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Siddharthnagar News: सिर्फ एक कोच पर हर खेल में सोने का सोच
Wed, 24 May 2023 11:13 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 24 May 2023 11:13 PM IST
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सिद्धार्थनगर। नीति आयोग के अंतर्गत सिद्धार्थनगर आकांक्षी जिला है। ऐसे में सभी की अकांक्षा भी है कि यहां के खिलाड़ी विभिन्न खेलों में सोने का तमगा जीतकर ले आएं। लेकिन, सिर्फ एक कोच की तैनाती होने से जहां इस सोच को झटका लग रहा है। वहीं खिलाड़ी भी हताश हो रहे हैं। हालत यह है कि बस्ती मंडल के सभी जिलों में सबसे कम कोच की तैनाती सिद्धार्थनगर में ही हैं।
जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेल विभाग की ओर से फुटबॉल कोच राजलक्ष्मी चौधरी का चयन हुआ है जबकि हैंडबॉल कोच अंकिता रत्न ने एक सप्ताह के अंतर्गत अपना स्थानांतरण करा लिया। इस कोच को जाने के बाद खेल विभाग ने खेल निदेशालय को पत्र लिखा लेकिन उसके बाद किसी कोच की नियुक्ति नहीं हुई। उत्तर प्रदेश में खेल निदेशालय ने संविदा शिक्षकों की तीसरी सूची जारी की है लेकिन उसमें सिद्धार्थनगर को एक भी कोच नहीं मिला। इस कारण उभरते खिलाड़ियों में मायूसी है। बस्ती मंडल के अंतर्गत बस्ती में पांच और संतकबीरनगर में चार खेलों के कोच हैं। सिद्धार्थनगर में खेलो इंडिया के अंतर्गत 40 खिलाड़ियों का प्रशिक्षण शिविर संचालित किया जा रहा है।
सांसद खेल महाकुंभ में शामिल हुए थे चार हजार खिलाड़ी
सांसद खेल महाकुंभ के अंतर्गत विभिन्न खेलों की प्रतियोगिताएं हुईं तो 4000 से अधिक खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया था। इससे साबित होता है कि जिले में खिलाड़ियों की कमी नहीं है। वॉलीबॉल में जिले की बालिका टीम स्थानीय प्रदर्शन कर रही है, बैडमिंटन, कबड्डी, खो-खो, ताइक्वांडो, क्रिकेट एवं हैंडबॉल में उभरते हुए खिलाड़ी हैं। इन खेलों में कोच की नियुक्ति हो तो खिलाड़ियों की राह आसान हो जाएगी।
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इस कारण कम हुए कोच
खेल विभाग ने संविदा पर नियुक्त किए गए अधिकतर कोच का अनुबंध नवीनीकरण होने के बाद उनके गृह जनपद में तैनाती कर दी गई है। खेल के लिए यह निर्णय अच्छा है लेकिन पिछले वर्ष जिले में एक भी कोच की नियुक्ति नहीं होने के कारण यहां के खिलाड़ियों का नुकसान हो रहा है।
जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम के लिए पांच खेलों के कोच मांगे गए थे, लेकिन पहले से खेलों के प्रशिक्षण शिविर नहीं संचालित होने के कारण कोच कम मिले हैं। कोच की नियुक्ति के लिए खेल निदेशालय को फिर पत्र भेजा गया है।
- आशुतोष अग्निहोत्री, जिला क्रीड़ा अधिकारी
जिले में 10 करोड़ रुपये से स्टेडियम बना है, लेकिन कोच के बिना ये संसाधन बेकार साबित हो रहे हैं। कोच की नियुक्ति नहीं होने से ज्यादातर खिलाड़ी मायूस हैं। - शैलेंद्र गौतम, क्रिकेट खिलाड़ी
आकांक्षी जिले सिद्धार्थनगर में कोच की संख्या कम है, जबकि यहां कोच अधिक होने चाहिए। जो खिलाड़ी दो-तीन साल से प्रैक्टिस कर रहे हैं, उन्हें अच्छा प्लेटफार्म नहीं मिल रहा है। - संजना साहनी, वालीबॉल खिलाड़ी
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जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेल विभाग की ओर से फुटबॉल कोच राजलक्ष्मी चौधरी का चयन हुआ है जबकि हैंडबॉल कोच अंकिता रत्न ने एक सप्ताह के अंतर्गत अपना स्थानांतरण करा लिया। इस कोच को जाने के बाद खेल विभाग ने खेल निदेशालय को पत्र लिखा लेकिन उसके बाद किसी कोच की नियुक्ति नहीं हुई। उत्तर प्रदेश में खेल निदेशालय ने संविदा शिक्षकों की तीसरी सूची जारी की है लेकिन उसमें सिद्धार्थनगर को एक भी कोच नहीं मिला। इस कारण उभरते खिलाड़ियों में मायूसी है। बस्ती मंडल के अंतर्गत बस्ती में पांच और संतकबीरनगर में चार खेलों के कोच हैं। सिद्धार्थनगर में खेलो इंडिया के अंतर्गत 40 खिलाड़ियों का प्रशिक्षण शिविर संचालित किया जा रहा है।
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सांसद खेल महाकुंभ में शामिल हुए थे चार हजार खिलाड़ी
सांसद खेल महाकुंभ के अंतर्गत विभिन्न खेलों की प्रतियोगिताएं हुईं तो 4000 से अधिक खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया था। इससे साबित होता है कि जिले में खिलाड़ियों की कमी नहीं है। वॉलीबॉल में जिले की बालिका टीम स्थानीय प्रदर्शन कर रही है, बैडमिंटन, कबड्डी, खो-खो, ताइक्वांडो, क्रिकेट एवं हैंडबॉल में उभरते हुए खिलाड़ी हैं। इन खेलों में कोच की नियुक्ति हो तो खिलाड़ियों की राह आसान हो जाएगी।
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इस कारण कम हुए कोच
खेल विभाग ने संविदा पर नियुक्त किए गए अधिकतर कोच का अनुबंध नवीनीकरण होने के बाद उनके गृह जनपद में तैनाती कर दी गई है। खेल के लिए यह निर्णय अच्छा है लेकिन पिछले वर्ष जिले में एक भी कोच की नियुक्ति नहीं होने के कारण यहां के खिलाड़ियों का नुकसान हो रहा है।
जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम के लिए पांच खेलों के कोच मांगे गए थे, लेकिन पहले से खेलों के प्रशिक्षण शिविर नहीं संचालित होने के कारण कोच कम मिले हैं। कोच की नियुक्ति के लिए खेल निदेशालय को फिर पत्र भेजा गया है।
- आशुतोष अग्निहोत्री, जिला क्रीड़ा अधिकारी
जिले में 10 करोड़ रुपये से स्टेडियम बना है, लेकिन कोच के बिना ये संसाधन बेकार साबित हो रहे हैं। कोच की नियुक्ति नहीं होने से ज्यादातर खिलाड़ी मायूस हैं। - शैलेंद्र गौतम, क्रिकेट खिलाड़ी
आकांक्षी जिले सिद्धार्थनगर में कोच की संख्या कम है, जबकि यहां कोच अधिक होने चाहिए। जो खिलाड़ी दो-तीन साल से प्रैक्टिस कर रहे हैं, उन्हें अच्छा प्लेटफार्म नहीं मिल रहा है। - संजना साहनी, वालीबॉल खिलाड़ी