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शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा : जांच तक सिमटी कार्रवाई, साजिशकर्ता नहीं हुए बेनकाब
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मनोज कुमार शुक्ल
भनवापुर। विकास क्षेत्र भनवापुर के विभिन्न विद्यालयों में कूटरचित अभिलेख के आधार पर नियुक्ति पाने वाले आठ जालसाज, अब भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। पिछले वर्ष सितंबर में मामला उजागर होने बाद वह नौ दो ग्यारह हो गए।
तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी ने उक्त मामले में त्रिलोकपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। चार माह से अधिक समय बीतने को हैं, लेकिन अभी तक सभी जालसाज पुलिस की पकड़ से दूर हैं।
विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि जालसाजों के केवल नियुक्ति पत्र ही नहीं फर्जी थे, बल्कि विभाग में जमा अभिलेख भी कूटरचित थे। ऐसे में विभागीय संलिप्तता का शक और गहरा हो जाता है। किसी को भी नियुक्ति पत्र देने से पहले विभाग द्वारा गठित कमेटी अभ्यर्थी के समस्त अभिलेखों की जांच करती है।
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कूटरचित अभिलेखों के कारण पुलिस जांच को सही दिशा नहीं मिल पा रही है और जालसाज भी पुलिस की पहुंच से दूर हैं।
जांच की जद में आ सकते हैं कई विभागीय लोग ः फर्जी अध्यापक नियुक्ति के कहानी की रूपरेखा विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों की संलिप्तता और सह के बगैर संभव नहीं। अभिलेखों की जांच सावधानीपूर्वक और गहनता के बाद भी यदि अभिलेख कूटरचित बताए जा रहे हैं तो तत्काल कार्रवाई न करते हुए नियुक्ति पत्र कैसे थमा दिया गया, यह सबसे बड़े यक्ष प्रश्न हंै। जिनका जवाब मिलना आवश्यक है। संवाद
र
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भनवापुर। विकास क्षेत्र भनवापुर के विभिन्न विद्यालयों में कूटरचित अभिलेख के आधार पर नियुक्ति पाने वाले आठ जालसाज, अब भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। पिछले वर्ष सितंबर में मामला उजागर होने बाद वह नौ दो ग्यारह हो गए।
तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी ने उक्त मामले में त्रिलोकपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। चार माह से अधिक समय बीतने को हैं, लेकिन अभी तक सभी जालसाज पुलिस की पकड़ से दूर हैं।
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विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि जालसाजों के केवल नियुक्ति पत्र ही नहीं फर्जी थे, बल्कि विभाग में जमा अभिलेख भी कूटरचित थे। ऐसे में विभागीय संलिप्तता का शक और गहरा हो जाता है। किसी को भी नियुक्ति पत्र देने से पहले विभाग द्वारा गठित कमेटी अभ्यर्थी के समस्त अभिलेखों की जांच करती है।
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कूटरचित अभिलेखों के कारण पुलिस जांच को सही दिशा नहीं मिल पा रही है और जालसाज भी पुलिस की पहुंच से दूर हैं।
जांच की जद में आ सकते हैं कई विभागीय लोग ः फर्जी अध्यापक नियुक्ति के कहानी की रूपरेखा विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों की संलिप्तता और सह के बगैर संभव नहीं। अभिलेखों की जांच सावधानीपूर्वक और गहनता के बाद भी यदि अभिलेख कूटरचित बताए जा रहे हैं तो तत्काल कार्रवाई न करते हुए नियुक्ति पत्र कैसे थमा दिया गया, यह सबसे बड़े यक्ष प्रश्न हंै। जिनका जवाब मिलना आवश्यक है। संवाद
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