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Siddharthnagar News: ग्रामीणों ने लगाया मनमाने ढंग से बांध के निर्माण का आरोप
Mon, 04 May 2026 01:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 04 May 2026 01:36 AM IST
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भनवापुर। शाहपुर-भोजपुर बांध के किनारे बसे भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के सोनखर और मछिया गांव पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। गांव को सुरक्षित करने के लिए बांध का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार दोनों गांव को नदी की तरफ छोड़कर ही बांध का निर्माण करा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मनमाने ढंग से बांध का निर्माण कराया जा रहा है। अगर राप्ती नदी बरसात में विकराल रूप दिखाती है तो दोनों गांव का अस्तित्व मिट सकता है। ग्रामीणों ने राप्ती नदी और गांवों के बीच में बांध का निर्माण करवाए जाने की मांग की है।
क्षेत्र से निकली राप्ती नदी पर बने शाहपुर-भोजपुर बांध के करीब बसे सैकड़ों गांव हर साल बाढ़ से तबाही झेलते हैं। हर वर्ष हजारों बीघा कृषि योग्य भूमि, लोगों के आशियाने विलीन हो जाते हैं और सैकड़ों लोगों बेघर हो जाते हैं। कटान और बाढ़ रोकने के तमाम दावों के बावजूद हर साल कई गांवों के जमीन कटान के कारण नदी की गोद में समा जाते हैं। शाहपुर भोजपुर बांध का निर्माण कार्य पिछले कई वर्षों से कराया जा रहा है, लेकिन अब भी कई जगह बांध पर गैप बरकरार है। ऐसे में भनवापुर ब्लॉक छेत्र के सैकड़ों ग्राम पंचायतों के हजारों किसान आगामी खरीफ के फसल की खेती को लेकर डरे हुए हैं।
इसके बावजूद बाढ़ खंड इकाई ने अभी तक इन गांव के लोगों को नदी की कटान और बाढ़ से बचाने के लिए बांध की गैपिंग भरने का कोई कार्य शुरू नहीं किया है। इतना ही नहीं भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के सोनखर और मछिया गांव के पास बांध का निर्माण नहीं करवाया है। मछिया गांव के फिरोज ने बताया कि उसके गांव के पश्चिम डीह और राप्ती नदी के बीच बांध का निर्माण हो रहा है जबकि गांव के ही पूरब डीह को नदी की तरफ करके बांध बनाए जाने का प्रस्ताव जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से बताया जा रहा है, जिसको लेकर ग्रामीणों में आक्रोश भी है। लोग विभाग को अपना जमीन बैनामा नहीं कर रहे हैं।
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गांव के शाहिद, हारून मलिक, अब्दुल रहीम आदि ने बताया कि अगर गांव के पूरब डीह को नदी के तरफ करके बांध निर्माण किया गया तो इस डीह पर बसे करीब चार दर्जन से अधिक घर नदी में विलीन हो सकते हैं। बांध का निर्माण गांव को सुरक्षित करने के लिए किया जाता है जबकि यहां ठीक इसके उल्टा किया जा रहा है। वहीं, सोनखर गांव के ग्राम प्रधान इजहारुल हसन बताया कि उनके गांव और नदी के बीच पहले बांध बनाया गया था, मगर नया बांध नदी और गांव को एक साथ एक तरफ करके बनाया जा रहा है। अगर बांध इस तरह बनाया गया तो राप्ती नदी में बाढ़ आने के साथ ही गांव के भी बह जाने का खतरा हमेशा बना रहेगा। ग्रामीणों ने बांध को नदी और गांव के बीच बनाने या पुराने बांध को ही मरम्मत कर उसे थोड़ा ऊंचा करवाए जाने की मांग की है।
एक हजार से अधिक की आबादी प्रभावित
नदी की तरफ मछिया गांव का पूरबडीह और सोनखर को नदी की ओर रखकर कराए जा रहे बांध के निर्माण से करीब एक हजार से अधिक प्रभावित होंगे। इन दोनों गांव में करीब 70 घर हैं। इसको लेकर अब लोगों को चिंता सताने लगी है, लोगों का कहना है कि नदी में बाढ़ आने से गांव का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।
बड़हरा गांव में हुई कटान नहीं की गई दुरुस्त
