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Siddharthnagar News: नियम सख्त, अमल ढीला... कागजों तक सिमटे डंपर सेफ्टी के कानून
Thu, 07 May 2026 02:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 07 May 2026 02:20 AM IST
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ओवरलोडिंग, फिटनेस और अनियमित ड्यूटी, हर मोर्चे पर अनदेखी
सिद्धार्थनगर। हाईवे पर तीन दिन में दो हादसों ने डंपर संचालन की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क पर दिन-रात डंपर भारी वजन लेकर दौड़ रहे हैं। अक्सर चपेट में आकर दुर्घटनाएं भी हो रही हैं, लेकिन इन पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है। जबकि नियम साफ कहते हैं कि लोडिंग से लेकर ड्राइविंग तक हर चरण में सख्त प्रोटोकॉल अनिवार्य हैं।
जानकार बताते हैं कि डंपर संचालन के लिए नियमों की कमी नहीं है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 113 साफ कहती है कि वाहन अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक भार नहीं ढो सकता। फिटनेस, परमिट, ड्राइवर के ड्यूटी घंटे....हर पहलू पर स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। इसके बावजूद सड़कों पर जो तस्वीर दिखती है, वह इन नियमों के उलट है।
जिले में बीते कुछ दिनों में हुए हादसे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि नियमों का पालन अपवाद बन गया है। ओवरलोडिंग सबसे बड़ा और सबसे आम उल्लंघन है। नियमों के अनुसार तय वजन से अधिक माल लादने पर भारी जुर्माना और वाहन सीज तक का प्रावधान है, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश डंपर अपनी क्षमता से कहीं अधिक भार लेकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। तकनीकी विशेषज्ञ दीपक सिंह बताते हैं कि इससे ब्रेकिंग सिस्टम पर दबाव, संतुलन बिगड़ना और हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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फिटनेस को लेकर भी हालात कम चिंताजनक नहीं हैं। कागजों में फिटनेस सर्टिफिकेट अपडेट दिखता है, लेकिन सड़कों पर कई डंपर ऐसे मिल जाते हैं जिनकी हालत खस्ता है। घिसे टायर, कमजोर ब्रेक और खराब लाइटिंग सिस्टम। 10 साल से पुराने वाहनों के नवीनीकरण पर सख्ती के नियम हैं, फीस भी बढ़ाई गई है, लेकिन जांच की प्रक्रिया में ढिलाई से यह प्रावधान भी असरदार नहीं हो पा रहा।
मोटर एक्ट के जानकार एडवोकेट सरफराज मलिक कहते हैं कि सबसे गंभीर मुद्दा ड्राइवर ड्यूटी आवर का है। नियम कहते हैं कि लगातार आठ घंटे से ज्यादा ड्राइविंग के बाद 30 मिनट का ब्रेक जरूरी है और साप्ताहिक सीमा भी तय है, लेकिन हकीकत में चालक लगातार 10-12 घंटे तक स्टीयरिंग संभाले रहते हैं। एक परिवहन अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, डिलीवरी का दबाव इतना होता है कि ड्राइवर आराम नहीं कर पाते। थकान सीधे हादसे में बदल जाती है।
विभागीय आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में ओवरलोडिंग और नियम उल्लंघन के हजारों चालान किए गए और कई वाहन सीज भी हुए। विशेषज्ञ मानते हैं कि कार्रवाई अधिकतर स्पॉट तक सीमित रहती है, जबकि निरंतर निगरानी का अभाव है। पुलिस और परिवहन विभाग के बीच समन्वय की कमी भी बड़ी वजह बन रही है। सड़क पर चेकिंग के दौरान एक एजेंसी सक्रिय होती है, लेकिन दूसरी की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होती। यही वजह है कि कई बार एक ही वाहन अलग-अलग जगहों से बच निकलता है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है,तकनीकी निगरानी के बिना सिर्फ मैनुअल चेकिंग से पूरी व्यवस्था को नियंत्रित करना मुश्किल है।
