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Siddharthnagar News: बारिश ने किसानों को दिखाई आगे की राह
Wed, 24 May 2023 10:52 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 24 May 2023 10:52 PM IST
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सिद्धार्थनगर। बारिश न होने के कारण खरीफ यानी धान की खेती करने वाले किसान चाहते हुए भी असहाय बन थे। कारण जमीन में नमी न होने के कारण खेत की जुताई नहीं हो पा रही थी। जबकि उन्हें जून माह के प्रथम सप्ताह में ही धान की नर्सरी डालनी है। बुधवार को भोर में हुई बारिश से किसानों को काफी राहत मिली है। अब वह खेत की जुताई करके उसे तैयार कर लेंगे। जिससे रोपाई के समय किसानों को कठिनाई नहीं होगी।
जिले में किसान प्रमुख रूप से दो प्रकार की फसलें लगाते हैं। इसमें धान और गेहूं की फसल शामिल है। खरीफ के सीजन में लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि पर किसान धान की खेती करते हैं। अगर समय से बारिश हो जाए तो मई माह के दूसरे सप्ताह से किसान खेत की जुताई करके उसे तैयार करने में जुट जाते हैं। समय से खेत की जुताई होने से पुराने खर-पतवार धूप में जलकर नष्ट हो जाते हैं, वहीं नए खरपतवार का जमाव हो जाता है। जिससे रोपाई से पहले जुताई करके किसान नष्ट कर देते हैं। लेकिन अप्रैल और मई माह में 23 दिन बीत जाने के बाद बुधवार को बारिश हुई है। कुछ इलाकों में कम तो कहीं- कहीं अधिक बारिश हुई है, जिससे किसानों को राहत मिली है। बारिश के बाद वह खुश हो गए हैं कि अब खेत की जुताई हो जाएगी। जिससे वह खेत को तैयार करके धान की नर्सरी डाल सकेंगे। वहीं सब्जी की खेती करने वाले किसान भी अब जुताई करके सब्जी की खेती कर सकेंगे। जोगिया क्षेत्र के किसान छोटेलाल, रामसेवक यादव, दूधनाथ तिवारी ने कहा कि बारिश 10 मई तक हो जानी चाहिए थी, लेकिन नहीं हो रही थी। जिससे खेत की जुताई आदि कार्य नहीं हो पा रहा था। अब बारिश हुई है, इससे खेत में इतनी नमी हो गई है कि खेत की जुताई कर सकेंगे। जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि बारिश होने से किसान धान की खेती करने की तैयारी शुरू कर सकेंगे। फिलहाल किसानों को चाहिए कि वह नर्सरी डालने के लिए खेत की जुताई करके उसे तैयार कर लें। खर पतवार नहीं रहेगा तो नर्सरी में अच्छी होगी।
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जिले में किसान प्रमुख रूप से दो प्रकार की फसलें लगाते हैं। इसमें धान और गेहूं की फसल शामिल है। खरीफ के सीजन में लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि पर किसान धान की खेती करते हैं। अगर समय से बारिश हो जाए तो मई माह के दूसरे सप्ताह से किसान खेत की जुताई करके उसे तैयार करने में जुट जाते हैं। समय से खेत की जुताई होने से पुराने खर-पतवार धूप में जलकर नष्ट हो जाते हैं, वहीं नए खरपतवार का जमाव हो जाता है। जिससे रोपाई से पहले जुताई करके किसान नष्ट कर देते हैं। लेकिन अप्रैल और मई माह में 23 दिन बीत जाने के बाद बुधवार को बारिश हुई है। कुछ इलाकों में कम तो कहीं- कहीं अधिक बारिश हुई है, जिससे किसानों को राहत मिली है। बारिश के बाद वह खुश हो गए हैं कि अब खेत की जुताई हो जाएगी। जिससे वह खेत को तैयार करके धान की नर्सरी डाल सकेंगे। वहीं सब्जी की खेती करने वाले किसान भी अब जुताई करके सब्जी की खेती कर सकेंगे। जोगिया क्षेत्र के किसान छोटेलाल, रामसेवक यादव, दूधनाथ तिवारी ने कहा कि बारिश 10 मई तक हो जानी चाहिए थी, लेकिन नहीं हो रही थी। जिससे खेत की जुताई आदि कार्य नहीं हो पा रहा था। अब बारिश हुई है, इससे खेत में इतनी नमी हो गई है कि खेत की जुताई कर सकेंगे। जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि बारिश होने से किसान धान की खेती करने की तैयारी शुरू कर सकेंगे। फिलहाल किसानों को चाहिए कि वह नर्सरी डालने के लिए खेत की जुताई करके उसे तैयार कर लें। खर पतवार नहीं रहेगा तो नर्सरी में अच्छी होगी।
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