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Siddharthnagar News: बदलेगी तारीख पर तारीख की छवि...पर तकनीक अभी बाधा
Wed, 06 May 2026 01:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 06 May 2026 01:52 AM IST
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सिद्धार्थनगर। अब “समन नहीं मिला” का बहाना ज्यादा दिन नहीं चलने वाला है। मोबाइल, ईमेल और मैसेजिंग एप पर नोटिस और तामील का डिजिटल रिकॉर्ड यानी ई-समन व्यवस्था की मंगलवार को सिद्धार्थनगर कचहरी में चर्चा तेज रही। अधिवक्ताओं का मानना है कि इससे समन तामील जैसी सबसे विवादित कड़ी पारदर्शी होगी।
सिस्टम अच्छा है, लेकिन जमीन पर लागू करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। गांवों में नेटवर्क और तकनीकी समझ अभी भी बाधा बन सकती है। इसके लागू होने पर फर्जी रिपोर्टिंग पर ब्रेक लगेगा और वर्षों से चली आ रही “तारीख पर तारीख” की छवि बदल सकती है।
मंगलवार को कचहरी परिसर में वकीलों और वादकारियों के बीच इसी बदलाव को लेकर दिनभर बहस होती रही। अब तक समन तामील पूरी तरह कागजी और फील्ड रिपोर्टिंग पर निर्भर रही है, जिसमें देरी, त्रुटि और विवाद की गुंजाइश बनी रहती थी। कई मामलों में यह आरोप भी लगे कि संबंधित व्यक्ति तक सूचना पहुंचे बिना ही तामील रिपोर्ट दर्ज कर दी जाती थी, जिससे मुकदमे लंबित होते चले जाते थे।
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नई व्यवस्था लागू होने के बाद कोर्ट का समन सीधे मोबाइल, ईमेल और मैसेजिंग एप के जरिये भेजा जाएगा। हर नोटिस का टाइम स्टैंप और डिलीवरी स्टेटस सिस्टम में दर्ज होगा, जिससे पहली बार समन तामील कागजी रिपोर्ट से निकलकर डिजिटल सबूत आधारित प्रक्रिया बनेगी।
सीनियर अधिवक्ता संजय श्रीवास्तव का मानना है कि अब हर तामील का रिकॉर्ड रहेगा, जिससे फर्जी रिपोर्टिंग आसान नहीं होगी। इससे पुलिस और पूरी प्रक्रिया दोनों जवाबदेह बनेंगे।
अधिवक्ता दीपक दुबे कहते हैं, ट्रायल में देरी का सबसे बड़ा कारण समन तामील रहा है। अगर यह प्रक्रिया समयबद्ध हो गई तो ‘तारीख पर तारीख’ वाली छवि काफी हद तक बदल सकती है। नई व्यवस्था में समन सीधे मोबाइल नंबर या डिजिटल आईडी से जुड़ा होगा। इससे गवाह और आरोपी तक सूचना सीधे पहुंचेगी और हर रिस्पॉन्स का सिस्टम लॉग बनेगा। ं
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सिस्टम अच्छा है, लेकिन जमीन पर लागू करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। गांवों में नेटवर्क और तकनीकी समझ अभी भी बाधा बन सकती है। इसके लागू होने पर फर्जी रिपोर्टिंग पर ब्रेक लगेगा और वर्षों से चली आ रही “तारीख पर तारीख” की छवि बदल सकती है।
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मंगलवार को कचहरी परिसर में वकीलों और वादकारियों के बीच इसी बदलाव को लेकर दिनभर बहस होती रही। अब तक समन तामील पूरी तरह कागजी और फील्ड रिपोर्टिंग पर निर्भर रही है, जिसमें देरी, त्रुटि और विवाद की गुंजाइश बनी रहती थी। कई मामलों में यह आरोप भी लगे कि संबंधित व्यक्ति तक सूचना पहुंचे बिना ही तामील रिपोर्ट दर्ज कर दी जाती थी, जिससे मुकदमे लंबित होते चले जाते थे।
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नई व्यवस्था लागू होने के बाद कोर्ट का समन सीधे मोबाइल, ईमेल और मैसेजिंग एप के जरिये भेजा जाएगा। हर नोटिस का टाइम स्टैंप और डिलीवरी स्टेटस सिस्टम में दर्ज होगा, जिससे पहली बार समन तामील कागजी रिपोर्ट से निकलकर डिजिटल सबूत आधारित प्रक्रिया बनेगी।
सीनियर अधिवक्ता संजय श्रीवास्तव का मानना है कि अब हर तामील का रिकॉर्ड रहेगा, जिससे फर्जी रिपोर्टिंग आसान नहीं होगी। इससे पुलिस और पूरी प्रक्रिया दोनों जवाबदेह बनेंगे।
अधिवक्ता दीपक दुबे कहते हैं, ट्रायल में देरी का सबसे बड़ा कारण समन तामील रहा है। अगर यह प्रक्रिया समयबद्ध हो गई तो ‘तारीख पर तारीख’ वाली छवि काफी हद तक बदल सकती है। नई व्यवस्था में समन सीधे मोबाइल नंबर या डिजिटल आईडी से जुड़ा होगा। इससे गवाह और आरोपी तक सूचना सीधे पहुंचेगी और हर रिस्पॉन्स का सिस्टम लॉग बनेगा। ं