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Siddharthnagar News: एकल रहने की ललक से किशोरों तक में बढ़ रही आत्महत्या की प्रवृत्ति
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-मेडिकल कॉलेज के आंकड़े में हर दिन जहर खा रहे आठ से नौ किशोर व युवा
-बढ़ती आत्महत्या के प्रयास का प्रमुख कारण संयुक्त परिवार का न होना
- किशोरियों, 25 से 30 वर्ष की महिलाओं के साथ युवा भी उठा रहे प्राणघाती कदम
राहुल त्रिपाठी
सिद्धार्थनगर। सामूहिक परिवार से अलग रहने की ललक से एकल परिवारों के बच्चों में पनप रही निराशा व हताशा भारी पड़ रही है। इन परिवार के बच्चों में पढ़ाई के बोझ व मानसिक तनाव किशोरियां, महिलाएं व युवाओं को प्राणघाती कदम उठाने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। अस्पताल में पहुंच रहे मामलों में अधिकतर कम उम्र के बच्चों के जहर खाने के मामले देखकर डॉक्टर भी चिंतित हैं। मेडिकल कॉलेज के आंकड़े की बात करें तो हर दिन सात से आठ ऐसे मरीज आ रहे हैं जो जहरीला पदार्थ का सेवन किए हुए होते हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञ व अन्य डॉक्टरों के अनुसार एकल रहने की ललक किशोरों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ा रही है। इससे वह जहरीले पदार्थ का प्रयोग कर रहे हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में तीन महीने से जहर खाने के केस बढ़ गए हैं। इससे वर्तमान में इमरजेंसी वार्ड में आठ से नौ मरीज जहर खाकर पहुंच रहे हैं, जिसमें से सात से आठ प्रतिदिन मेडिसिन वार्ड में भर्ती भी हो रहे हैं। उन्हें खतरे से बाहर जाने के बाद डॉक्टर उन्हें वार्ड से डिस्चार्ज करने के साथ परिजन को मानसिक रोग विभाग में कांउसिलिंग करवाने की भी सलाह दे रहे हैं।
काउंसलिंग में किशोर, महिला व युवा की बातों को सुनकर हर कोई स्तब्ध हो जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार जहर खाने वाले मरीजों के काउंसिलिंग में उनकी अकेले रहने की इच्छा, किसी भी कार्य को लेकर माता-पिता का डांट, छोटी बातों को परिवार द्वारा न मानना, स्कूल की पढ़ाई में अधिक नंबर लाने की ललक, कम उम्र में हुए प्रेम प्रसंग प्रमुख कारण बन रहे हैं। इसमें यदि परिवार के लोग कुछ कह रहे है, तो किशोरी परिवार को डराने के लिए तत्काल जहरीले पदार्थ का सेवन कर ले रही हैं। इससे परिवार के लोग बात मानने के साथ ही उनके स्वास्थ्य को लेकर भी चिंतित हो रहे हैं। पांच दिनों के मेडिसिन वार्ड के आंकड़ों के अनुसार 40 लोगाें ने जहर खाया। इसमें सबसे अधिक संख्या किशोरियों की, उसके बाद 25 से 30 वर्ष की उम्र की महिला व सबसे कम संख्या में युवा वर्ग की रही है। जो अपनी इच्छा पूरा न होने पर प्राणघाती कदम उठा रहे हैं।
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किशोरियों की संख्या सबसे अधिक
मेडिकल कॉलेज के आंकड़े की बात करें तो जहर खाने वालों में सबसे अधिक 13 वर्ष से 20 वर्ष की किशोरियां व युवती हैं। इसमें भी किशोरियों की संख्या अधिक है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. संजय अग्रहरि ने बताया कि वर्तमान समय में मोबाइल के साथ अकेले रहने की प्रवृति बढ़ गई है, जिससे कई बच्चियां पढ़ाई में अधिक अंक, प्रेम प्रसंग, किसी भी वस्तु की प्राप्ति के लिए परिवार से जिद कर रही हैं। जब वह समय से पूरा नहीं हो रहा है तो परिवार को डराने के लिए वह प्राणघाती कदम उठा रही हैं, जिससे वह जहरीले पदार्थ का सेवन अधिक कर रही हैं।
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बोले डॉक्टर
दो से तीन महीने से यह आंकड़ा बढ़ा है। इसमें सबसे अधिक 13 से 20 वर्ष के बच्चे हैं। सबसे अधिक लोगों परिवार को डराने के लिए ऐसा कदम उठा रहे हैं। जबकि परिवार को ध्यान नहीं देना भी एक कारण बन रहा है, जिससे लोग अकेला महसूस करने के साथ अपने एकांत को पूरा करने के लिए नई वस्तुओं की मांग कर रही है। जो पूरा नहीं होने पर प्राणघाती कदम उठा रहे हैं।
