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Siddharthnagar News: सोशल मीडिया की मदद से बदली तकदीर मोहन ने पेश की कामयाबी की नजीर
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मोहन यादव।
संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। डुमरियागंज तहसील स्थित सिकहरा कोहड़ा गांव के मोहन यादव सोशल मीडिया के चमकते सितारे बन गए हैं। कभी आर्थिक तंगी और सामाजिक तानों का सामना करने वाले मोहन ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से गांव में ही रहकर हर महीने एक लाख रुपये कमाकर अपनी किस्मत बदल दी है।
डुमरियागंज क्षेत्र के सिकहरा में 1990 में जन्मे मोहन यादव ने पीपुल्स इंटर कॉलेज, डुमरियागंज से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। मौलाना अबुल कलाम आजाद महाविद्यालय से बीए करते समय 2009 में आर्थिक मजबूरियों के चलते उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने एक छोटी किराने की दुकान शुरू की। 2009 में ही उनकी शादी हुई और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच, फरवरी 2024 में उन्होंने वीडियो बनाना शुरू किया।
शुरुआत में उनका मकसद सिर्फ वीडियो वायरल करना रहा, लेकिन छह महीने बाद जब उनका यूट्यूब चैनल मॉनिटाइज हुआ, तो उन्हें आय का स्रोत दिखा। वीडियो बनाने का सफर आसान नहीं था। उनकी दुकान टूट गई, आर्थिक हालात और बिगड़ गए। रिश्तेदारों ने बाहर जाकर कमाने की सलाह दी। मोहन की पत्नी ने उन्हें हर कदम पर सहारा दिया।
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भनवापुर। डुमरियागंज तहसील स्थित सिकहरा कोहड़ा गांव के मोहन यादव सोशल मीडिया के चमकते सितारे बन गए हैं। कभी आर्थिक तंगी और सामाजिक तानों का सामना करने वाले मोहन ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से गांव में ही रहकर हर महीने एक लाख रुपये कमाकर अपनी किस्मत बदल दी है।
डुमरियागंज क्षेत्र के सिकहरा में 1990 में जन्मे मोहन यादव ने पीपुल्स इंटर कॉलेज, डुमरियागंज से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। मौलाना अबुल कलाम आजाद महाविद्यालय से बीए करते समय 2009 में आर्थिक मजबूरियों के चलते उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने एक छोटी किराने की दुकान शुरू की। 2009 में ही उनकी शादी हुई और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच, फरवरी 2024 में उन्होंने वीडियो बनाना शुरू किया।
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शुरुआत में उनका मकसद सिर्फ वीडियो वायरल करना रहा, लेकिन छह महीने बाद जब उनका यूट्यूब चैनल मॉनिटाइज हुआ, तो उन्हें आय का स्रोत दिखा। वीडियो बनाने का सफर आसान नहीं था। उनकी दुकान टूट गई, आर्थिक हालात और बिगड़ गए। रिश्तेदारों ने बाहर जाकर कमाने की सलाह दी। मोहन की पत्नी ने उन्हें हर कदम पर सहारा दिया।
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