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Siddharthnagar News: मंत्रोच्चार के बीच श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति

Sun, 18 May 2025 11:26 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 18 May 2025 11:26 PM IST
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Srimad Bhagwat Katha's completion amidst chanting of mantras
भवानीगंज क्षेत्र के भानपुर मस्जिदिया में कलश यात्रा निकालती महिलाएं। स्रोत विज्ञ​प्ति
सकारपार। क्षेत्र के सिसहनिया गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति विधि विधान से की गई। विद्वानों के वैदिक मंडली ने मुख्य यजमान विंदा देवी से मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ हवन कुंड में पूर्णाहुति कराई। कथावाचक आचार्य पं. सत्य प्रकाश पांडेय ने संगीतमय कथा से श्रद्धालुओं को धार्मिक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से प्राणी को मोक्ष मिलती है। श्रीमद्भागवत कथा प्राणी के द्वारा किए गए पापों को नष्ट करता है और उनका उद्धार करता है। पूर्णाहुति के बाद क्षेत्रवासियों ने प्रसाद ग्रहण किया। संवाद
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श्रीमद्भागवत कथा व मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा पर निकाली कलश यात्रा

बिस्कोहर। ग्राम पंचायत झुड़िया में नवनिर्मित मंदिर में दुर्गा माता मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा व नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा शुभारंभ पर कलश यात्रा निकाली गई। कथा वाचक राजेंद्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि जब हम देवों से सघन सानिध्य स्थापित करेंगे तो धरती पर सभी चीजें स्वाभाविक हो जाएंगी। कलश में 33 कोटि देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं। कलश यात्रा बलुआ, मुड़ीला चंदनराय, पेंडारी, कठोतिया रामनाथ, कोहड़ौरा व बिस्कोहर नगर होते हुए बूढ़ी राप्ती नदी पर सोहन घाट पहुंची। यहां यज्ञाचार्य राम वचन मिश्र के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जल भरा गया। इस अवसर पर आयोजक हीरालाल मौर्या, श्याम सुंदर मौर्या, कैलाश देवी, बलराम मौर्या, कृष्णा, शिवा, शत्रुहन मिश्र आदि मौजूद रहे।
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ध्रुव व विदुर चरित्र का प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

