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कब खत्म होगा आपूर्ति में भेदभाव
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 12 Nov 2017 10:22 PM IST
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सिद्धार्थनगर। नगर पालिका क्षेत्र भले ही एक हो, लेकिन बिजली आपूर्ति की व्यवस्था इसके दो हिस्सों में बंटने का अहसास कराती है। एक हिस्सा वह है, जहां मुख्यालय की तरह अच्छी आपूर्ति होती है तो घनी आबादी वाले मुख्य नगर में गांवों जैसे हाल हैं। हर घंटे कट लगते हैं। लोकल फाल्ट और लो वोल्टेज की समस्या नागरिकों को आजिज कर चुकी है। वह इससे निजात चाहते हैं, मगर उनकी रहनुमाई करने वाले अब तक मौन हैं।
विद्युत आपूर्ति का यह फर्क रेलवे लाइन पार करते ही नजर आने लगता है। सिविल लाइन, उसका रोड सहित अन्य हिस्से में मुख्यालय की तरह 20-22 घंटे आपूर्ति दी जा रही है। वहीं, लाइन के दूसरी तरफ स्थित इंदिरानगर, पूरब पड़ाव, स्टेशन रोड, पुरानी सब्जी मंडी सरीखे अधिकांश इलाके में आपूर्ति बदहाल है। यहां आपूर्ति तो होती है, मगर पुराने पोल और जर्जर तारों के कारण हर घंटे बिजली गुल हो जाती है। घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में चारों तरफ बिजली तारों का मकड़जाल बिछा हुआ है। तार इतने पुराने हैं कि लोड पड़ते ही टूटकर गिरने लगते हैं।
आबादी बढ़ने के साथ लोड लगातार बढ़ रहा है, मगर तारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं किया जा रहा। नगर के मध्य सिद्धार्थ तिराहे पर ही जर्जर तार आए दिन टूटकर गिरते रहते हैं। चौराहे पर बिना सुरक्षा घेरा लगाए ही तार को सड़क पार कराया गया है। इससे हादसे का खतरा बना हुआ है और लोग भयभीत हैं, लेकिन जिम्मेदार ब्रेफिक्र हैं। चैन से सो रहे अफसरों को जगाने के लिए अब तक कोई आगे नहीं आया, नतीजा वर्षों से बनी समस्या यथावत है। लोगों का कहना है कि इस बार जिन हाथों में कमान सौंपेंगे, उनसे इस बारे में वादा लिया जाएगा। उन्हें प्रतिनिधित्व सौंपते हैं तो समस्याओं का समाधान कराने का दायित्व भी उन्हें ही उठाना चाहिए।
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विद्युत आपूर्ति का यह फर्क रेलवे लाइन पार करते ही नजर आने लगता है। सिविल लाइन, उसका रोड सहित अन्य हिस्से में मुख्यालय की तरह 20-22 घंटे आपूर्ति दी जा रही है। वहीं, लाइन के दूसरी तरफ स्थित इंदिरानगर, पूरब पड़ाव, स्टेशन रोड, पुरानी सब्जी मंडी सरीखे अधिकांश इलाके में आपूर्ति बदहाल है। यहां आपूर्ति तो होती है, मगर पुराने पोल और जर्जर तारों के कारण हर घंटे बिजली गुल हो जाती है। घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में चारों तरफ बिजली तारों का मकड़जाल बिछा हुआ है। तार इतने पुराने हैं कि लोड पड़ते ही टूटकर गिरने लगते हैं।
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आबादी बढ़ने के साथ लोड लगातार बढ़ रहा है, मगर तारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं किया जा रहा। नगर के मध्य सिद्धार्थ तिराहे पर ही जर्जर तार आए दिन टूटकर गिरते रहते हैं। चौराहे पर बिना सुरक्षा घेरा लगाए ही तार को सड़क पार कराया गया है। इससे हादसे का खतरा बना हुआ है और लोग भयभीत हैं, लेकिन जिम्मेदार ब्रेफिक्र हैं। चैन से सो रहे अफसरों को जगाने के लिए अब तक कोई आगे नहीं आया, नतीजा वर्षों से बनी समस्या यथावत है। लोगों का कहना है कि इस बार जिन हाथों में कमान सौंपेंगे, उनसे इस बारे में वादा लिया जाएगा। उन्हें प्रतिनिधित्व सौंपते हैं तो समस्याओं का समाधान कराने का दायित्व भी उन्हें ही उठाना चाहिए।
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