यही कारण है कि अब समाधान की दिशा में तकनीक को सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है। जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम के जरिये हर डंपर की रफ्तार, रूट और ठहराव पर नजर रखी जा सकती है। ऑटोमेटिक चालान सिस्टम से ओवर स्पीड और ओवरलोडिंग पर तुरंत कार्रवाई संभव है। इसके अलावा भारी वाहनों के लिए अलग लेन या तय समय (नो-एंट्री/ग्रीन कॉरिडोर) लागू करने की जरूरत भी विशेषज्ञों द्वारा लगातार उठाई जा रही है।
अधिवक्ता शेषमणि प्रजापति कहते हैं कि सवाल सिर्फ नियम बनाने का नहीं उन्हें सख्ती से लागू करने का है। जब तक सड़क पर उतरकर हर स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी। मालिक, ठेकेदार, ड्राइवर और प्रशासन तब तक हादसों का यह सिलसिला थमने वाला नहीं।
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दो दिन पहले हुई थी घटना
- सिद्धार्थनगर जनपद शिवनगर डिड़ई थाना क्षेत्र के डारीडीह निवासी नारायण तिवारी अपनी तीन वर्षीय बेटी शानवी के मुंडन संस्कार के लिए परिवार के लोगों और रिश्तेदारों के साथ तीन अलग-अलग ऑटो में सवार होकर अयोध्या धाम जा रहे थे। रुधौली थाना क्षेत्र के कोहरा गांव में कुछ रिश्तेदारों को साथ लेकर जाने के लिए सड़क किनारे रुके थे। इसी बीच रुधौली से बस्ती की तरफ जा रहा मिट्टी से लदा डंपर अनियंत्रित होकर तीनों ऑटो से जा टकराया। ऑटो में सवार दो लोगों की मौत हो गई थी।
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नियम क्या कहते हैं
- तय वजन से अधिक लोडिंग पर प्रतिबंध (धारा 113)
- फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट अनिवार्य
- 8 घंटे ड्राइविंग के बाद ब्रेक जरूरी
- पुराने वाहनों के नवीनीकरण पर सख्ती
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समाधान की राह
- सभी डंपरों में जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य
- ऑटोमेटिक चालान और स्पीड मॉनिटरिंग
- भारी वाहनों के लिए अलग लेन/रूट प्लान
- पुलिस-परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय
- नियम उल्लंघन पर त्वरित और सख्त दंड
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ओवरलोडिंग और फिटनेस उल्लंघन पर लगातार कार्रवाई चल रही है। प्रवर्तन टीमें सक्रिय हैं। नियम तोड़ने वाले डंपरों पर चालान व सीज की कार्रवाई की जा रही है, निगरानी और सख्त होगी।
- संजय सिंह, एआरटीओ- सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। हाईवे पर तीन दिन में दो हादसों ने डंपर संचालन की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क पर दिन-रात डंपर भारी वजन लेकर दौड़ रहे हैं। अक्सर चपेट में आकर दुर्घटनाएं भी हो रही हैं, लेकिन इन पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है। जबकि नियम साफ कहते हैं कि लोडिंग से लेकर ड्राइविंग तक हर चरण में सख्त प्रोटोकॉल अनिवार्य हैं।
जानकार बताते हैं कि डंपर संचालन के लिए नियमों की कमी नहीं है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 113 साफ कहती है कि वाहन अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक भार नहीं ढो सकता। फिटनेस, परमिट, ड्राइवर के ड्यूटी घंटे....हर पहलू पर स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। इसके बावजूद सड़कों पर जो तस्वीर दिखती है, वह इन नियमों के उलट है।
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जिले में बीते कुछ दिनों में हुए हादसे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि नियमों का पालन अपवाद बन गया है। ओवरलोडिंग सबसे बड़ा और सबसे आम उल्लंघन है। नियमों के अनुसार तय वजन से अधिक माल लादने पर भारी जुर्माना और वाहन सीज तक का प्रावधान है, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश डंपर अपनी क्षमता से कहीं अधिक भार लेकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। तकनीकी विशेषज्ञ दीपक सिंह बताते हैं कि इससे ब्रेकिंग सिस्टम पर दबाव, संतुलन बिगड़ना और हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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फिटनेस को लेकर भी हालात कम चिंताजनक नहीं हैं। कागजों में फिटनेस सर्टिफिकेट अपडेट दिखता है, लेकिन सड़कों पर कई डंपर ऐसे मिल जाते हैं जिनकी हालत खस्ता है। घिसे टायर, कमजोर ब्रेक और खराब लाइटिंग सिस्टम। 10 साल से पुराने वाहनों के नवीनीकरण पर सख्ती के नियम हैं, फीस भी बढ़ाई गई है, लेकिन जांच की प्रक्रिया में ढिलाई से यह प्रावधान भी असरदार नहीं हो पा रहा।
