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घाघरा में समाई 10 बीघा जमीन

Mon, 22 Aug 2016 11:26 PM IST
Amar ujala Bureau
Amar ujala Bureau Updated Mon, 22 Aug 2016 11:26 PM IST
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10 Bhigha land cut in Ghaghara water
- फोटो : balia
गांजर में बाढ़ का संकट लगभग खत्म हो गया है, लेकिन कटान जारी है। सबसे अधिक नुकसान रेउसा क्षेत्र में हो रहा है, जहां घाघरा नदी करीब पांच गांवों के आसपास कटान कर रही है। रविवार रात करीब 10 बीघा खेती योग्य भूमि कटकर घाघरा में समा गई।
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पचीसा गांव में खेतिहर भूमि कटकर नदी में बह रही है। उधर, शारदा व घाघरा बैराजों से 72 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। घाघरा नदी कोनी, दुर्गा पुरवा, परमेश्वर पुरवा, ठेकेदार पुरवा के निकट खेतों में कटान कर रही है। करीब दस बीघा खेत कटकर घाघरा में समा गए हैं।
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कोनी गांव के कई घर कटान के मुहाने पर हैं। घाघरा का कहर देखकर ग्रामीण भयभीत हैं। दुर्गा पुरवा के निकट कटी 400 मीटर सड़क अभी तक दुरुस्त नहीं की जा सकी है। कोई ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन बहाल हो सके।
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मुख्य मार्ग से इन ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह से ठप है। सबसे बड़ी समस्या ये है कि अगर दोबारा इन गांवों में बाढ़ की नौबत आ जाए, तब यहां बसने वाले परिवार चाह कर भी आसानी से बाहर नहीं निकल सकेंगे। दुर्गा पुरवा गांव में ही निर्मल पुरवा गांव के कटान पीड़ित भी ठहरे हुए हैं।

ये परिवार बाढ़ का पानी हट जाने के बाद भी मुसीबत का दंश झेल रहे हैं। टापू पर बसे पचीसा गांव में भी घाघरा नदी कहर बरपा रही है। यहां पर भी घाघरा नदी खेती को काट रही है। रामपुर मथुरा क्षेत्र में घाघरा का कटान हल्का हो गया है। यहां पर लोधन पुरवा के निकट नदी कटान कर रही है।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कटान की रफ्तार धीमी होना अच्छा संकेत है। कम से कम वे परिवार मुसीबत की मार से बच जाएंगे, जिनके घर अभी कटान की भेंट नहीं चढ़े हैं। घाघरा व शारदा बैराजों से करीब 72 हजार 835 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।

लोगों का कहना है कि इस पानी से नदी के जलस्तर में मामूली इजाफा होगा। नदी किनारों से करीब तीन फीट नीचे बह रही है। पचीसा गांव के लोगों का कहना है कि 300 परिवार गांव से बाहर निकलना चाह रहे हैं। इन परिवारों के पास ऐसा साधन नहीं है, जिससे सामान लेकर नदी पार कर सकें।

यहां बसे परिवारों का कहना है कि जिस तरह से नदी कटान कर रही है, उससे प्रतीत हो रहा है कि टापू का बच पाना मुश्किल है, इसलिए यहां से निकलने में ही भलाई है। क्षेत्र के दुर्गा पुरवा गांव के निकट 400 मीटर दूरी तक सड़क कटकर बह गई है।


कोनी व दुर्गा पुरवा गांवों में करीब 400 परिवार हैं। इन परिवारों को जरूरत का सामान लेेने के लिए गांव के बाहर निकलना जरूरी है। जिसकी वजह से ग्रामीण खेत की एक पतली मेड़ के सहारे गांव से बाहर निकलते हैं। यहां से गुजरते वक्त इन ग्रामीणों के नदी में गिरने का खतरा मंडराता रहता है।
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