फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   teachers Day

ऑनलाइन शिक्षा सही, पर यह कक्षाओं का विकल्प नहीं

Fri, 04 Sep 2020 10:33 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2020 10:33 PM IST
विज्ञापन
teachers Day
ऑनलाइन शिक्षा सही, पर यह कक्षाओं का विकल्प नहीं
विज्ञापन

बच्चों को छात्रवृत्ति के रूप में स्मार्टफोन, इंटरनेट डाटा सस्ता और सुलभ होना चाहिए
ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था का लाभ सिर्फ शहरी क्षेत्र के बच्चों को ही मिल पा रहा
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। कोरोना संकट के दौर में शैक्षणिक संस्थानों के साथ ही अभिभावकों, शिक्षकों और छात्रों के समक्ष अहम चुनौतियां है। ऑनलाइन शिक्षा एक स्वाभाविक विकल्प है। ऐसे समय में विद्यार्थियों से जुड़ना वक्त की जरूरत है, पर इस व्यवस्था को कक्षाओं में आमने-सामने दी जाने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विकल्प बताना न्याय संगत नहीं है।
सदर ब्लॉक अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय झंडेनगर के प्रधानाध्यापक नियाज अहमद कहते हैं कि कोविड-19 के कारण जारी लंबे लॉकडाउन के कारण यूं तो सभी छात्रों की स्कूली शिक्षा प्रभावित हुई है, लेकिन प्राथमिक स्तर के बच्चों पर इसका विशेष प्रभाव देखा जा रहा है। प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा आनलाइन शिक्षण हेतु व्हाट्सएप ग्रुप्स बनाकर नियमित गृहकार्य दिया तो जा रहा है, लेकिन अधिकतर अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन की सुविधा नहीं होने अथवा इंटरनेट पैक की उपलब्धता नहीं होने पर इसका लाभ नहीं मिलता दिख रहा है।
विज्ञापन

नौगढ़ ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय बेलसड़ की प्रधानाध्यापिका संतोष त्रिपाठी कहतीं हैं कि कोरोना वैश्विक महामारी का बहुत ही बुरा असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा है। नियमित स्कूल नहीं आने के कारण उनकी अनुशासित दिनचर्या भी प्रभावित हुई है। ऑनलाइन शिक्षण के लिए बच्चों का सहयोग उनके अभिभावकों द्वारा नहीं किया जाना भी निराशाजनक है। पुन: स्कूल खुलने पर शिक्षकों को दोगुनी ऊर्जा से बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जाएगा। जय किसान इंटर कॉलेज सकतपुर सनई के प्रवक्ता सच्चिदानंद शुक्ल का कहना है कि ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था का लाभ सिर्फ शहरी क्षेत्र के बच्चों को ही मिल पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्किंग समस्या के कारण बच्चों से संबंधित कई गांवों के बच्चों को एक जगह एकत्र कर शिक्षक और छात्रों से सीधा संवाद होने के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

जेकेआईसी सनई के शिक्षक बृजपाल सिंह का कहना है कि अभिभावकों की उदासीनता भी एक प्रमुख कारण है। सरकार द्वारा दूरदर्शन पर विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के प्रसारण की व्यवस्था भी की गयी है, जिसके माध्यम से भी छात्र रोचक ढंग से बहुत कुछ सीख सकते हैं, फिलहाल बच्चों का घर ही उनकी पाठशाला है। ऐसे में अभिभावकों की जागरूकता जरूरी है। बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय नौगढ़ के प्राचार्य डॉ. भारत भूषण द्विवेदी कहते हैं कि कमजोर बच्चों को छात्रवृत्ति के रूप में स्मार्टफोन दिलाने, इंटरनेट डाटा को सस्ता और सुलभ कराने, सभी विषयों का एक कोर्स वर्क तैयार करने, लाइब्रेरी के माध्यम से छात्रों को शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने, प्रत्येक विषय का व्हाट्सएप ग्रुुप बनाने, मूल्यांकन के लिए प्रश्नोत्तरी शिक्षकों की ओर से निर्मित कर व्हाट्सएप अथवा ई-मेल पर उपलब्ध कराने की जरूरत है। बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रो. उमरा जमाल कहती हैं कि कोराना महामारी की समाज में लंबे समय तक रहने की संभावना है। विद्यार्थी जीवन की सबसे बड़ी क्षति है। ऑफलाइन कक्षाएं तभी सफलता पूर्वक संचालित हो सकती हैं, जब सरकारी निर्देशों का व्यवहारिक रूप में भी शत-प्रतिशत पालन किया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed