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Siddharthnagar News: श्रीमद्भागवत कथा में गोवर्धन पूजा का महत्व बताया
Fri, 03 Apr 2026 01:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 03 Apr 2026 01:29 AM IST
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पकड़ी बाजार। क्षेत्र के जोगीबारी गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान बुधवार रात कथावाचक आचार्य प्रशांत भूषण ने गोवर्धन पूजा की कथा सुनाई। कथा श्रवण कर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और भक्ति रस में डूबे नजर आए।
कथावाचक ने बताया कि गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र के अभिमान का हरण और गोवर्धन पर्वत की पूजा का महत्व बताया जाता है। यह कथा धार्मिक होने के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत के अनुसार ब्रजवासी प्रतिवर्ष वर्षा के देवता इंद्र की पूजा करते थे। उनका विश्वास था कि इंद्र की कृपा से वर्षा होती है, जिससे खेती और पशुपालन सफल होता है। एक बार बाल रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने नंद बाबा और ब्रजवासियों से प्रश्न किया कि वे इंद्र की पूजा क्यों करते हैं।
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आचार्य ने आगे बताया कि श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि वर्षा और समृद्धि का वास्तविक आधार प्रकृति है, विशेष रूप से गोवर्धन पर्वत, जो गायों के लिए चारा, जल और आश्रय प्रदान करता है। उन्होंने प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का संदेश दिया।
श्रीकृष्ण के कहने पर ब्रजवासियों ने इंद्र पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू की। उन्होंने पर्वत की परिक्रमा की और अन्नकूट का भोग लगाकर उत्सव मनाया।
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कथावाचक ने बताया कि गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र के अभिमान का हरण और गोवर्धन पर्वत की पूजा का महत्व बताया जाता है। यह कथा धार्मिक होने के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देती है।
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उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत के अनुसार ब्रजवासी प्रतिवर्ष वर्षा के देवता इंद्र की पूजा करते थे। उनका विश्वास था कि इंद्र की कृपा से वर्षा होती है, जिससे खेती और पशुपालन सफल होता है। एक बार बाल रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने नंद बाबा और ब्रजवासियों से प्रश्न किया कि वे इंद्र की पूजा क्यों करते हैं।
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आचार्य ने आगे बताया कि श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि वर्षा और समृद्धि का वास्तविक आधार प्रकृति है, विशेष रूप से गोवर्धन पर्वत, जो गायों के लिए चारा, जल और आश्रय प्रदान करता है। उन्होंने प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का संदेश दिया।
श्रीकृष्ण के कहने पर ब्रजवासियों ने इंद्र पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू की। उन्होंने पर्वत की परिक्रमा की और अन्नकूट का भोग लगाकर उत्सव मनाया।