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Siddharthnagar News: ढ़ेकहरी बुजुर्ग में राजकीय महाविद्यालय बनने की उम्मीद टूटी
Sun, 16 Jul 2023 11:52 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 16 Jul 2023 11:52 PM IST
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शोहरतगढ़। बढ़नी ब्लाॅक के ढ़ेकहरी बुजुर्ग में राजकीय महाविद्यालय के लिए जमीन मिलने के बाद शासन से स्वीकृति न मिलने से स्थानीय लोगों में निराशा है। तीन वर्ष पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से राजकीय महाविद्यालय निर्माण के लिए ढ़ेकहरी बुजुर्ग में जमीन तलाशने के लिए राजस्व विभाग को पत्र लिखा था। जिसके बाद ढाई साल तक जमीन की तलाश पूरी नहीं हो सकी थी।
छह माह पहले जमीन की तलाश भी राजस्व विभाग ने पूरी कर ली। इसी बीच शासन द्वारा नए राजकीय महाविद्यालय की मंजूरी देने से मना कर दिया। जिससे बाद क्षेत्रीय लोगों की बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाने की उम्मीदों को झटका लगा है। इस क्षेत्र में 12 किमी के दायरे में महाविद्यालय नहीं है, इस कारण महाविद्यालय बनने पर उच्च शिक्षा की राह आसान हो जाती है।
क्षेत्र निवासी मो. सफात, मकसूदन पांडेय, राजकुमार, प्रेमचंद, श्यामसुंदर के मुताबिक बढ़नी ब्लाक क्षेत्र में परसा, बरगदवा व सेवरा में महाविद्यालय है लेकिन हर विषय की पढ़ाई नहीं हो रही है। मनचाही विषय की पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं को शोहरतगढ़, इटवा व पचपेड़वा जाने को मजबूर होना पड़ता है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तन्मय ने बताया कि पहले से ही प्रदेश में विभाग द्वारा 22 राजकीय महाविद्यालय बनकर तैयार हैं, लेकिन कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रहीं हैं। इस कारण शासन ने नए राजकीय महाविद्यालयों की स्वीकृति प्रदान करने से मना कर दिया है।
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छह माह पहले जमीन की तलाश भी राजस्व विभाग ने पूरी कर ली। इसी बीच शासन द्वारा नए राजकीय महाविद्यालय की मंजूरी देने से मना कर दिया। जिससे बाद क्षेत्रीय लोगों की बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाने की उम्मीदों को झटका लगा है। इस क्षेत्र में 12 किमी के दायरे में महाविद्यालय नहीं है, इस कारण महाविद्यालय बनने पर उच्च शिक्षा की राह आसान हो जाती है।
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क्षेत्र निवासी मो. सफात, मकसूदन पांडेय, राजकुमार, प्रेमचंद, श्यामसुंदर के मुताबिक बढ़नी ब्लाक क्षेत्र में परसा, बरगदवा व सेवरा में महाविद्यालय है लेकिन हर विषय की पढ़ाई नहीं हो रही है। मनचाही विषय की पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं को शोहरतगढ़, इटवा व पचपेड़वा जाने को मजबूर होना पड़ता है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तन्मय ने बताया कि पहले से ही प्रदेश में विभाग द्वारा 22 राजकीय महाविद्यालय बनकर तैयार हैं, लेकिन कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रहीं हैं। इस कारण शासन ने नए राजकीय महाविद्यालयों की स्वीकृति प्रदान करने से मना कर दिया है।
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