-डॉ. गौरव दुबे, मेडिसिन विभाग
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वर्तमान में आत्महत्या करने के आंकड़े सबसे अधिक हैं। विश्व की बात करें तो प्रतिवर्ष आठ लाख लोग आत्महत्या कर रहे हैं। इसको सूक्ष्म तौर पर देखें तो हर 40 सेकेंड पर एक व्यक्ति की आत्महत्या से मौत हाे रही है, जबकि भारत में एक लाख 67 हजार व्यक्ति हर वर्ष मर रहे हैं। जहर खाने वाले मरीजों को काउंसिलिंग में बात करने पर छोटी-छोटी कारण निकल कर आ रही है। जिसे परिवार के लोग गंभीरता से नहीं ले रहे है। जो बाद में परिवार के साथ मरीज के लिए भी नुकसानदायक हो रहा है। डॉ. -मो. अफजल, मानसिक रोग विशेषज्ञ
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इस तरह करें बचाव
वर्तमान समय में जहर खाने के बढ़ रहे मामले को लेकर परिवार के लोगों को सतर्कता बरतनी पड़ेगी। इसमें जिसके घर में जहरीले पदार्थ आते हैं वह लाने के बाद उसका तत्काल खेत व अन्य जगहों पर प्रयोग कर लें। यदि बच्चा अकेले में रहना पसंद करता है तो उसे समय दें। मोबाइल से बच्चों को दूर रखें। उनसे बात करते रहें, उनकी गलत डिमांड पर तत्काल प्रतिक्रिया न दें। उसे धीरे-धीरे समझाएं।
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केस-1
शहर की एक किशोरी ने जहरीला पदार्थ खा लिया। उसके परिजन उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज में ले गए। खतरे से बाहर हाेने पर कांउसिलिंग के लिए मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर के पास ले जाया गया। डॉक्टर के पूछने पर किशोरी ने खाना नहीं खाने पर डांटने की बात बताई। जबकि पढ़ाई में अधिक नंबर लाने को लेकर मानसिक प्रेशर की भी बात कही।
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केस-2
कुछ दिन पहले एक नवविवाहिता ने जहर खा लिया, जिसे मेडिकल कॉलेज में इलाज करवाने के बाद मनोचिकित्सक के पास भेजा गया। मनोचिकित्सक के पूछने पर महिला ने बताया कि शादी के बाद जिम्मेदारियां बढ़ गईं, जबकि काम सही से नहीं होने पर हर समय डांट भी मिलती रहती थी, जिससे ऐसा कदम उठाना पड़ा।
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मेडिसिन वार्ड का आकंड़ा
दिन संख्या
रविवार सात
सोमवार आठ
मंगलवार नौ
बुधवार आठ
बृहस्पतिवार आठ
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-बढ़ती आत्महत्या के प्रयास का प्रमुख कारण संयुक्त परिवार का न होना
- किशोरियों, 25 से 30 वर्ष की महिलाओं के साथ युवा भी उठा रहे प्राणघाती कदम
राहुल त्रिपाठी
सिद्धार्थनगर। सामूहिक परिवार से अलग रहने की ललक से एकल परिवारों के बच्चों में पनप रही निराशा व हताशा भारी पड़ रही है। इन परिवार के बच्चों में पढ़ाई के बोझ व मानसिक तनाव किशोरियां, महिलाएं व युवाओं को प्राणघाती कदम उठाने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। अस्पताल में पहुंच रहे मामलों में अधिकतर कम उम्र के बच्चों के जहर खाने के मामले देखकर डॉक्टर भी चिंतित हैं। मेडिकल कॉलेज के आंकड़े की बात करें तो हर दिन सात से आठ ऐसे मरीज आ रहे हैं जो जहरीला पदार्थ का सेवन किए हुए होते हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञ व अन्य डॉक्टरों के अनुसार एकल रहने की ललक किशोरों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ा रही है। इससे वह जहरीले पदार्थ का प्रयोग कर रहे हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में तीन महीने से जहर खाने के केस बढ़ गए हैं। इससे वर्तमान में इमरजेंसी वार्ड में आठ से नौ मरीज जहर खाकर पहुंच रहे हैं, जिसमें से सात से आठ प्रतिदिन मेडिसिन वार्ड में भर्ती भी हो रहे हैं। उन्हें खतरे से बाहर जाने के बाद डॉक्टर उन्हें वार्ड से डिस्चार्ज करने के साथ परिजन को मानसिक रोग विभाग में कांउसिलिंग करवाने की भी सलाह दे रहे हैं।
