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सौगात मांग रहीं खेल प्रतिभाएं
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 28 May 2017 11:07 PM IST
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खेलकूद व युवा कल्याण मंत्री चेतन चौहान के आगमन की तैयारियों को लेकर स्टेडियम की सफाई करते मजदूर।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। सूबे के युवा कल्याण व खेल मंत्री चेतन चौहान आज पहली बार जिले में आ रहे हैं। बतौर प्रभारी मंत्री वह जिला योजना की बैठक में शामिल होंगे। प्रभारी मंत्री के आगमन से जहां जिले के विकास की आशाएं प्रबल हैं, वहीं, खेल प्रतिभाओं में भी खासा उत्साह है। ग्रामीण क्षेत्र में पनप रहीं युवा खेल प्रतिभाओं को अरसे से समुचित मार्गदर्शन का इंतजार है। अपनी प्रतिभा निखारकर वह खेलों में बुद्ध भूमि का नाम दुनिया में रोशन करना चाहते हैं, मगर संसाधनों का अभाव और प्रोत्साहन की कमी उनके पांव में बेड़ियां बनी हुई हैं। लिहाजा मंत्री के आगमन से उनमें उम्मीद जगी है। बुद्ध भूमि पर प्रतिभाओं की कमी नहीं है। कई अवसरों पर वह देश-प्रदेश स्तर पर अपनी क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं। मगर उन्हें अनुकूल माहौल देने के लिए सार्थक प्रयासों का अभाव रहा है।
युवा कल्याण विभाग के हाल पर गौर करें तो पूरे जिले में विभाग के पास एक भी ग्रामीण स्टेडियम ही नहीं है। क्रीड़ाश्री की योजना वर्षों पहले बंद हो चुकी है। स्टेडियम और प्रशिक्षक के अभाव में ग्रामीण स्तर पर आयोजन भी ठप हैं। ऐसे में गांवों से प्रतिभाएं बाहर नहीं निकल पा रहीं। युवा नंगे पांव डामर की सड़क पर दौड़ लगाने को मजबूर हैं तो खेत-खलिहान में पिच और अखाड़े बनाकर क्रिकेट, कबड्डी-कुश्ती खेल रहे हैं। जिला स्तर पर स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम का हाल भी खस्ता है। स्टेडियम में कोई कोच ही नहीं है। ताइक्वाडो जिला खेल अधिकारी के भरोसे है तो हैंडबाल उप जिला खेल अधिकारी के सहारे। क्रिकेट, वॉलीबाल, कुश्ती, कबड्डी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बास्केटबाल, हॉकी जैसे खेलों के लिए यहां कोई इंतजाम नहीं। पिछले सात माह से स्टेडियम ग्राउंड पर निर्माण कार्य के चलते सारी गतिविधियां ठप है। खुद के बूते खेल के इच्छुक खिलाड़ियों को अन्य ठौर तलाशना पड़ रहा है।
जिला खेल अधिकारी राजकुमार का कहना है कि खिलाड़ियों की बेहतरी के लिए ही स्टेडियम का कायाकल्प हो रहा है। जल्द ही यह काम पूरा हो जाएगा। कोच की तैनाती के लिए पत्र भेजा गया है। निदेशालय से शीघ्र ही विभिन्न खेलों के कोच की तैनाती होनेे वाली है।
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युवा कल्याण विभाग के हाल पर गौर करें तो पूरे जिले में विभाग के पास एक भी ग्रामीण स्टेडियम ही नहीं है। क्रीड़ाश्री की योजना वर्षों पहले बंद हो चुकी है। स्टेडियम और प्रशिक्षक के अभाव में ग्रामीण स्तर पर आयोजन भी ठप हैं। ऐसे में गांवों से प्रतिभाएं बाहर नहीं निकल पा रहीं। युवा नंगे पांव डामर की सड़क पर दौड़ लगाने को मजबूर हैं तो खेत-खलिहान में पिच और अखाड़े बनाकर क्रिकेट, कबड्डी-कुश्ती खेल रहे हैं। जिला स्तर पर स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम का हाल भी खस्ता है। स्टेडियम में कोई कोच ही नहीं है। ताइक्वाडो जिला खेल अधिकारी के भरोसे है तो हैंडबाल उप जिला खेल अधिकारी के सहारे। क्रिकेट, वॉलीबाल, कुश्ती, कबड्डी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बास्केटबाल, हॉकी जैसे खेलों के लिए यहां कोई इंतजाम नहीं। पिछले सात माह से स्टेडियम ग्राउंड पर निर्माण कार्य के चलते सारी गतिविधियां ठप है। खुद के बूते खेल के इच्छुक खिलाड़ियों को अन्य ठौर तलाशना पड़ रहा है।
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जिला खेल अधिकारी राजकुमार का कहना है कि खिलाड़ियों की बेहतरी के लिए ही स्टेडियम का कायाकल्प हो रहा है। जल्द ही यह काम पूरा हो जाएगा। कोच की तैनाती के लिए पत्र भेजा गया है। निदेशालय से शीघ्र ही विभिन्न खेलों के कोच की तैनाती होनेे वाली है।
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