{"_id":"5e2889898ebc3e4b3412ba47","slug":"tender-will-be-repeated-siddharthnagar-news-gkp338238226","type":"story","status":"publish","title_hn":"दोबारा होगा कार्यों का होगा टेंडर, 20 दिन मिला समय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दोबारा होगा कार्यों का होगा टेंडर, 20 दिन मिला समय
विज्ञापन
जिला पंचायत सभागार में आयोजित बैठक को संबोधित करते सांसद जगदंबिका पाल।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दोबारा कार्यों के टेंडर पर साथ हुए सदस्य
सांसद बोले, 20 दिन में टेंडर कराकर विकास की गति को करें तेज
जिला पंचायत सदस्यों ने सहमति के आधार पर किया फैसला
पिछली बैठक में मंत्री के सामने नहीं बन पाई थी बात
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जिला पंचायत सभागार में बुधवार को सांसद जगदंबिका पाल और त्रिस्तरीय कमेटी की अगुवाई में जिला पंचायत की बैठक आखिरकर एक साल बाद हो ही गई। आरोप-प्रत्यारोप के बीच पूर्व में निरस्त किए गए कार्यों का दोबारा टेंडर जारी करने पर सहमति बनी। साथ ही 2018-19 और 2019- 20 के कार्यों के प्रस्ताव देने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। इसके लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को 20 दिन का समय दिया गया है। सांसद जगदंबिका पाल के इस सुझाव का सभी सदस्यों ने हाथ उठाकर समर्थन किया।
सत्ता परिवर्तन के बाद जिला पंचायत की ओर से होने वाले कार्यों पर ग्रहण लगा है। इसी बीच निर्वाचित अध्यक्ष को हटाकर नई व्यवस्था के तहत त्रिस्तरीय कमेटी का गठन किया गया। लेकिन अंदरूनी कलह से जूझ रहे जिला पंचायत सदस्य एक भी बैठक नहीं करा पाए। इसी बीच बुधवार को एक बार फिर जिला पंचायत बोर्ड की बैठक हुई। इसमें सांसद जगदंबिका पाल के समक्ष सदस्यों में कार्यों से जुड़े मुद्दे को उठाया गया। जिला पंचायत राज अधिकारी से जवाब मांगा गया। आरोप-प्रत्यारोप को शांत कराते हुए सांसद जगदंबिका पाल ने सभी सदस्यों से नए सिर से विकास कार्य को गति देने की बात कही। उन्होंने कहा कि पूर्व में जो जिन कार्यों के लिए टेंडर हुआ था, उसे निरस्त कर दिया गया है। अब नए सिरे से वर्ष 2018-19 और 2019-20 के कार्यों का प्रस्ताव दोबारा देते हुए नए सिरे से टेंडर से निकाला जाएगा। इसके लिए 20 दिन का समय दिया गया। इस पर सभी सदस्यों ने सहमति जताई। इस दौरान विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक श्यामधनी राही, स्वास्थ्य मंत्री के प्रतिनिधि जोगेंद्र मिश्र, सीडीओ पुलकित गर्ग, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र मणि त्रिपाठी, हरिशंकर सिंह, केशभान राय, जिला पंचायत सदस्य उमेश सिंह, अजय सिंह, मो. उमर, दिनेश गुप्ता, महेंद्र प्रताप सिंह, महेश कनौजिया, निरंकार सिंह, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि लवकुश ओझा, ब्लॉक प्रमुख मनोज मौर्य, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि जोगिया कौशलेंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
जिले में हैं जॉब कार्ड माफिया
बैठक के दौरान मनरेगा से जुड़े जिला पंचायत के 65 करोड़ रुपये के कार्य को दूसरे विभागों में चले जाने पर सांसद ने खेद व्यक्त किया। कहा कि इस जिले का दुर्भाग्य है कि जिला पंचायत का रुपये दूसरे विभागों में चला जा रहा है। और उस रुपये को उन संस्थाओं ने निकाल लिया। आनन-फानन इनकी संख्या में जॉब कार्ड और मजदूरों के नाम से भुगतान हो जाना यह दर्शाता है कि जिले में जॉबकार्ड माफिया हावी हैं। इसलिए अब से नए तरीके से काम करें।
विज्ञापन
मंत्रियों की मौजूदगी में हुई बैठक में छह सदस्य हुए थे शामिल
इसी महीने में चार जनवरी को कैबिनेट मंत्री जय प्रताप सिंह और बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी की अगुवाई में बैठक हुई थी। इसमें केवल छह सदस्य ही शामिल हुए थे। उसी दिन 32 सदस्यों ने बैठक का विरोध जताते हुए बांसी के एक लॉज में बैठक कर विरोध जताया था। उस वक्त बेसिक शिक्षा मंत्री ने यह भी सवाल उठाया था कि भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों की सूची जिलाध्यक्ष को उपलब्ध कराई जाए। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। माना जा रहा है कि सत्ता पक्ष के नेताओं में अंदरूनी रार अपनी रौ पर है। यही वजह है कि गुटबाजी के कारण अब तक बैठक नहीं हो पा रही थी। वहीं, बुधवार को हुई बैठक में 48 सदस्यों में से 32 सदस्य शामिल हुए।
