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Siddharthnagar News: तेज बुखार में बच्चों को आ रहा झटका
Sat, 14 Oct 2023 11:54 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 14 Oct 2023 11:54 PM IST
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फोटो- है
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में बढ़ी मरीजों की संख्या
एक माह में भर्ती हुए 291 बच्चे, गंभीर हाल 43 हुए थे रेफर, सात बच्चों की गई थी जान
चिकित्सक बता रहे अभी अक्तूबर अंतिम तक रहेगा बीमारी का असर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर आपके बच्चे को बुखार है तो सावधान हो जाएं। बिना देरी किए चिकित्सक को दिखाएं और उनकी सलाह पर ही दवा लें। अगर देरी किए और झोलाछाप के चक्कर में फंसे तो यह बच्चे के लिए घातक साबित हो सकता है।
दो दिन के बुखार में झटके साथ ही बच्चों में बेहोश होने के मामले में बढ़ रहे हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में इस प्रकार की रोगियों की संख्या बढ़ी है। पीआईसीयू में लगभग हर बेड पर बच्चे भर्ती हैं। चिकित्सक इसे मौसम का बदलाव बता रहे हैं। उनका कहना है कि अक्तूबर माह के अंत तक इस पर काबू मिलेगा।
मौसम में बदलाव का असर सभी उम्र के लोगों पर पड़ता है। लेकिन बच्चों पर इसका असर कुछ और अधिक पड़ता है। जैसा कि मौजूदा समय में देखा जा रहा है। ओपीडी से लेकर एसएनसीयू और पीआईसीयू तक बच्चे भरे पड़े हैं।
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ओपीडी में दो बालरोग विशेषज्ञ बैठते हैं। इनके पास दोपहर एक बजे तक 198 बीमार बच्चे पहुंचे थे। इसमें 90 प्रतिशत बच्चों को कई दिन से तेज बुखार की शिकायत थी। कई बच्चे तो ऐसे थे, जिन्हें कई बार झटका आ चुका था। दवा के बाद बुखार कम हुआ तो लोग घर पर ही बैठ गए।
वहीं, बुखार पीड़ित बच्चों के लिए बने पीआईसीयू वार्ड में हर बेड पर बच्चे भर्ती हैं। इनमें सभी बच्चों में एक ही लक्षण बुखार और झटका आना पाया गया। कोई एक-दो दिन से तो कई पांच दिन से भर्ती थे। स्वास्थ्य कर्मियों के मुताबिक, सितंबर माह में 291 बच्चों में गंभीर हाल वाले 43 रेफर कर दिए गए। जबकि स्थिति बिगड़ने के बाद पहुंचने के कारण सात बच्चों की मौत हो गई थी। अन्य बच्चे स्वस्थ होकर घर गए।
इस माह में अब तक 100 से अधिक बच्चे भर्ती हो चुके हैं। चिकित्सक इसे मौसम का बदलाव बता रहे हैं। इस संबंध में प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि वार्ड में भर्ती होने वाले बच्चों का मौजूदा संसाधन में बेहतर इलाज करने का प्रयास किया जाता है।
बोले चिकित्सक, यह बरतें सावधानी
मौसम में बदलाव हो रहा है। सुबह और शाम को ठंड पड़ने लगी है। यह बच्चों के लिए काफी नुकसानदायक है। इसलिए सुबह और शाम को बच्चों को फुल आस्तीन का कपड़ा पहनाएं। उन्हें रात में खुले आसमान में सुलाएं। साफ और ताजा खाना खिलाएं। घर में सफाई रखें और पानी गुनगुना करके दें। बाहर की वस्तुओं को कत्तई न खाने दें। अगर बुखार आता है तो बिना देरी किए किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह पर दवा खिलाएं। अक्तूबर माह के अंत तक झटके के बुखार में कमी आएगी। सतर्कता बहुत ही जरूरी है।
-डॉ. फजल खान, बालरोग विशेषज्ञ, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में बढ़ी मरीजों की संख्या
एक माह में भर्ती हुए 291 बच्चे, गंभीर हाल 43 हुए थे रेफर, सात बच्चों की गई थी जान
चिकित्सक बता रहे अभी अक्तूबर अंतिम तक रहेगा बीमारी का असर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर आपके बच्चे को बुखार है तो सावधान हो जाएं। बिना देरी किए चिकित्सक को दिखाएं और उनकी सलाह पर ही दवा लें। अगर देरी किए और झोलाछाप के चक्कर में फंसे तो यह बच्चे के लिए घातक साबित हो सकता है।
दो दिन के बुखार में झटके साथ ही बच्चों में बेहोश होने के मामले में बढ़ रहे हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में इस प्रकार की रोगियों की संख्या बढ़ी है। पीआईसीयू में लगभग हर बेड पर बच्चे भर्ती हैं। चिकित्सक इसे मौसम का बदलाव बता रहे हैं। उनका कहना है कि अक्तूबर माह के अंत तक इस पर काबू मिलेगा।
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मौसम में बदलाव का असर सभी उम्र के लोगों पर पड़ता है। लेकिन बच्चों पर इसका असर कुछ और अधिक पड़ता है। जैसा कि मौजूदा समय में देखा जा रहा है। ओपीडी से लेकर एसएनसीयू और पीआईसीयू तक बच्चे भरे पड़े हैं।
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ओपीडी में दो बालरोग विशेषज्ञ बैठते हैं। इनके पास दोपहर एक बजे तक 198 बीमार बच्चे पहुंचे थे। इसमें 90 प्रतिशत बच्चों को कई दिन से तेज बुखार की शिकायत थी। कई बच्चे तो ऐसे थे, जिन्हें कई बार झटका आ चुका था। दवा के बाद बुखार कम हुआ तो लोग घर पर ही बैठ गए।
वहीं, बुखार पीड़ित बच्चों के लिए बने पीआईसीयू वार्ड में हर बेड पर बच्चे भर्ती हैं। इनमें सभी बच्चों में एक ही लक्षण बुखार और झटका आना पाया गया। कोई एक-दो दिन से तो कई पांच दिन से भर्ती थे। स्वास्थ्य कर्मियों के मुताबिक, सितंबर माह में 291 बच्चों में गंभीर हाल वाले 43 रेफर कर दिए गए। जबकि स्थिति बिगड़ने के बाद पहुंचने के कारण सात बच्चों की मौत हो गई थी। अन्य बच्चे स्वस्थ होकर घर गए।
इस माह में अब तक 100 से अधिक बच्चे भर्ती हो चुके हैं। चिकित्सक इसे मौसम का बदलाव बता रहे हैं। इस संबंध में प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि वार्ड में भर्ती होने वाले बच्चों का मौजूदा संसाधन में बेहतर इलाज करने का प्रयास किया जाता है।
बोले चिकित्सक, यह बरतें सावधानी
मौसम में बदलाव हो रहा है। सुबह और शाम को ठंड पड़ने लगी है। यह बच्चों के लिए काफी नुकसानदायक है। इसलिए सुबह और शाम को बच्चों को फुल आस्तीन का कपड़ा पहनाएं। उन्हें रात में खुले आसमान में सुलाएं। साफ और ताजा खाना खिलाएं। घर में सफाई रखें और पानी गुनगुना करके दें। बाहर की वस्तुओं को कत्तई न खाने दें। अगर बुखार आता है तो बिना देरी किए किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह पर दवा खिलाएं। अक्तूबर माह के अंत तक झटके के बुखार में कमी आएगी। सतर्कता बहुत ही जरूरी है।
-डॉ. फजल खान, बालरोग विशेषज्ञ, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर