाद नदी के तट से अवैध कब्जे हटाए जाएंगे।
इसके अलावा सरायन को मूर्त स्वरूप देने के लिए नदी की सफाई व तट पर पौधरोपण किया जाएगा। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही सरायन में एक बार फिर से स्वच्छ पानी की लहरें हिलोरें मारती नजर आएंगी। फिलहाल प्रशासन इसके जीर्णोद्धार की कवायद में जुट गया है।
कैसे हो रहा नुकसान
-नदी तटों तक कब्जा कर खेती करने से
-प्रदूषित जल नदी में गिराने और मछलियों के शिकार के लिए जहर डालने से
-नदी तटों के पेड़ काटने से
-जल प्रवाह रोकने का प्रयास करने से
-गंदगी डालने से
क्या करना होगा
*नदी के किनारे पौधरोपण
*गंदगी और गंदे पानी को नदी में पहुंचने से रोकना
*नदी की धारा सुचारु रूप से बहे इस संबंध में प्रयास
*पूजन सामग्री को नदी में न डाल कर भू विसर्जन करना
*जल प्रबंधन करना, श्रमदान से सफाई आदि करना
*अवैध खनन व नदी के किनारों पर अवैध कब्जे रोकना
शहर में विकसित होंगे दो नए पार्क
शहर में जल्द ही दो नए पार्क विकसित किए जाएंगे। प्रशासन की ओर से इसके लिए जगह चिन्हित कर ली गई है। हालांकि चयन की औपचारिकता अभी बाकी है। डीएम शीतल वर्मा के मुताबिक, शहर में ऐसी कोई जगह नहीं है, जहां लोग परिवार के साथ घूमने-फिरने जा सकें।
शहर के इकलौते सरोजनी वाटिका पार्क पर लोड ज्यादा है। इसे देखते हुए डीएम ने शहर में दो नए पार्क विकसित करने का निर्णय लिया है। कोई अड़चन नही आई तो जल्द ही शहर वासियों को नए पार्कों की सौगात मिलेगी।
सरायन को मूल स्वरूप मिलने से सुधरेगा जल स्तर
सरायन के जीर्णोद्धार से सीतापुर को कई फायदे होंगे। सबसे बड़ा फायदा यह कि गर्मियों में घटने वाले जल स्तर में सुधार आएगा। जिससे जल संकट जैसी समस्या उत्पन्न नही होगी। इसके अलावा शहर में दो पार्क विकसित करने की कवायद चल रही है। इसके लिए जगह का चयन लगभग किया जा चुका है।
-शीतल वर्मा, डीएम
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सीतापुर। सबकुछ ठीक रहा तो अतिक्रमण व प्रदूषण से बुरी तरह जकड़कर सिसक रही मोक्षदायिनी सरायन का जल्द ही उद्धार होने वाला है। भूमाफिया की कारस्तानी से सिकुड़कर नाला बन गई सरायन नदी को पुनर्जीवित करने की कवायद डीएम शीतल वर्मा शुरू करने जा रही हैं।
इसके बाद एक बार फिर सरायन में कल-कल करती पानी की लहरें हिलोरें मारेंगी। डीएम ने नदी के तट पर अवैध कब्जों को चिन्हित करने के लिए एडीएम को मुआयने के निर्देश दिए हैं। शहर की लाइफ लाइन कही जाने वाली सरायन नदी का उद्गम गोला गोकरननाथ के निकट अहमदनगर से है।
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जिले की सीमा में इसका प्रवेश ऐलिया ब्लॉक के सधुवापुर के पास से होता है। शहर के बीचोबीच से होकर बहने वाली सरायन नदी की लंबाई जिले में करीब 120 किलोमीटर है। सीतापुर, रामकोट, कमलापुर क्षेत्रों में होकर बहने वाली सरायन नदी सिधौली इलाके में भटपुर के पास आदि गंगा गोमती में मिल जाती है।
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पिछले तीन दशकों से सरायन के तटीय क्षेत्र पर भूमाफिया ने कब्जा कर रखा है। जबकि फैक्ट्रियों व नालों का गंदा पानी भी इसमें गिराया जाता है। जिसके चलते यह अपना वजूद खोती जा रही है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि सरायन ने सिकुड़कर नाले का स्वरूप ले लिया है।
अब यह अपना अस्तित्व बचाने को जूझ रही है। डीएम शीतल वर्मा ने सरायन को पुनर्जीवित करने की कवायद शुरू कर दी है। उन्होंने नदी के तट पर अवैध कब्जे चिन्हित करने के निर्देश एडीएम को दिए हैं। चिन्हांकन के बाद नदी के तट से अवैध कब्जे हटाए जाएंगे।
इसके अलावा सरायन को मूर्त स्वरूप देने के लिए नदी की सफाई व तट पर पौधरोपण किया जाएगा। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही सरायन में एक बार फिर से स्वच्छ पानी की लहरें हिलोरें मारती नजर आएंगी। फिलहाल प्रशासन इसके जीर्णोद्धार की कवायद में जुट गया है।
कैसे हो रहा नुकसान
-नदी तटों तक कब्जा कर खेती करने से
-प्रदूषित जल नदी में गिराने और मछलियों के शिकार के लिए जहर डालने से
-नदी तटों के पेड़ काटने से
-जल प्रवाह रोकने का प्रयास करने से
-गंदगी डालने से
क्या करना होगा
*नदी के किनारे पौधरोपण
*गंदगी और गंदे पानी को नदी में पहुंचने से रोकना
*नदी की धारा सुचारु रूप से बहे इस संबंध में प्रयास
*पूजन सामग्री को नदी में न डाल कर भू विसर्जन करना
*जल प्रबंधन करना, श्रमदान से सफाई आदि करना
*अवैध खनन व नदी के किनारों पर अवैध कब्जे रोकना
शहर में विकसित होंगे दो नए पार्क
शहर में जल्द ही दो नए पार्क विकसित किए जाएंगे। प्रशासन की ओर से इसके लिए जगह चिन्हित कर ली गई है। हालांकि चयन की औपचारिकता अभी बाकी है। डीएम शीतल वर्मा के मुताबिक, शहर में ऐसी कोई जगह नहीं है, जहां लोग परिवार के साथ घूमने-फिरने जा सकें।
शहर के इकलौते सरोजनी वाटिका पार्क पर लोड ज्यादा है। इसे देखते हुए डीएम ने शहर में दो नए पार्क विकसित करने का निर्णय लिया है। कोई अड़चन नही आई तो जल्द ही शहर वासियों को नए पार्कों की सौगात मिलेगी।
सरायन को मूल स्वरूप मिलने से सुधरेगा जल स्तर
सरायन के जीर्णोद्धार से सीतापुर को कई फायदे होंगे। सबसे बड़ा फायदा यह कि गर्मियों में घटने वाले जल स्तर में सुधार आएगा। जिससे जल संकट जैसी समस्या उत्पन्न नही होगी। इसके अलावा शहर में दो पार्क विकसित करने की कवायद चल रही है। इसके लिए जगह का चयन लगभग किया जा चुका है।
-शीतल वर्मा, डीएम