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भविष्य संवारने ठंड में ठिठुरते स्कूल जा रहे बच्चे
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 08 Dec 2016 10:30 PM IST
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प्राथमिक विद्यालय दतरंगवा में फर्श पर बैठकर पढ़ते बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। कड़ाके की ठंड का कहर जारी है। गलन और सर्द हवाओं से हर कोई बेहाल है। मासूम बच्चों पर भी किसी को तरस नहीं आ रहा। सर्द सुबह में उन्हें ठिठुरते-कांपते हुए स्कूल जाना पड़ रहा है। नंगे पांव स्कूल की डगर नाप रहे बच्चों को गीले फर्श पर बैठना पड़ रहा है। दरी के नाम पर अधिकांश स्कूलों में पतली चटाई है। शिक्षक कुर्सियों पर बैठ कर भी कांप रहे हैं, मगर बच्चों को गीली फर्श पर बैठाने के बाद भी कोई पूछने वाला नहीं है। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों के पास न तो ढंग के ऊनी कपड़े हैं और न ही जूता, चप्पल और टोपी।
बावजूद अच्छी तालिम लेकर भविष्य संवारने की आस में उन्हें अलसुबह स्कूल आना पड़ रहा है। लाड़लों की इस पीड़ा को महसूस करने के बाद भी मां-बाप बेबस बने हुए हैं। गुरुवार को शहर व आस-पास के स्कूलों का हाल देखा गया तो कमोवेश एक जैसी हालत हर जगह थी। बीएसए अरविंद कुमार पाठक ने बताया कि ठंड को देखते विद्यालयों का समय बढ़ाने पर विचार चल रहा है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों से चर्चा किया जाएगा। आस-पास के किसी जिले में छुट्टी नहीं हुई है। ठंड बढ़ी तो इस पर भी विचार होगा।
दोपहर करीब 12 बजे। स्थान-पूर्व माध्यमिक विद्यालय दतरंगवा। विद्यालय में कुल 108 बच्चे पंजीकृत थे, जबकि उपस्थिति सिर्फ 55 की थी। कुछ बच्चे फर्श पर बिछी चटाई पर बैठकर पढ़ रहे थे। ठंड की वजह से वह कांप भी रहे थे। वहीं कुछ बच्चे परिसर में आग जलाकर तापते हुए नजर आए। प्रधानाचार्य मीरा देवी का कहना था कि ठंड के कारण उपस्थिति कम है।अपने प्रयास से आग जलवाई गई है। यही व्यवस्था है, क्या कर सकते हैं।
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पास स्थित प्राथमिक विद्यालय दतरंगवा पर कुछ बच्चे खेलते हुए नजर आए तो कुछ पढ़ते दिखे। बच्चों के पैरों में चप्पल नहीं थे तो कुछ के शरीर पर ऊनी वस्त्र भी न थे। फर्श पर बैठकर पढ़ रहे बच्चे ठंड से कांप रहे थे। प्रधानाचार्य शशि सिंह ने बताया कि स्कूल में 150 बच्चों की संख्या है, लेकिन ठंड के कारण 60 बच्चे ही पहुंच रहे हैं।
अधिकांश परिवार के लोग ठंड के कारण बच्चों विद्यालय नहीं भेज रहे हैं। ठंड को देखते हुए विद्यालय को बंद कर देना चाहिए।
प्राथमिक विद्यालय थरौली में पहुंचे तो यहां अधिकांश बच्चे परिसर में खेलते नजर आए। इन्हें कोई भी देखने वाला नहीं था। विद्यालय सड़क से तीन फीट नीचे होने की वजह से पूरा परिसर सीलन से भरा हुआ है। इतनी ठंड के बाद भी बच्चे बिना चप्पल के परिसर में घूम रहे थे। कई बच्चे केवल वही डे्रस पहने हुए थे, जो उन्हें कुछ दिनों पूर्व विद्यालय से मिला था। प्रधानाचार्य कंचन मिश्र ने बताया कि ठंड के कारण बच्चे कम आ रहे हैं। 114 बच्चों की संख्या विद्यालय में हैं, लेकिन 45 बच्चे ही आए हुए हैं।
