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बाढ़ से जान बचाने गए थे विवाह घर, मौत ने नहीं छोड़ा पीछा
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डुमरियागंज क्षेत्र के भरवठिया मुस्तहकम गांव में मृतकों के परिजनों को सांत्वना देते डीएम संजीव र
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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बाढ़ से जान बचाने गए थे विवाह घर, मौत ने नहीं छोड़ा पीछा
एक साथ तीन लोगों की मौत से क्षेत्र में गम का माहौल
सिद्धार्थनगर। बाढ़ से जान बचाने के लिए घर छोड़कर विवाह घर में शरण ली। भूखे-प्यासे अंधेरे में रात गुजारी, लेकिन मौत ने पीछा नहीं छोड़ा। पिलर गिरने के बाद रात 12 बजे चीख-पुकार की आवाज से हर किसी के होश उड़ गए। हर तरफ ढाई फीट पानी और अंधेरे में किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था। हर तरफ अफरातफरी और कराहने की आवाज आ रही थी।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के 50 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। पिछले कई दिनों से लोग बाढ़ की त्रासदी झेल रहे हैं। कोई बांध पर तो कई गांव के विद्यालय और अन्य स्थानों पर शरण ले रखे है। भरवठिया मुस्तहकम गांव भी बाढ़ की तबाही झेल रहा है। गांव में बने विवाह घर में बुधिराम व राजकुमार के परिवार के साथ गांव के करीब 45 से अधिक लोग शरण लिए थे।
अंधेरे के बीच लोग समय काट रहे थे कि बाढ़ का पानी घटेगा तो घर चलेंगे। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। रविवार रात लगभग 12 बजे खाना खाने के बाद सब सो गए थे। इसी बीच एक पिलर गिरा। उससे दबकर राजसिंह चौहान (13), पूनम (18) व रिंका (24) की मौत हो गई।
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आधी राती में हुई इस मौत लीला ने सबको हिला दिया। स्थिति यह थी कि पिलर टूटने के बाद दोबारा कोई हिस्सा न गिर जाए। इसके भय से रात में ही लोग भागने लगे। कई लोग तो पूरी रात पानी में ही खड़े रहे। उनका कहना था कि पानी से जान न जाए, इससे बचने के लिए विवाह घर को ठिकाना बनाया। हमें पता ही नहीं था कि यह मौत का ठिकाना बनेगा। नहीं तो, कोई आता ही नहीं।
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एक साथ तीन लोगों की मौत से क्षेत्र में गम का माहौल
सिद्धार्थनगर। बाढ़ से जान बचाने के लिए घर छोड़कर विवाह घर में शरण ली। भूखे-प्यासे अंधेरे में रात गुजारी, लेकिन मौत ने पीछा नहीं छोड़ा। पिलर गिरने के बाद रात 12 बजे चीख-पुकार की आवाज से हर किसी के होश उड़ गए। हर तरफ ढाई फीट पानी और अंधेरे में किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था। हर तरफ अफरातफरी और कराहने की आवाज आ रही थी।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के 50 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। पिछले कई दिनों से लोग बाढ़ की त्रासदी झेल रहे हैं। कोई बांध पर तो कई गांव के विद्यालय और अन्य स्थानों पर शरण ले रखे है। भरवठिया मुस्तहकम गांव भी बाढ़ की तबाही झेल रहा है। गांव में बने विवाह घर में बुधिराम व राजकुमार के परिवार के साथ गांव के करीब 45 से अधिक लोग शरण लिए थे।
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अंधेरे के बीच लोग समय काट रहे थे कि बाढ़ का पानी घटेगा तो घर चलेंगे। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। रविवार रात लगभग 12 बजे खाना खाने के बाद सब सो गए थे। इसी बीच एक पिलर गिरा। उससे दबकर राजसिंह चौहान (13), पूनम (18) व रिंका (24) की मौत हो गई।
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आधी राती में हुई इस मौत लीला ने सबको हिला दिया। स्थिति यह थी कि पिलर टूटने के बाद दोबारा कोई हिस्सा न गिर जाए। इसके भय से रात में ही लोग भागने लगे। कई लोग तो पूरी रात पानी में ही खड़े रहे। उनका कहना था कि पानी से जान न जाए, इससे बचने के लिए विवाह घर को ठिकाना बनाया। हमें पता ही नहीं था कि यह मौत का ठिकाना बनेगा। नहीं तो, कोई आता ही नहीं।