{"_id":"65e4b0d100f120933c0993df","slug":"there-is-no-roadways-station-they-stand-on-the-road-and-wait-for-vehicles-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1033-113758-2024-03-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: रोडवेज स्टेशन नहीं, सड़क पर खड़े होकर करते हैं वाहनों का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: रोडवेज स्टेशन नहीं, सड़क पर खड़े होकर करते हैं वाहनों का इंतजार
Sun, 03 Mar 2024 10:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 03 Mar 2024 10:48 PM IST
विज्ञापन
इटवा। इटवा तहसील ऐसा है कि आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी रोडवेज बस अड्डा नहीं है। इससे क्षेत्र की बड़ी आबादी को यात्रा करने में बहुत परेशानी होती है। सूबे में सरकार बनने के बाद ही रोडवेज बनाए जाने की घोषणा भी हुई थी, लेकिन आजतक पूरा नहीं हुआ है।
इटवा कस्बा 1980 के बाद का रूप लेने लगा था। इसमें तेजी से बढ़ोतरी 1989 में तहसील मुख्यालय घोषित होने पर शुरू हुई। उसके बाद इटवा कस्बे में तहसील भवन, थाना भवन, डाक बंगले आदि का निर्माण हुआ। आवागमन में बढ़ोतरी हुई। एक दर्जन प्राइवेट बस रोजाना इटवा व आसपास के क्षेत्रों से होकर लखनऊ जाती है। तो सप्ताह में एक दर्जन से ऊपर प्राइवेट बसें मुंबई आती जाती रही हैं। लेकिन रोडवेज बस अड्डा आज तक नहीं बन पाया है।
2017 के बाद आई भाजपा सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री बने डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने इसके निर्माण में काफी तेजी से प्रयास करना शुरू किया था। लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। इटवा कस्बे के बढ़नी मार्ग पर कुष्ठ आश्रम के नाम छूटी जमींन पर रोडवेज बस अड्डा बनाने की बात शुरू हुई थी। लेकिन वह भी परवान नहीं चढ़ सका।
विज्ञापन
रोडवेज बस स्टैंड के न होने से आने जाने में भारी परेशानी होती है। भीड़भाड़ के बावजूद चौराहे पर खड़े होकर वाहनों की प्रतीक्षा काफी कष्टकारी होता है।
-विनोद जायसवाल, निवासी इटवा
-- -
गांव से आकर बसों की प्रतीक्षा करना और बस के न आने पर चौराहे से वापसी काफी दुखदायी होता है। इनका कहना है कि यह कस्बा एक तरफ बस्ती व गोंडा जिले को व दूसरी तरफ नेपाल को जोड़ने वाली सड़क पर बसे होने से यहां बस स्टैंड का होना बहुत ही आवश्यक है।
-चिनकाऊ दुबे, निवासी विशुनपुर सैनी
रोडवेज बस स्टैंड के न होने से इटवा का विकास बहुत ही धीमी गति से हो रहा है। यदि रोडवेज बस स्टैंड बन जाए।तो कस्बे में बाहरी व्यापारियों का आवागमन बढ़ जाए।
-रबि अग्रहरि, कारोबारी
विज्ञापन
इटवा कस्बा 1980 के बाद का रूप लेने लगा था। इसमें तेजी से बढ़ोतरी 1989 में तहसील मुख्यालय घोषित होने पर शुरू हुई। उसके बाद इटवा कस्बे में तहसील भवन, थाना भवन, डाक बंगले आदि का निर्माण हुआ। आवागमन में बढ़ोतरी हुई। एक दर्जन प्राइवेट बस रोजाना इटवा व आसपास के क्षेत्रों से होकर लखनऊ जाती है। तो सप्ताह में एक दर्जन से ऊपर प्राइवेट बसें मुंबई आती जाती रही हैं। लेकिन रोडवेज बस अड्डा आज तक नहीं बन पाया है।
विज्ञापन
2017 के बाद आई भाजपा सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री बने डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने इसके निर्माण में काफी तेजी से प्रयास करना शुरू किया था। लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। इटवा कस्बे के बढ़नी मार्ग पर कुष्ठ आश्रम के नाम छूटी जमींन पर रोडवेज बस अड्डा बनाने की बात शुरू हुई थी। लेकिन वह भी परवान नहीं चढ़ सका।
विज्ञापन
रोडवेज बस स्टैंड के न होने से आने जाने में भारी परेशानी होती है। भीड़भाड़ के बावजूद चौराहे पर खड़े होकर वाहनों की प्रतीक्षा काफी कष्टकारी होता है।
-विनोद जायसवाल, निवासी इटवा
गांव से आकर बसों की प्रतीक्षा करना और बस के न आने पर चौराहे से वापसी काफी दुखदायी होता है। इनका कहना है कि यह कस्बा एक तरफ बस्ती व गोंडा जिले को व दूसरी तरफ नेपाल को जोड़ने वाली सड़क पर बसे होने से यहां बस स्टैंड का होना बहुत ही आवश्यक है।
-चिनकाऊ दुबे, निवासी विशुनपुर सैनी
रोडवेज बस स्टैंड के न होने से इटवा का विकास बहुत ही धीमी गति से हो रहा है। यदि रोडवेज बस स्टैंड बन जाए।तो कस्बे में बाहरी व्यापारियों का आवागमन बढ़ जाए।
-रबि अग्रहरि, कारोबारी