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फर्जी तरीके से नदी की भूमि का हुआ था बैनामा, एसडीएम ने किया निरस्त
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फर्जी तरीके से नदी की भूमि का हुआ था बैनामा, एसडीएम ने किया निरस्त
डुमरियागंज/भारतभारी। तहसील क्षेत्र भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र आमी नदी के उद्गम स्थल ग्राम सिकहरा कोहड़ा की लगभग आधा एकड़ भूमि को शकरूनिशा आदि की ओर से फर्जी तरीके से अपने नाम दर्ज करा लिया गया था। उसे रविवार को एसडीएम त्रिभुवन कुमार ने निरस्त कर फिर से पोखरे की भूमि घोषित कर दी। साथ ही इस स्थल की पौराणिक जांच पुरातत्व विभाग से कराने के लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजा किया है। उन्होंने सरकारी भूमि अपने नाम कराने वाले व्यक्तियों पर केस दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
तहसील डुमरियागंज के भगवान बुद्ध से संबंधित पौराणिक एवं पवित्र नदी उद्गम स्थल राजस्व सिकहरा कोहड़ा से प्रारंभ होकर परसा पंडित जमोतिया आदि आठ गांव में विलुप्त हो चुकी थी। उसके पुनरुद्धार के लिए शासन की ओर से लगभग छह करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। इससे लगभग पांच हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना था। अवमुक्त धनराशि 5.3 करोड़ रुपये से 4.2 हेक्टेयर भूमि लगभग 82 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण हो चुका है। अभी एक करोड़ धनराशि का आवंटन अवशेष है। एसडीएम त्रिभुवन ने बताया कि शेष धनराशि प्राप्त होने पर आमी नदी का कार्य पूर्ण होगा और डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में भगवान बुद्ध से संबंधित धरोहर प्राप्त होगी, जिससे डुमरियागंज एक ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल के रूप में विकसित होगा। आमी नदी उद्गम स्थल को वृहद रूप से पौराणिक विरासत के रूप में विकसित किया जाएगा।
भगवान बुद्ध से संबंधित दृश्य तथा अन्य पौराणिक स्मृतियां होंगी तथा पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया जाएगा। एसडीएम ने बताया कि डुमरियागंज में भगवान बुद्ध से संबंधित आमी नदी के अतिरिक्त दो बौद्ध स्तूप भी प्राप्त हुए हैं। उनकी पुरातत्व विभाग से खुदाई के लिए जिलाधिकारी को अवगत कराया जा चुका है। अति शीघ्र पुरातत्व विभाग निम्न दोनों स्तूपों को संरक्षित करेगा। भारतभारी में अवस्थित स्तूप टीले की संरचना है। इस बौद्ध स्तूप जिले को संरक्षित किया जाना है। इसी तरह तहसील क्षेत्र के ग्राम हसुड़ी औसानपुर में अवस्थित टीला स्तूप को भी संरक्षित किया जाना है।
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डुमरियागंज/भारतभारी। तहसील क्षेत्र भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र आमी नदी के उद्गम स्थल ग्राम सिकहरा कोहड़ा की लगभग आधा एकड़ भूमि को शकरूनिशा आदि की ओर से फर्जी तरीके से अपने नाम दर्ज करा लिया गया था। उसे रविवार को एसडीएम त्रिभुवन कुमार ने निरस्त कर फिर से पोखरे की भूमि घोषित कर दी। साथ ही इस स्थल की पौराणिक जांच पुरातत्व विभाग से कराने के लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजा किया है। उन्होंने सरकारी भूमि अपने नाम कराने वाले व्यक्तियों पर केस दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
तहसील डुमरियागंज के भगवान बुद्ध से संबंधित पौराणिक एवं पवित्र नदी उद्गम स्थल राजस्व सिकहरा कोहड़ा से प्रारंभ होकर परसा पंडित जमोतिया आदि आठ गांव में विलुप्त हो चुकी थी। उसके पुनरुद्धार के लिए शासन की ओर से लगभग छह करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। इससे लगभग पांच हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना था। अवमुक्त धनराशि 5.3 करोड़ रुपये से 4.2 हेक्टेयर भूमि लगभग 82 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण हो चुका है। अभी एक करोड़ धनराशि का आवंटन अवशेष है। एसडीएम त्रिभुवन ने बताया कि शेष धनराशि प्राप्त होने पर आमी नदी का कार्य पूर्ण होगा और डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में भगवान बुद्ध से संबंधित धरोहर प्राप्त होगी, जिससे डुमरियागंज एक ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल के रूप में विकसित होगा। आमी नदी उद्गम स्थल को वृहद रूप से पौराणिक विरासत के रूप में विकसित किया जाएगा।
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भगवान बुद्ध से संबंधित दृश्य तथा अन्य पौराणिक स्मृतियां होंगी तथा पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया जाएगा। एसडीएम ने बताया कि डुमरियागंज में भगवान बुद्ध से संबंधित आमी नदी के अतिरिक्त दो बौद्ध स्तूप भी प्राप्त हुए हैं। उनकी पुरातत्व विभाग से खुदाई के लिए जिलाधिकारी को अवगत कराया जा चुका है। अति शीघ्र पुरातत्व विभाग निम्न दोनों स्तूपों को संरक्षित करेगा। भारतभारी में अवस्थित स्तूप टीले की संरचना है। इस बौद्ध स्तूप जिले को संरक्षित किया जाना है। इसी तरह तहसील क्षेत्र के ग्राम हसुड़ी औसानपुर में अवस्थित टीला स्तूप को भी संरक्षित किया जाना है।
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