विज्ञापन
सांसद बोले, 20 दिन में टेंडर कराकर विकास की गति को करें तेज
जिला पंचायत सदस्यों ने सहमति के आधार पर किया फैसला
पिछली बैठक में मंत्री के सामने नहीं बन पाई थी बात
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जिला पंचायत सभागार में बुधवार को सांसद जगदंबिका पाल और त्रिस्तरीय कमेटी की अगुवाई में जिला पंचायत की बैठक आखिरकर एक साल बाद हो ही गई। आरोप-प्रत्यारोप के बीच पूर्व में निरस्त किए गए कार्यों का दोबारा टेंडर जारी करने पर सहमति बनी। साथ ही 2018-19 और 2019- 20 के कार्यों के प्रस्ताव देने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। इसके लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को 20 दिन का समय दिया गया है। सांसद जगदंबिका पाल के इस सुझाव का सभी सदस्यों ने हाथ उठाकर समर्थन किया।
सत्ता परिवर्तन के बाद जिला पंचायत की ओर से होने वाले कार्यों पर ग्रहण लगा है। इसी बीच निर्वाचित अध्यक्ष को हटाकर नई व्यवस्था के तहत त्रिस्तरीय कमेटी का गठन किया गया। लेकिन अंदरूनी कलह से जूझ रहे जिला पंचायत सदस्य एक भी बैठक नहीं करा पाए। इसी बीच बुधवार को एक बार फिर जिला पंचायत बोर्ड की बैठक हुई। इसमें सांसद जगदंबिका पाल के समक्ष सदस्यों में कार्यों से जुड़े मुद्दे को उठाया गया। जिला पंचायत राज अधिकारी से जवाब मांगा गया। आरोप-प्रत्यारोप को शांत कराते हुए सांसद जगदंबिका पाल ने सभी सदस्यों से नए सिर से विकास कार्य को गति देने की बात कही। उन्होंने कहा कि पूर्व में जो जिन कार्यों के लिए टेंडर हुआ था, उसे निरस्त कर दिया गया है। अब नए सिरे से वर्ष 2018-19 और 2019-20 के कार्यों का प्रस्ताव दोबारा देते हुए नए सिरे से टेंडर से निकाला जाएगा। इसके लिए 20 दिन का समय दिया गया। इस पर सभी सदस्यों ने सहमति जताई। इस दौरान विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक श्यामधनी राही, स्वास्थ्य मंत्री के प्रतिनिधि जोगेंद्र मिश्र, सीडीओ पुलकित गर्ग, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र मणि त्रिपाठी, हरिशंकर सिंह, केशभान राय, जिला पंचायत सदस्य उमेश सिंह, अजय सिंह, मो. उमर, दिनेश गुप्ता, महेंद्र प्रताप सिंह, महेश कनौजिया, निरंकार सिंह, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि लवकुश ओझा, ब्लॉक प्रमुख मनोज मौर्य, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि जोगिया कौशलेंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
जिले में हैं जॉब कार्ड माफिया
बैठक के दौरान मनरेगा से जुड़े जिला पंचायत के 65 करोड़ रुपये के कार्य को दूसरे विभागों में चले जाने पर सांसद ने खेद व्यक्त किया। कहा कि इस जिले का दुर्भाग्य है कि जिला पंचायत का रुपये दूसरे विभागों में चला जा रहा है। और उस रुपये को उन संस्थाओं ने निकाल लिया। आनन-फानन इनकी संख्या में जॉब कार्ड और मजदूरों के नाम से भुगतान हो जाना यह दर्शाता है कि जिले में जॉबकार्ड माफिया हावी हैं। इसलिए अब से नए तरीके से काम करें।
विज्ञापन
मंत्रियों की मौजूदगी में हुई बैठक में छह सदस्य हुए थे शामिल
इसी महीने में चार जनवरी को कैबिनेट मंत्री जय प्रताप सिंह और बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी की अगुवाई में बैठक हुई थी। इसमें केवल छह सदस्य ही शामिल हुए थे। उसी दिन 32 सदस्यों ने बैठक का विरोध जताते हुए बांसी के एक लॉज में बैठक कर विरोध जताया था। उस वक्त बेसिक शिक्षा मंत्री ने यह भी सवाल उठाया था कि भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों की सूची जिलाध्यक्ष को उपलब्ध कराई जाए। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। माना जा रहा है कि सत्ता पक्ष के नेताओं में अंदरूनी रार अपनी रौ पर है। यही वजह है कि गुटबाजी के कारण अब तक बैठक नहीं हो पा रही थी। वहीं, बुधवार को हुई बैठक में 48 सदस्यों में से 32 सदस्य शामिल हुए।