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Siddharthnagar News: फेक सेल दिखाकर सब्सिडी लेने का खेल, जांचकर होगी कार्रवाई
Tue, 26 Sep 2023 03:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 26 Sep 2023 03:10 AM IST
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सिद्धार्थनगर। प्रदेश के आगरा समेत कुछ जिलों में उर्वरक कंपनियों की तरफ से फेक सेल दिखाकर सब्सिडी लेने के मामले के खुलासे के बाद जिले में भी जांच शुरू हो गई है। कृषि निदेशक के निर्देश पर जिला कृषि अधिकारी मुहम्मद मुजम्मिल ने इस संबंध में कार्रवाई का निर्देश दिया है।
उन्होंने बताया कि कुछ उर्वरक कंपनियां सब्सिडी लेने के उद्देश्य से फुटकर विक्रेताओं पर दबाव बनाकर बगैर विक्री के ही डीएपी उर्वरक की फेक सेल पीओएस मशीन से करवाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके संबंध में उर्वरक विक्रेताओं को चिन्हित कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि यूरिया एवं डीएपी की प्रत्येक बोरी पर मिलने वाली सब्सिडी धनराशि के लिए उर्वरक कंपनियां फर्जीवाड़ा कर रही है। इसलिए जिले में सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि जनपद के किसी भी थोक एवं फुटकर उर्वरक विक्रेता को बगैर विक्री के उर्वरकों की फेक सेल पीओएस मशीन से करते पाए जाने पर उसके विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत केस दर्ज कराते हुए कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी तक जिले में इस तरह का मामला सामने नहीं आया है।
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इतनी मिलती है सब्सिडी
किसानों को 250 से 280 रुपये में मिलने वाले एक बोरी यूरिया की लागत 2400 से 2700 रुपये होती है। इसके प्रत्येक बोरी के बिक्री पर कंपनी को 1700 से 2300 रुपये तक सब्सिडी मिलती है। इसी तरह 1350 रुपये में मिलने वाली डीएपी के एक बोरी की लागत 3850 रुपये पड़ती है, जिस पर कंपनी को 2400 रुपये तक सब्सिडी मिलती है। इस तरह कंपनियां फेक सेल दिखाकर सब्सिडी धनराशि हड़पने का प्रयास करती है।
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उन्होंने बताया कि कुछ उर्वरक कंपनियां सब्सिडी लेने के उद्देश्य से फुटकर विक्रेताओं पर दबाव बनाकर बगैर विक्री के ही डीएपी उर्वरक की फेक सेल पीओएस मशीन से करवाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके संबंध में उर्वरक विक्रेताओं को चिन्हित कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि यूरिया एवं डीएपी की प्रत्येक बोरी पर मिलने वाली सब्सिडी धनराशि के लिए उर्वरक कंपनियां फर्जीवाड़ा कर रही है। इसलिए जिले में सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि जनपद के किसी भी थोक एवं फुटकर उर्वरक विक्रेता को बगैर विक्री के उर्वरकों की फेक सेल पीओएस मशीन से करते पाए जाने पर उसके विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत केस दर्ज कराते हुए कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी तक जिले में इस तरह का मामला सामने नहीं आया है।
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इतनी मिलती है सब्सिडी
किसानों को 250 से 280 रुपये में मिलने वाले एक बोरी यूरिया की लागत 2400 से 2700 रुपये होती है। इसके प्रत्येक बोरी के बिक्री पर कंपनी को 1700 से 2300 रुपये तक सब्सिडी मिलती है। इसी तरह 1350 रुपये में मिलने वाली डीएपी के एक बोरी की लागत 3850 रुपये पड़ती है, जिस पर कंपनी को 2400 रुपये तक सब्सिडी मिलती है। इस तरह कंपनियां फेक सेल दिखाकर सब्सिडी धनराशि हड़पने का प्रयास करती है।
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