शाहपुर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के बेनीनगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार की रात कथा वाचक पं. राकेश शास्त्री ने ध्रुव व विदुर चरित्र की कथा का प्रसंग सुनाया। कहा कि अगर ध्रुव पांच साल की उम्र में भगवान को पा सकते हैं, तो फिर हम कैसे पिछड़ सकते हैं। अगर सच्चे मन से भगवान की भक्ति की जाए, तो भगवान खुद अपने भक्तों से मिलने पहुंच जाते हैं। कथा के दौरान झांकियां भी सजाई गईं। विदुर प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम की व्याकुलता के बारे में उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण विदुरजी की कुटिया में भोजन करने गए और वहां केले के छिलकों का भोग स्वीकारा। इससे पहले वे दुर्योधन के महल में छप्पन भोग का त्याग कर आए थे। इस दौरान यजमान सीताराम मिश्र, सरिता, सुमन, कुसुम, अभिषेक, शुभम, दिलीप आदि मौजूद रहे। संवाद
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मनुष्य सभी जगहों से मन हटा कर भगवान में ध्यान लगाए
सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ क्षेत्र के खैरा बाजार गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक पंडित सर्वजीत मिश्र ने कहा कि व्यक्ति सभी जगह से मन हटा कर भगवान में ध्यान लगाए। इससे मोक्ष की प्राप्ति होगी।
कथावाचक ने कहा कि महात्मा विदुर की पत्नी का नाम पारसंवी था। पारसंवी का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति प्रेम था। महात्मा विदुर हस्तिनापुर के मंत्री होने के साथ साथ आदर्श भगवद्भक्त, उच्च कोटि के साधु और स्पष्टवादी थे। यही कारण था कि दुर्योधन उनसे सदा नाराज ही रहा करता था और समय असमय उनकी निंदा करता रहता था। हस्तिनापुर के प्रधानमंत्री होने के बाद भी उनका रहन-सहन एक संत की ही तरह था। श्रीकृष्ण में उनकी अनुपम प्रीति थी। इनकी धर्मपत्नी पारसंवी भी परम साध्वी थीं। भगवान श्रीकृष्ण जब दूत बनकर संधि प्रस्ताव लेकर हस्तिनापुर पधारे, तब दुर्योधन ने उनके संधि प्रस्ताव को अस्वीकार करने के उपरांत उन्हें रात्रि विश्राम और भोजन आदि करने को कहा। श्रीकृष्ण ने इसे अस्वीकार कर दिया। कहा कि हे दुर्योधन किसी का आतिथ्य स्वीकार करने के तीन कारण होते हैं। भाव, प्रभाव और अभाव, अर्थात तुम्हारा ऐसा भाव नहीं है, जिसके वशीभूत तुम्हारा आतिथ्य स्वीकार किया जाए। इस दौरान कमला श्रीवास्तव, बालेश्वरी श्रीवास्तव, महेंद्र प्रताप, रवेंद्र प्रताप, धीरेंद्र, संतोष, अभिषेक, उमंग, तरंग, देवांश, अराध्या मौजूद रहीं।
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कलश यात्रा में उमड़ पड़ा श्रद्धालुओं की भीड़
डुमरियागंज। नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड नंबर चार रामनगर बनगवा बरई में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ के पहले रविवार को कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा बनगवा बरई से बैदौला चौराहा, मंदिर चौराहा, खीरामंडी होते हुए राप्ती नदी तट के लिए रवाना हुई। पंडित लवकुश मिश्रा ने पूजन कराया। श्रद्धालुओं ने राप्ती नदी से जल भरा और कार्यक्रम स्थल पहुंचे। जहां वैदिक मंत्रोचार के बीच कलश स्थापना के बाद शाम को कथा का शुभारंभ हुआ। इस दौरान रामदास प्रजापति, अनिल प्रजापति, सोमई, राम प्रकाश, विक्रम, गंगेश, विवेक आदि मौजूद रहे। संवाद
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प्रभु की भक्ति से बढ़कर कोई और सुख संपदा नहीं

औराताल। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम संगवार में श्रीमद्भागवत में कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं, लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। कथा व्यास विक्रमा प्रसाद मिश्र ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। इसके बदले प्रकृति ने मानव का रक्षण किया। भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है वह हर किसी में बसता है। उन्होंने कहा कि इसमें तीन मुख्य संवाद हैं। नारद और भक्ति संवाद। सनत कुमार और नारद संवाद व गोकर्ण और धुंधकारी संवाद। इसके माध्यम से भागवत कथा की महिमा का विस्तार किया गया है। कथा पंडाल में मुख्य यजमान चिखुरी प्रसाद, राजाराम, राजू, कैलाश सिंह, अनिल सिंह सहित भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। संवाद

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कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का हुआ शुभारंभ

भवानीगंज। भानपुर मस्जिदिया में रविवार को कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। कलश यात्रा कार्यक्रम स्थल से भानपुररानी, नगहिया भैसहिया होते हुए राजा फॉर्म कुआनो नदी के तट पर पहुंची। जहां कथा व्यास नंदलाल महाराज वैदिक आचार्य, आशीर्वाद तिवारी अयोध्या धाम ने मंत्रोच्चार के साथ कलश में जल भरवाया। कलश यात्रा में शामिल महिलाएं, बच्चे के द्वारा लगाए गए जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। इस दौरान रामपत चौरसिया, घनश्याम चौरसिया, बहादुर चौरसिया, रामसुरेश विश्वकर्मा, संचित चौरसिया, श्रीराम शर्मा आदि मौजूद रहे। संवाद
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