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पर्यटन द्वार से बनेगा तरक्की का आधार
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 25 Dec 2016 10:17 PM IST
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भारत-नेपाल सीमा पर स्थित ककरहवा बाॅर्डर।
- फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। तथागत की भूमि को वर्ष 2016 ने कई तोहफे दिए। विकास की नई इबारत लिखने के लिए जमीन तैयार की है। तीन दशक से बंद ककरहवा बॉर्डर से लुंबिनी का सफर शुरू हुआ तो कपिलवस्तु में बहुप्रतीक्षित बौद्ध संग्रहालय के उद्घाटन ने पर्यटन के नक्शे पर जिले को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई है। अब कपिलवस्तु आने वाले पर्यटक लुंबिनी जाने के लिए महराजगंज का रुख नहीं करेंगे।
शहर के दोनों तरफ नेशनल हाईवे का निर्माण जोर पकड़ चुका है। नए साल में इन सड़कों के मूर्त रूप लेने से विकास के पहिए को रफ्तार मिलेगी। सीमा विस्तार की पहल से जल्द ही आसपास के कई गांव नगर पालिका का हिस्सा हो जाएंगे, इससे इन गांवों की भी तरक्की का द्वार खुलेगा। शहर को बिजली देने वाले बर्डपुर के उपकेंद्र में ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि और उसका में नए 33 केवी के उपकेंद्र निर्माण ने बिजली के क्षेत्र की दुश्वारियों को दूर किया है।
शहर में जाम के समाधान के लिए रेलवे क्रॉसिंग के तरफ डिवाइडर निर्माण, सेमरा घाट पुल, पिठनी पुल ने गांवों की दूरी आधी कर दी है। शोहरतगढ़ का शिवबाबा घाट हो या फिर बांसी के नरकटहा में सोलर आधारित स्ट्रीट लाइट की सौगात। छोटी-बड़ी इन परियोजनाओं ने विकास की उम्मीदों को पंख दिए हैं, जिनके जरिए जिला भविष्य में ऊंची उड़ान भरेगा।
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शहर के दोनों तरफ नेशनल हाईवे का निर्माण जोर पकड़ चुका है। नए साल में इन सड़कों के मूर्त रूप लेने से विकास के पहिए को रफ्तार मिलेगी। सीमा विस्तार की पहल से जल्द ही आसपास के कई गांव नगर पालिका का हिस्सा हो जाएंगे, इससे इन गांवों की भी तरक्की का द्वार खुलेगा। शहर को बिजली देने वाले बर्डपुर के उपकेंद्र में ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि और उसका में नए 33 केवी के उपकेंद्र निर्माण ने बिजली के क्षेत्र की दुश्वारियों को दूर किया है।
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शहर में जाम के समाधान के लिए रेलवे क्रॉसिंग के तरफ डिवाइडर निर्माण, सेमरा घाट पुल, पिठनी पुल ने गांवों की दूरी आधी कर दी है। शोहरतगढ़ का शिवबाबा घाट हो या फिर बांसी के नरकटहा में सोलर आधारित स्ट्रीट लाइट की सौगात। छोटी-बड़ी इन परियोजनाओं ने विकास की उम्मीदों को पंख दिए हैं, जिनके जरिए जिला भविष्य में ऊंची उड़ान भरेगा।
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