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Siddharthnagar News: बेहतर उत्पादन के लिए जिंक का करें प्रयोग

Fri, 02 Jun 2023 11:05 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 02 Jun 2023 11:05 PM IST
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Use zinc for better production
सिद्धार्थनगर। जनपद की 96 प्रतिशत मिट्टी में जिंक सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी है। जिसके कारण उत्पादन पर असर पड़ता है साथ ही तमाम प्रकार की बीमारियां फसल में लगने लगती हैं। बेहतर उत्पादन के लिए जिंक का प्रयोग जरूर करें।
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यह जानकारी, कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के मृदा वैज्ञानिक डॉ. प्रवेश कुमार देहाती ने दी। बताया कि भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान भोपाल के अध्ययन के अनुसार सिद्धार्थनगर की मृदा में सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक की कमी है। जिंक की कमी की पूर्ति के लिए किसान हर फसल चक्र में इसका प्रयोग जरूर करें। इसके प्रयोग से उत्पादन बढ़ाने के साथ ही खैरा जैसी बीमारियों से फसलों को बचाया जा सकता है। डाॅ. प्रवेश कुमार ने बताया कि जिंक की कमी से फसल का लगभग 10 से 20 प्रतिशत उत्पादन कम हो जाता है। जिंक की कमी होने पर शिराओ के बीच में पत्तियां पीली होने लगती हैं। भनवापुर ब्लाक के उत्तरी क्षेत्र, डुमरियागंज ब्लॉक, बढ़नी बाजार, खुनियांव ब्लॉक के पूर्वी भाग, मिठवल ब्लॉक के दक्षिणी क्षेत्र, बांसी ब्लॉक के उत्तर एवं पूर्वी क्षेत्र, बर्डपुर एवं नौगढ़ के उत्तरी क्षेत्र की मृदा में सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक की कमी है। जो जनपद के क्षेत्रफल का लगभग 31 प्रतिशत है। इसके अलावा जनपद के शेष क्षेत्र में सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक की कमी है, लेकिन कम कमी है जो जिले के क्षेत्रफल का करीब 65 प्रतिशत है।
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इस तरह जनपद के लगभग 96 प्रतिशत क्षेत्रफल की मृदा में सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक की कमी है। मृदा में सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक की कमी को दूर करने के लिए किसान पांच किलो ग्रामजिंक प्रति हेक्टेयर प्रत्येक फसल चक्र में एक वर्ष के अंतराल पर प्रयोग करें। खड़ी फसल में जिंक के कमी के लक्षण दिखाई दें तो 0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट का छिड़काव करें। धान की नर्सरी में खैरा रोग के लक्षण दिखाई दें तो जिंक की कमी से होता है। इसकी रोकथाम के लिए पांच किलोग्राम जिंक सल्फेट को 20 किलो ग्राम यूरिया के साथ 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से पहला छिड़काव बुवाई के 10 दिन के बाद एवं दूसरा 20 दिन बाद करें।
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फसल में सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक की पूर्ति जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट 33 प्रतिशत जिंक, जिंक सल्फेट हेप्टएहाइड्रेट 20.5 प्रतिशत जिंक, चिलेटेड जिंक 12 प्रतिशत जिंक, जिंक ऑक्साइड 67 से 80 प्रतिशत जिंक, जिंक कार्बोनेट 65 प्रतिशत जिंक एवं जिंक क्लोराइड 45 प्रतिशत जिंक उर्वरकों से करें।
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