प्राथमिक विद्यालय तेतरी बाजार में दोपहर की छुट्टी हो चुकी थी। बच्चे कक्षाओं के बाहर खेलते मिले। दोपहर वहीं कुछ बच्चे आग से हाथ सेंक रहे थे। एक सहायक शिक्षिका ने बताया कि प्रधानाचार्य कुसुमलता बैंक पर गई हैं। बच्चों की सही संख्या वही बता सकती हैं। सहायक शिक्षिका ने बताया कि ठंड के कारण बच्चे कम आ रहे हैं, परिवार वालों से बात की गई तो वह बच्चों को ठंड के कारण नहीं भेजने की बात कर रहे हैं। ठंड को देखते हुए अलाव की व्यवस्था की गई है। जिससे बच्चों को ठंड न लगने पाए।
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बावजूद अच्छी तालिम लेकर भविष्य संवारने की आस में उन्हें अलसुबह स्कूल आना पड़ रहा है। लाड़लों की इस पीड़ा को महसूस करने के बाद भी मां-बाप बेबस बने हुए हैं। गुरुवार को शहर व आस-पास के स्कूलों का हाल देखा गया तो कमोवेश एक जैसी हालत हर जगह थी। बीएसए अरविंद कुमार पाठक ने बताया कि ठंड को देखते विद्यालयों का समय बढ़ाने पर विचार चल रहा है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों से चर्चा किया जाएगा। आस-पास के किसी जिले में छुट्टी नहीं हुई है। ठंड बढ़ी तो इस पर भी विचार होगा।
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दोपहर करीब 12 बजे। स्थान-पूर्व माध्यमिक विद्यालय दतरंगवा। विद्यालय में कुल 108 बच्चे पंजीकृत थे, जबकि उपस्थिति सिर्फ 55 की थी। कुछ बच्चे फर्श पर बिछी चटाई पर बैठकर पढ़ रहे थे। ठंड की वजह से वह कांप भी रहे थे। वहीं कुछ बच्चे परिसर में आग जलाकर तापते हुए नजर आए। प्रधानाचार्य मीरा देवी का कहना था कि ठंड के कारण उपस्थिति कम है।अपने प्रयास से आग जलवाई गई है। यही व्यवस्था है, क्या कर सकते हैं।
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पास स्थित प्राथमिक विद्यालय दतरंगवा पर कुछ बच्चे खेलते हुए नजर आए तो कुछ पढ़ते दिखे। बच्चों के पैरों में चप्पल नहीं थे तो कुछ के शरीर पर ऊनी वस्त्र भी न थे। फर्श पर बैठकर पढ़ रहे बच्चे ठंड से कांप रहे थे। प्रधानाचार्य शशि सिंह ने बताया कि स्कूल में 150 बच्चों की संख्या है, लेकिन ठंड के कारण 60 बच्चे ही पहुंच रहे हैं।
अधिकांश परिवार के लोग ठंड के कारण बच्चों विद्यालय नहीं भेज रहे हैं। ठंड को देखते हुए विद्यालय को बंद कर देना चाहिए।
प्राथमिक विद्यालय थरौली में पहुंचे तो यहां अधिकांश बच्चे परिसर में खेलते नजर आए। इन्हें कोई भी देखने वाला नहीं था। विद्यालय सड़क से तीन फीट नीचे होने की वजह से पूरा परिसर सीलन से भरा हुआ है। इतनी ठंड के बाद भी बच्चे बिना चप्पल के परिसर में घूम रहे थे। कई बच्चे केवल वही डे्रस पहने हुए थे, जो उन्हें कुछ दिनों पूर्व विद्यालय से मिला था। प्रधानाचार्य कंचन मिश्र ने बताया कि ठंड के कारण बच्चे कम आ रहे हैं। 114 बच्चों की संख्या विद्यालय में हैं, लेकिन 45 बच्चे ही आए हुए हैं।
प्राथमिक विद्यालय तेतरी बाजार में दोपहर की छुट्टी हो चुकी थी। बच्चे कक्षाओं के बाहर खेलते मिले। दोपहर वहीं कुछ बच्चे आग से हाथ सेंक रहे थे। एक सहायक शिक्षिका ने बताया कि प्रधानाचार्य कुसुमलता बैंक पर गई हैं। बच्चों की सही संख्या वही बता सकती हैं। सहायक शिक्षिका ने बताया कि ठंड के कारण बच्चे कम आ रहे हैं, परिवार वालों से बात की गई तो वह बच्चों को ठंड के कारण नहीं भेजने की बात कर रहे हैं। ठंड को देखते हुए अलाव की व्यवस्था की गई है। जिससे बच्चों को ठंड न लगने पाए।