फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Then coarse grains will improve health

सिद्धार्थनगर: फिर मोटे अनाज से सुधरेगी सेहत

Thu, 16 Feb 2023 11:27 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 16 Feb 2023 11:27 PM IST
विज्ञापन
Then coarse grains will improve health
जिले में रकबा बढ़ाने के लिए कृषि विभाग करा रहा सर्वे
विज्ञापन

-किसानों की आय में मददगार बनेगी मोटे अनाज की खेती
सवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पूर्वजों के दौर में जिस मोटे अनाज की खेती कम हो गई थी, उसी की बदौलत आय बढ़ने की उम्मीद जगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोटे अनाज को बढ़ावा देने की बात की है तो इससे जिले के कछार क्षेत्र में किसानों की आय बेहतर होने की उम्मीद बढ़ गई है। सही तरीके से कार्य हुआ तो कालानमक की तर्ज पर मोटे अनाज से किसानों की सेहत अच्छी हो सकती है।
किसानों की आय में मंडुआ (रागी), सांवा, कोदो, टागुन और बाजरा की खेती हो रही है। जिले में मोटे की अनाज की खेती करीब 65 रकबा में हो रही है। अगले साल रकबा 100 एकड़ से अधिक हो सके, इसके लिए कृषि विभाग पूरे जिले में सर्वे करा रहा है।
विज्ञापन

जिले में चार वर्ष पहले सदर तहसील के उसका और जोगिया ब्लॉक के किसानों को मोटे अनाज का बीज उपलब्ध कराया गया था, उन्हें प्रेरित करते हुए पहले साल तीस किसानों ने करीब 25 एकड़ में एक साथ इसकी खेती शुरू की। बीच में कोविड आने से दो साल खेती प्रभावित हो गई थी, लेकिन फिर मोटे अनाज की खेती की ओर रूझान बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उसका और जोगिया ब्लाॅक के करीब 50 किसान मोटे अनाज की खेती कर रहे हैं। किसान रामलाल, राजेंद्र प्रसाद, मजीबुल्लाह, शत्रुहन तिवारी, कमरूनिशा, बाबूराम, हरिप्रसाद पाठक, आनंद पाठक, रामनवल, सुनील कुमार, गोरख,शिवपूजन ने बताया कि मडुआ, टागुन, सांवा जैसे अन्य मोटे अनाज की खेती में कम लागत में अधिक आय होती है।
----गौतम बुद्ध जागृति संस्था के श्रीधर पांडेय ने बताया कि चार वर्ष पहले उन्होंने किसानों को मोटे अनाजों का बीज उपलब्ध कराया था। हालांकि, अब ये बीज सरकारी स्तर पर उपलब्ध कराए जाएंगे। बीसांवा, मंडुआ, टागुन जैसे अन्य मोटे अनाज की खेती के लिए एक बारिश पर्याप्त है। कम लागत में प्रति एकड़ 4 से 5 क्विंटल तक इसकी उपज हो जाती है। यह सेहत के लिए फायदेमंद है, जलवायु परिवर्तन के दौर में इसकी पैदावार हो जाती है, इसमें रसायनिक उवर्रकों की आवश्यकता नहीं होती है, फसल में कीट पतंग भी कम लगते हैं।
-------
वर्तमान में करीब 65 एकड़ में मोटे अनाज की खेती हो रही है। इसमें सांवा, मंडुआ, ज्वार, बाजरा, टागुन आदि है। खेती का दायरा बढ़ाने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। इसके बाद किसानों को जागरूक किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान इसकी खेती कर अधिक लाभ ले सकें।

सीपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी
----
मोटे अनाज से दूर हो सकता है मोटापा
फोटो- डॉ. रक्षा
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के गृह विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. रक्षा ने बताया कि मोटे अनाजों में विटामिन, मिनरल्स, प्रोटीन, एंजाइम्स व फाइबर (घुलनशील रेसा) पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसमें बने आहार में लघु व दीर्घ पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। फाइबर से पाचन तंत्र अच्छा हो जाता है। शरीर का अतिरिक्त वसा बाहर निकल जाता है और मोटापा कम होता है। यह दिल के मरीजों के लिए अच्छा है। अधिक कैल्शियम वाला मड़ुआ खाने से हड्डी का रोग नहीं होता है। कोदो में ग्लाइसमिक इंडेक्स कम होता है, शुगर के मरीजों के लिए फायदा है। बाजारा कोलेस्ट्राल व ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए फायदा है। मोटे अनाज खाने से एनीमिया की समस्या दूर हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed