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Siddharthnagar News: आधार फीडिंग ऑनलाइन न होने पर शिक्षकों का वेतन रोका

Thu, 08 Feb 2024 02:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 08 Feb 2024 02:20 AM IST
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Teachers' salaries stopped due to Aadhaar feeding not being online
बर्डपुर। बच्चों का आधार कार्ड नॉट के लिए एवुलेबल पेडेंसी एक सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत पूर्ण न होने के कारण क्षेत्र के लगभग दो दर्जन विद्यालयों के शिक्षकों का वेतन मय स्टाप रोक दिया गया है। जबकि इस कार्य को पूर्ण करने के लिए बच्चों का आधार कार्ड जरूरी है। जिन बच्चों का आधार कार्ड बना था, उनका हो गया है। जिनका नहीं बना उनका नहीं हो पाया है और अभिभावक आधार कार्ड बनवाने में विशेष रुचि नहीं ले रहे हैं।
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परिषदीय विद्यालयों में सभी बच्चों का पूरा बायोडाटा आधार कार्ड सहित आनलाइन फीड होना है। अधिकांश बच्चों के अभिभावकों ने आधार कार्ड बनवाकर दे दिया। जिनका नहीं बना उनका बनवाने के लिए शिक्षक दौड़-दौड़कर अभिभावकों से संपर्क कर रहे हैं। कई बच्चों जिनका पूरा डाक्यूमेंट था, उनका शिक्षक खुद ले जाकर बनवा भी रहे हैं। लेकिन आधार कार्ड बनवाने के लिए निवास प्रमाण पत्र सहित कई अभिलेखों की जरूरत पड़ती है। शिक्षक उसको कहा से पाए इसके साथ-साथ फीस भी तो लगता है।
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कई शिक्षकों ने बताया कि हम लोग जिनके पूरे कागज है। उनका आधार कार्ड ले जाकर खुद पैसा देकर बनवा दे रहे हैं। लेकिन जिनके पास निवास आदि नहीं है, उनका कैसे बनवाया जाए। विभाग है कि हम लोगों का वेतन अवरुद्ध करने का आदेश जारी किया है। क्षेत्र के कन्या मधुबेनिया, देवियापुर, कंपोजिट विद्यालय नंदनगर, प्राथमिक विद्यालय पिछौरा, बनकटवा, अगयाकला, भगवानपुर, नरकुल, बढय़ा, चकईजोत, महादेवा कुर्मी सहित अनेकों विद्यालय के शिक्षकों का वेतन अवरुद्ध किए जाने से शिक्षकों में रोष व्याप्त है।
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इस संबंध में शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष शैलेंद्र मिश्र का कहना है कि शिक्षक पूरी तन्मयता के साथ शिक्षण कार्य कर रहे हैं। जिन बच्चों का आधार कार्ड था उसका हो गया जिनका नहीं है। उनमें भी अनेकों लोगों का हम शिक्षकों ने प्रयास करके अनेकों बच्चों का पैसा भी देकर शिक्षकों ने आधार कार्ड बनवाया। लेकिन कुछ अभिभावक रुचि नहीं ले रहे है। आधार कार्ड बनवाने के लिए निवास सहित कई कागजात लगते हैं, उसको शिक्षक कहा से लाएं। इस प्रकार का आदेश शिक्षकों का मानसिक शोषण है।
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