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Siddharthnagar News: आज शाम चार बजे बंद हो जाएंगे मंदिरों के पट
Fri, 27 Oct 2023 11:55 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 27 Oct 2023 11:55 PM IST
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शरद पूर्णिमा की होगी पूजा, रात 1:05 बजे होगा ग्रहण का स्पर्श
ग्रहण काल में करना चाहिए रात्रि जागरण, मंत्र जप की होती है सिद्धि
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। इस बार शरद पूर्णिमा के दिन ही चंद्रग्रहण लग रहा है। शरद पूर्णिमा में विधि-विधान से पूजा की जाती है, जबकि चंद्रग्रहण में देव प्रतिमाओं को स्पर्श भी नहीं किया जाता है। ऐसा संयोग है कि दोनों स्थिति एक ही दिन पड़ रही है। इसलिए शनिवार को शरद पूर्णिमा की पूजा में चंद्रग्रहण को भी ध्यान दिया जाएगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, चंद्रगहण का सूतक स्पर्शकाल से नौ घंटे पहले ही लग जाएगा। इस कारण मंदिरों के पट शाम चार बजे ही बंद हो जाएंगे, जबकि शरद पूर्णिमा की पूजा में अचल देव प्रतिमाओं को घर से बाहर निकालकर पूजा की जाती है। उस स्थान पर खीर बनाकर रखी जाती है।
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा से अमृत की बूंद टपकती है। इस कारण रात में रखी गई खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से आरोग्यता की प्राप्ति हाेती है।
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आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि शनिवार रात में 1:05 ग्रहण का स्पर्श होगा, जबकि 2:23 बजे ग्रहण समाप्त होगा। इसका सूतक शाम 4:05 बजे ही लग जाएगा। इस बार गर्भगृह से प्रतिमाओं को बाहर नहीं निकाला जाएगा। चंद्रमा से ही अमृत की बूंद टपकने की मान्यता है, जबकि चंद्रमा का ग्रहण रहेगा। इस कारण इस बार खीर नहीं रखनी चाहिए। हालांकि, विधि विधान से पूजा नहीं होगी, जबकि मंत्र जाप और धार्मिक कथा करनी चाहिए।
श्री सिंहेश्वरी मंदिर के संचालक आचार्य दिव्यांशु ने बताया कि ग्रहण के सूतक काल में मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे। शरद पूर्णिमा और चंद्रग्रहण का अनुष्ठान नहीं होगा। ग्रहण में रात में जागरण करते हुए भगवान का ध्यान करना चाहिए। चंद्रग्रहण के सूतक काल में भी लोगों को अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। पूर्णिमा व्रत करने वाले लोग व्रत और साधना करें।
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शरद पूर्णिमा की होगी पूजा, रात 1:05 बजे होगा ग्रहण का स्पर्श
ग्रहण काल में करना चाहिए रात्रि जागरण, मंत्र जप की होती है सिद्धि
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। इस बार शरद पूर्णिमा के दिन ही चंद्रग्रहण लग रहा है। शरद पूर्णिमा में विधि-विधान से पूजा की जाती है, जबकि चंद्रग्रहण में देव प्रतिमाओं को स्पर्श भी नहीं किया जाता है। ऐसा संयोग है कि दोनों स्थिति एक ही दिन पड़ रही है। इसलिए शनिवार को शरद पूर्णिमा की पूजा में चंद्रग्रहण को भी ध्यान दिया जाएगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, चंद्रगहण का सूतक स्पर्शकाल से नौ घंटे पहले ही लग जाएगा। इस कारण मंदिरों के पट शाम चार बजे ही बंद हो जाएंगे, जबकि शरद पूर्णिमा की पूजा में अचल देव प्रतिमाओं को घर से बाहर निकालकर पूजा की जाती है। उस स्थान पर खीर बनाकर रखी जाती है।
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मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा से अमृत की बूंद टपकती है। इस कारण रात में रखी गई खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से आरोग्यता की प्राप्ति हाेती है।
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आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि शनिवार रात में 1:05 ग्रहण का स्पर्श होगा, जबकि 2:23 बजे ग्रहण समाप्त होगा। इसका सूतक शाम 4:05 बजे ही लग जाएगा। इस बार गर्भगृह से प्रतिमाओं को बाहर नहीं निकाला जाएगा। चंद्रमा से ही अमृत की बूंद टपकने की मान्यता है, जबकि चंद्रमा का ग्रहण रहेगा। इस कारण इस बार खीर नहीं रखनी चाहिए। हालांकि, विधि विधान से पूजा नहीं होगी, जबकि मंत्र जाप और धार्मिक कथा करनी चाहिए।
श्री सिंहेश्वरी मंदिर के संचालक आचार्य दिव्यांशु ने बताया कि ग्रहण के सूतक काल में मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे। शरद पूर्णिमा और चंद्रग्रहण का अनुष्ठान नहीं होगा। ग्रहण में रात में जागरण करते हुए भगवान का ध्यान करना चाहिए। चंद्रग्रहण के सूतक काल में भी लोगों को अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। पूर्णिमा व्रत करने वाले लोग व्रत और साधना करें।