मोटर एक्ट के जानकार एडवोकेट सरफराज मलिक कहते हैं कि सबसे गंभीर मुद्दा ड्राइवर ड्यूटी आवर का है। नियम कहते हैं कि लगातार आठ घंटे से ज्यादा ड्राइविंग के बाद 30 मिनट का ब्रेक जरूरी है और साप्ताहिक सीमा भी तय है, लेकिन हकीकत में चालक लगातार 10-12 घंटे तक स्टीयरिंग संभाले रहते हैं। एक परिवहन अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, डिलीवरी का दबाव इतना होता है कि ड्राइवर आराम नहीं कर पाते। थकान सीधे हादसे में बदल जाती है।
विभागीय आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में ओवरलोडिंग और नियम उल्लंघन के हजारों चालान किए गए और कई वाहन सीज भी हुए। विशेषज्ञ मानते हैं कि कार्रवाई अधिकतर स्पॉट तक सीमित रहती है, जबकि निरंतर निगरानी का अभाव है। पुलिस और परिवहन विभाग के बीच समन्वय की कमी भी बड़ी वजह बन रही है। सड़क पर चेकिंग के दौरान एक एजेंसी सक्रिय होती है, लेकिन दूसरी की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होती। यही वजह है कि कई बार एक ही वाहन अलग-अलग जगहों से बच निकलता है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है,तकनीकी निगरानी के बिना सिर्फ मैनुअल चेकिंग से पूरी व्यवस्था को नियंत्रित करना मुश्किल है।
यही कारण है कि अब समाधान की दिशा में तकनीक को सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है। जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम के जरिये हर डंपर की रफ्तार, रूट और ठहराव पर नजर रखी जा सकती है। ऑटोमेटिक चालान सिस्टम से ओवर स्पीड और ओवरलोडिंग पर तुरंत कार्रवाई संभव है। इसके अलावा भारी वाहनों के लिए अलग लेन या तय समय (नो-एंट्री/ग्रीन कॉरिडोर) लागू करने की जरूरत भी विशेषज्ञों द्वारा लगातार उठाई जा रही है।
अधिवक्ता शेषमणि प्रजापति कहते हैं कि सवाल सिर्फ नियम बनाने का नहीं उन्हें सख्ती से लागू करने का है। जब तक सड़क पर उतरकर हर स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी। मालिक, ठेकेदार, ड्राइवर और प्रशासन तब तक हादसों का यह सिलसिला थमने वाला नहीं।
दो दिन पहले हुई थी घटना
- सिद्धार्थनगर जनपद शिवनगर डिड़ई थाना क्षेत्र के डारीडीह निवासी नारायण तिवारी अपनी तीन वर्षीय बेटी शानवी के मुंडन संस्कार के लिए परिवार के लोगों और रिश्तेदारों के साथ तीन अलग-अलग ऑटो में सवार होकर अयोध्या धाम जा रहे थे। रुधौली थाना क्षेत्र के कोहरा गांव में कुछ रिश्तेदारों को साथ लेकर जाने के लिए सड़क किनारे रुके थे। इसी बीच रुधौली से बस्ती की तरफ जा रहा मिट्टी से लदा डंपर अनियंत्रित होकर तीनों ऑटो से जा टकराया। ऑटो में सवार दो लोगों की मौत हो गई थी।
नियम क्या कहते हैं
- तय वजन से अधिक लोडिंग पर प्रतिबंध (धारा 113)
- फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट अनिवार्य
- 8 घंटे ड्राइविंग के बाद ब्रेक जरूरी
- पुराने वाहनों के नवीनीकरण पर सख्ती
समाधान की राह
- सभी डंपरों में जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य
- ऑटोमेटिक चालान और स्पीड मॉनिटरिंग
- भारी वाहनों के लिए अलग लेन/रूट प्लान
- पुलिस-परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय
- नियम उल्लंघन पर त्वरित और सख्त दंड
ओवरलोडिंग और फिटनेस उल्लंघन पर लगातार कार्रवाई चल रही है। प्रवर्तन टीमें सक्रिय हैं। नियम तोड़ने वाले डंपरों पर चालान व सीज की कार्रवाई की जा रही है, निगरानी और सख्त होगी।
- संजय सिंह, एआरटीओ- सिद्धार्थनगर