बीते वर्ष 2025 में आए राप्ती नदी में बाढ़ के कारण भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के रमपुवार उर्फ नेबुआ के राजस्व गांव बड़हरा का मुख्य मार्ग कटान में बह गया था। मगर अभी तक कटान को ठीक नहीं करवाया गया है।
दो साल पहले इसी तरह एक मामला बीरपुर कोहलवा गांव में भी हुआ था, जहां रिंग बांध बनवाया गया था। यहां भी रिंग बांध बनवाने की बात की गई है। ग्रामीणों से बातचीत चल रहा है। जल्द ही जमीन मिलने के बाद रिंग बांध निर्माण करवाया जाएगा।
- राजेश कुमार, एसडीएम, डुमरियागंज
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क्षेत्र से निकली राप्ती नदी पर बने शाहपुर-भोजपुर बांध के करीब बसे सैकड़ों गांव हर साल बाढ़ से तबाही झेलते हैं। हर वर्ष हजारों बीघा कृषि योग्य भूमि, लोगों के आशियाने विलीन हो जाते हैं और सैकड़ों लोगों बेघर हो जाते हैं। कटान और बाढ़ रोकने के तमाम दावों के बावजूद हर साल कई गांवों के जमीन कटान के कारण नदी की गोद में समा जाते हैं। शाहपुर भोजपुर बांध का निर्माण कार्य पिछले कई वर्षों से कराया जा रहा है, लेकिन अब भी कई जगह बांध पर गैप बरकरार है। ऐसे में भनवापुर ब्लॉक छेत्र के सैकड़ों ग्राम पंचायतों के हजारों किसान आगामी खरीफ के फसल की खेती को लेकर डरे हुए हैं।
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इसके बावजूद बाढ़ खंड इकाई ने अभी तक इन गांव के लोगों को नदी की कटान और बाढ़ से बचाने के लिए बांध की गैपिंग भरने का कोई कार्य शुरू नहीं किया है। इतना ही नहीं भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के सोनखर और मछिया गांव के पास बांध का निर्माण नहीं करवाया है। मछिया गांव के फिरोज ने बताया कि उसके गांव के पश्चिम डीह और राप्ती नदी के बीच बांध का निर्माण हो रहा है जबकि गांव के ही पूरब डीह को नदी की तरफ करके बांध बनाए जाने का प्रस्ताव जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से बताया जा रहा है, जिसको लेकर ग्रामीणों में आक्रोश भी है। लोग विभाग को अपना जमीन बैनामा नहीं कर रहे हैं।
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गांव के शाहिद, हारून मलिक, अब्दुल रहीम आदि ने बताया कि अगर गांव के पूरब डीह को नदी के तरफ करके बांध निर्माण किया गया तो इस डीह पर बसे करीब चार दर्जन से अधिक घर नदी में विलीन हो सकते हैं। बांध का निर्माण गांव को सुरक्षित करने के लिए किया जाता है जबकि यहां ठीक इसके उल्टा किया जा रहा है। वहीं, सोनखर गांव के ग्राम प्रधान इजहारुल हसन बताया कि उनके गांव और नदी के बीच पहले बांध बनाया गया था, मगर नया बांध नदी और गांव को एक साथ एक तरफ करके बनाया जा रहा है। अगर बांध इस तरह बनाया गया तो राप्ती नदी में बाढ़ आने के साथ ही गांव के भी बह जाने का खतरा हमेशा बना रहेगा। ग्रामीणों ने बांध को नदी और गांव के बीच बनाने या पुराने बांध को ही मरम्मत कर उसे थोड़ा ऊंचा करवाए जाने की मांग की है।
एक हजार से अधिक की आबादी प्रभावित
नदी की तरफ मछिया गांव का पूरबडीह और सोनखर को नदी की ओर रखकर कराए जा रहे बांध के निर्माण से करीब एक हजार से अधिक प्रभावित होंगे। इन दोनों गांव में करीब 70 घर हैं। इसको लेकर अब लोगों को चिंता सताने लगी है, लोगों का कहना है कि नदी में बाढ़ आने से गांव का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।
बड़हरा गांव में हुई कटान नहीं की गई दुरुस्त
बीते वर्ष 2025 में आए राप्ती नदी में बाढ़ के कारण भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के रमपुवार उर्फ नेबुआ के राजस्व गांव बड़हरा का मुख्य मार्ग कटान में बह गया था। मगर अभी तक कटान को ठीक नहीं करवाया गया है।
दो साल पहले इसी तरह एक मामला बीरपुर कोहलवा गांव में भी हुआ था, जहां रिंग बांध बनवाया गया था। यहां भी रिंग बांध बनवाने की बात की गई है। ग्रामीणों से बातचीत चल रहा है। जल्द ही जमीन मिलने के बाद रिंग बांध निर्माण करवाया जाएगा।
- राजेश कुमार, एसडीएम, डुमरियागंज