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कहीं पानी भरा तो कहीं सड़क कटने से बढ़ी मुसीबत

Tue, 18 Oct 2022 11:43 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 18 Oct 2022 11:43 PM IST
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water filling and road cuts increased troublesome
औराताल के सुकरौली गांव के बाढ़ के पानी में जुगाड़ नाव बनाकर आवागमन करते लोग। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
कहीं पानी भरा तो कहीं सड़क कटने से बढ़ी मुसीबत
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तुलसियापुर। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के करीब चालीस गांव 12 दिन से बाढ़ से जूझ रहे हैं। कहीं रास्तों पर पानी भर गया है तो कहीं रास्ते कट गए हैं। कठेला-तुलसियापुर मार्ग को सोमवार को मटियार में बाढ़ के पानी ने काट पूरी तरह से काट दिया। पानी घटने के बाद भी आवागमन शुरू नहीं हो पाएगा। क्षेत्रवासियों ने बाढ़ राहत के साथ मार्ग की मरम्मत कराने की मांग की है।
क्षेत्र के मो.सफात, सुरेंद्र चौहान, अजय वरुण, अशोक पासवान, चौधरी निसार अहमद ने बाढ़ से कटे मार्गों की मरम्मत की मांग की है। पीडब्ल्यूडी विभाग के जेई संतोष मणि त्रिपाठी ने बताया कि सड़क कटने की जानकारी है। शीघ्र ही आवागमन शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
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पकड़ी बाजार प्रतिनिधि के अनुसार, सरफराज मेमोरियल इंटर कॉलेज बभनी बाजार में बाढ़ के पानी के कारण अभिलेख व फर्नीचर खराब हो गए हैं। प्रधानाचार्य अहतहर अली ने बाढ़ के पानी से इस बार काफी नुकसान हुआ है।
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ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें भी जलमग्न
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के सुरजी सुहेलवा होते हुए बाढ़ का पानी सेखुईंया परसा हुसैन मार्ग पर पहुंच जाने से 10-12 गांवों के लोगों की राह मंगलवार से मुश्किल भरी हो गई है। पांच हजार से अधिक की आबादी पानी में घुसकर आने जाने के लिए मजबूर हो गई है। क्षेत्र के जमील अहमद, अब्दुल शाहिद, अब्दुल वदूद, आफत अली, मेहताब अहमद, सुनील कुमार, अब्दुल् मोईद, दिगपाल पांडे, राम रतन प्रजापति ने बताया कि बाढ़ का पानी सड़क के साथ-साथ सिवान और खेतों में भर जाने से सैकड़ों बीघा धान की फसल बर्बाद हो गई है।
राहत पैकेट के लिए लगाई आवाज
जोगिया। जोगिया क्षेत्र के भुतहिया में छह दिन से छत पर दिन काट रहे एक परिवार के चार सदस्यों को तीन दिन बाद लंच पैकेट मिले। दोपहर में तहसीलदार आरआर रमन लंच पैकेट बांटने जा रहे थे तो रामवृक्ष ने आवाज लगाई। वे स्टीमर घुमवाकर गए और पति पत्नी एवं दो बच्चों के लिए लंच पैकेट दिया। रामवृक्ष ने धन्यवाद देते हुए कहा कि साहब! भूख से मेरे बच्चे रो रहे थे। तीन दिन से खाना नहीं मिला था। जो कुछ घर में था, उसे खाकर जान बचा रहे थे। स्टीमर में रामकरन गुप्ता, राहुल मणि त्रिपाठी, कमलेश पांडेय, कृष्ण नंद चौधरी, शुभम श्रीवास्तव मौजूद थे।
कमर तक पानी से होकर जाते हैं ग्रामीण, नहीं है नाव
शाहपुर। डुमरियागंज तहसील अंतर्गत ग्राम रमवापुर उर्फ नेबुआ के ग्रामीण कमर तक पानी से होकर आते-जाते हैं। बाढ़ के चलते ज्यादातर लोग अपना घर छोड़कर दूसरे स्थानों पर चले गए थे।
वैसे तो इस ग्राम पंचायत में दो नावें थीं। एक नाव तहसील प्रशासन की ओर से मुहैया कराई गई थी, लेकिन गांव की नाव का कोई पता नहीं है। रमवापुर उर्फ नेबुआ निवासी अमजद अली खान ने बताया कि उनकी बेटी को सप्ताह से बुखार है। उसे सुबह और शाम को डॉक्टर को दिखाने ले जाते हैं। समय से नाव नहीं मिलने के कारण बेटी को कंधे पर बैठाकर गले तक पानी पार करके आते-जाते हैं।

प्रमोद ने कहा कि गांव की नाव पता नहीं है। विजय कुमार ने कहा कि उन्होंने सिंचाई विभाग के पाइप से जुगाड़ से नाव बना ली है। मोनू श्रीवास्तव ने कहा कि पहले तो कभी-कभार नाव मिल जाती थी, लेकिन सोमवार को नाव नहीं मिली तो पानी पार करके अपनी बीमार मां के लिए दवा खरीदने गए।
इस संबंध में उपजिलाधकारी डुमरियागंज कुणाल सिंह ने कहा कि स्टीमर खराब हो गया है। जल्द ही नाव की व्यवस्था की जाएगी।
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