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Siddharthnagar News: तस्करी की बिसात पर माेहरा बनकर दाैड़ रहे युवा

Fri, 20 Feb 2026 11:55 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 20 Feb 2026 11:55 PM IST
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Youths running as pawns on the chessboard of smuggling
सिद्धार्थनगर। सीमावर्ती इलाके में मादक पदार्थ के तस्करी का नेटवर्क सक्रिय नजर आ रहा है। बढ़नी बाॅर्डर पर तीन दिन में मादक पदार्थ की तस्करी के दो मामले सामने आए, जिसमें छल किलो चरस और नौ ग्राम स्मैक की बरामदगी हुई, जो नशे के धंधेबाजों के फिर से सक्रिय होने की गवाही दे रहे हैं। इसमें सबसे अहम बात यह है कि सामान की तस्करी कर बॉर्डर इस पार या उस पार करने वाले कैरियर हैं, जिन्हें बताए हुए ठिकाने पर पहुंचाने के लिए तय रकम मिल रही है। दोनों देशों में बैठकर सिंडिकेट चलाने वाले धंधेबाज पर्दे के पीछे से बिसात बिछाए जरूरतमंद युवाओं को पैसों के लालच देकर प्यादे की तरह कैरियर के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
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सूत्रों की मानें तो बढ़नी और खुनुवां बाॅर्डर मादक पदार्थ की तस्करी का लांचिंग प्वाइंट है। यहां विभिन्न स्थानों से लोग आते हैं। माल बाॅर्डर से इधर से उधर हुआ कि फिर कोई पकड़ नहीं सकता है। इसलिए तस्कर इस बाॅर्डर का प्रयोग अधिक करते हैं। दो बरामदगी ने बता दिया कि धंधा तेज है। यह तो वह मामले हैं जो सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ में आए हैं। ऐसे ही न जाने कितने मामले हैं, जिनमें माल चोरी छिपे इधर से उधर हो रहा है। इसके बारे भनक तक नहीं लगती है।
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ऑनलाइन माध्यम से डील : नेपाल बाॅर्डर पर रहने वाले सूत्रों के मुताबिक अब तस्करी करने का तौर तरीका एकदम बदल गया है। अब डील ऑनलॉइन माध्यम से होती है। चाहे चरस, स्मैक हो या फिर थाईलैंड का गांजा। डीलरों की ऑनलाइन सैंपलिंग और डील चलती है। रुपये का ट्रांजेक्शन भी डिजिटल ही होता है। केवल डिलीवरी का काम कैरियर के जरिये किया जा रहा है। अभी उसमें बदलाव नहीं हो पाया है। हां, यह जरूर है कि तस्करी का धंधा चलाने वाले ऐसे ही लोगों को चुनते हैं जो नशे के आदी हों या फिर जिन्हें शॉर्टकट में होने वाले काम के जरिये जल्द और अधिक रुपये कमाने का लालच हो।
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ऐसे जरूरतमंदों को टारगेट कर हर बार नए कैरियर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे इनकी कोई पहचान न हो सके। बढ़नी बाॅर्डर पर दोनों मामलों में पकड़ में आए तस्कर कैरियर थे और नेपाल के ही रहने वाले थे। उनका कहना था कि बाॅर्डर पार सामान लेकर पहुंचने के बाद कोई लेने वाला मिलेगा, उसे दे देना। उससे मिलने से पहले ही वह पकड़ लिए गए। इसी प्रकार नौ ग्राम स्मैक मामले में पकड़ में आए आरोपी को गोंडा के किसी व्यक्ति को डिलीवरी देनी थी। उससे पहले उसे दबोच लिया गया। लेकिन, असल में सिंडिकेट चला कौन रहा है, उसकी धरपकड़ नहीं हो पाती है। पुड़िया में होता है स्मैक का कारोबार : बढ़नी बाॅर्डर पर स्मैक की तस्करी के मामले को लेकर बदनाम है। बाॅर्डर से जुड़े अहमद के अनुसार स्मैक का काम पुड़िया के नाम से चलता है। इस पुड़िया में होने वाले इस कारोबार को संचालित करने वाले मुख्य किरदार तक पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां नहीं पहुंच पा रही हैं। प्यादे तक कार्रवाई सीमित रह जाती है, जो पकड़े जाने पर इधर जेल जाते हैं और उधर फिर बाहर आते ही उसे धंधे में लिप्त हो जाते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र के कुछ जागरूक नागरिकों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि कुछ नई उम्र के युवा हैं जो पूरे दिन घूमते हैं और ठाटबाट से रहते हैं। उनका यही काम है कि युवाओं को स्मैक का लत दिलाते हैं, जब वह आदी होते हैं तो खरीदने के लिए दौड़ लगाने लगते हैं। सुरक्षा एजेंसी और पुलिस विभाग इनपर कार्रवाई भी नहीं कर पा रही है।
चुनिंदा स्थानों से मिलती है पुड़िया : बढ़नी बाॅर्डर कस्बे में सक्रिय होकर कुछ लोग ऐसा काम कर रहे हैं। सीमावर्ती इलाके एक कृष्णानगर नेपाल के किराना के दुकानदार के मुताबिक तीन चार युवक हैं जो घूमते रहते हैं। इसके बाद एक चिह्नित स्थान पर खड़े हो जाते हैं। जहां बाइक से कुछ युवक आते हैं।

जो एक-एक करके पुड़िया लेते हैं और निकल जाते हैं। कुछ चाय की दुकान है, जहां एक युवक बैठेगा और फिर धीरे-धीरे चाय पीने के लिए भारतीय और नेपाल के युवक जुटते हैं। चाय पीने में आदान-प्रदान कर लिया जाता है। रुपये की हिसाब हाथो-हाथ नहीं करते हैं, उसे बाद में कई बार करते हैं तो कुछ ऑनलाइन भुगतान करते हैं। मौजूदा समय में तेजी से यह कार्य हो रहा है।
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