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Siddharthnagar News: सीमावर्ती इलाकों में ठाैर..फिर करते हैं सीमा पार

Sun, 22 Mar 2026 01:03 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 22 Mar 2026 01:03 AM IST
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Stay in the border areas, then cross the border
सिद्धार्थनगर। अपराध करके नेपाल भागना नया नहीं है लेकिन अब इसका तरीका बदल गया है। यही यूपी पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन रही है। तराई बेल्ट के हालिया मामलों में एक पैटर्न साफ दिख रहा है।
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वारदात के बाद आरोपी सीधे बॉर्डर नहीं भागते, बल्कि पहले 24 घंटे लो प्रोफाइल में रहते हैं, डिजिटल ट्रेस से बचते हैं। फिर तय नेटवर्क के जरिए 48-72 घंटे में सीमा पार कर जाते हैं।
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विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर टेक्नोलॉजी, लोकल इंटेलिजेंस और भारत-नेपाल के बीच रियल टाइम कोऑर्डिनेशन नहीं बढ़ा तो यह ट्रेंड आने वाले समय में और खतरनाक हो सकता है। यह सिर्फ सीमावर्ती जिलों का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था का सवाल बन चुका है।
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हाल के कई मामलों में पाया गया कि अपराधी सीधे नेपाल पहुंचने के बजाय 24 से 72 घंटे सीमावर्ती क्षेत्रों में इधर-उधर रहकर बॉर्डर पार करते हैं। क्राइम ब्रांच के अधिकारी बताते हैं कि अब वारदात के तुरंत बाद मोबाइल बंद कर दिया जाता है।
आरोपी 10-20 किमी के दायरे में किसी गांव या परिचित के यहां छिपते हैं और 12-24 घंटे तक वहीं रहते हैं। इस दौरान सिम बदलना या दूसरे फोन से सीमित संपर्क करना आम हो गया है, ताकि टेक्निकल ट्रैकिंग भटक जाए।
इसके बाद मूवमेंट एक ही बार में नहीं, बल्कि 2-3 स्टेज में होता है। लोकेशन बदलते हुए धीरे-धीरे बॉर्डर के करीब पहुंचा जाता है।
ट्रैकिंग तोड़ने को नई तरकीब : अभ्यस्त अधिकारियों ने अपने अलग नेटवर्क को सक्रिय कर रखा है। जेल से छूटे एक अपराधी ने बताया कि सीमा के नजदीक पहुंचते ही लोकल नेटवर्क सक्रिय हो जाता है।

सीमाई इलाकों में ऐसे फिक्सर मौजूद होते हैं, जो पगडंडी, खेत-मेड़ या नदी किनारे के अनौपचारिक रास्तों से पार कराने में मदद करते हैं। टाइमिंग भी तय होती है। ज्यादातर मूवमेंट देर रात या भोर में, जब पेट्रोलिंग का गैप होता है। नेपाल पहुंचते ही आरोपी तुरंत दूसरी लोकेशन शिफ्ट कर लेते हैं, ताकि शुरुआती ट्रैकिंग पूरी तरह टूट जाए।
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