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काउंसलिंग में किशोर, महिला व युवा की बातों को सुनकर हर कोई स्तब्ध हो जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार जहर खाने वाले मरीजों के काउंसिलिंग में उनकी अकेले रहने की इच्छा, किसी भी कार्य को लेकर माता-पिता का डांट, छोटी बातों को परिवार द्वारा न मानना, स्कूल की पढ़ाई में अधिक नंबर लाने की ललक, कम उम्र में हुए प्रेम प्रसंग प्रमुख कारण बन रहे हैं। इसमें यदि परिवार के लोग कुछ कह रहे है, तो किशोरी परिवार को डराने के लिए तत्काल जहरीले पदार्थ का सेवन कर ले रही हैं। इससे परिवार के लोग बात मानने के साथ ही उनके स्वास्थ्य को लेकर भी चिंतित हो रहे हैं। पांच दिनों के मेडिसिन वार्ड के आंकड़ों के अनुसार 40 लोगाें ने जहर खाया। इसमें सबसे अधिक संख्या किशोरियों की, उसके बाद 25 से 30 वर्ष की उम्र की महिला व सबसे कम संख्या में युवा वर्ग की रही है। जो अपनी इच्छा पूरा न होने पर प्राणघाती कदम उठा रहे हैं।
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किशोरियों की संख्या सबसे अधिक
मेडिकल कॉलेज के आंकड़े की बात करें तो जहर खाने वालों में सबसे अधिक 13 वर्ष से 20 वर्ष की किशोरियां व युवती हैं। इसमें भी किशोरियों की संख्या अधिक है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. संजय अग्रहरि ने बताया कि वर्तमान समय में मोबाइल के साथ अकेले रहने की प्रवृति बढ़ गई है, जिससे कई बच्चियां पढ़ाई में अधिक अंक, प्रेम प्रसंग, किसी भी वस्तु की प्राप्ति के लिए परिवार से जिद कर रही हैं। जब वह समय से पूरा नहीं हो रहा है तो परिवार को डराने के लिए वह प्राणघाती कदम उठा रही हैं, जिससे वह जहरीले पदार्थ का सेवन अधिक कर रही हैं।
बोले डॉक्टर
दो से तीन महीने से यह आंकड़ा बढ़ा है। इसमें सबसे अधिक 13 से 20 वर्ष के बच्चे हैं। सबसे अधिक लोगों परिवार को डराने के लिए ऐसा कदम उठा रहे हैं। जबकि परिवार को ध्यान नहीं देना भी एक कारण बन रहा है, जिससे लोग अकेला महसूस करने के साथ अपने एकांत को पूरा करने के लिए नई वस्तुओं की मांग कर रही है। जो पूरा नहीं होने पर प्राणघाती कदम उठा रहे हैं।
-डॉ. गौरव दुबे, मेडिसिन विभाग
वर्तमान में आत्महत्या करने के आंकड़े सबसे अधिक हैं। विश्व की बात करें तो प्रतिवर्ष आठ लाख लोग आत्महत्या कर रहे हैं। इसको सूक्ष्म तौर पर देखें तो हर 40 सेकेंड पर एक व्यक्ति की आत्महत्या से मौत हाे रही है, जबकि भारत में एक लाख 67 हजार व्यक्ति हर वर्ष मर रहे हैं। जहर खाने वाले मरीजों को काउंसिलिंग में बात करने पर छोटी-छोटी कारण निकल कर आ रही है। जिसे परिवार के लोग गंभीरता से नहीं ले रहे है। जो बाद में परिवार के साथ मरीज के लिए भी नुकसानदायक हो रहा है। डॉ. -मो. अफजल, मानसिक रोग विशेषज्ञ
इस तरह करें बचाव
वर्तमान समय में जहर खाने के बढ़ रहे मामले को लेकर परिवार के लोगों को सतर्कता बरतनी पड़ेगी। इसमें जिसके घर में जहरीले पदार्थ आते हैं वह लाने के बाद उसका तत्काल खेत व अन्य जगहों पर प्रयोग कर लें। यदि बच्चा अकेले में रहना पसंद करता है तो उसे समय दें। मोबाइल से बच्चों को दूर रखें। उनसे बात करते रहें, उनकी गलत डिमांड पर तत्काल प्रतिक्रिया न दें। उसे धीरे-धीरे समझाएं।
केस-1
शहर की एक किशोरी ने जहरीला पदार्थ खा लिया। उसके परिजन उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज में ले गए। खतरे से बाहर हाेने पर कांउसिलिंग के लिए मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर के पास ले जाया गया। डॉक्टर के पूछने पर किशोरी ने खाना नहीं खाने पर डांटने की बात बताई। जबकि पढ़ाई में अधिक नंबर लाने को लेकर मानसिक प्रेशर की भी बात कही।
केस-2
कुछ दिन पहले एक नवविवाहिता ने जहर खा लिया, जिसे मेडिकल कॉलेज में इलाज करवाने के बाद मनोचिकित्सक के पास भेजा गया। मनोचिकित्सक के पूछने पर महिला ने बताया कि शादी के बाद जिम्मेदारियां बढ़ गईं, जबकि काम सही से नहीं होने पर हर समय डांट भी मिलती रहती थी, जिससे ऐसा कदम उठाना पड़ा।
मेडिसिन वार्ड का आकंड़ा
दिन संख्या
रविवार सात
सोमवार आठ
मंगलवार नौ
बुधवार आठ
बृहस्पतिवार आठ