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संवरेंगे स्तंभ, पहचान होगी पुख्ता
अमर उजाला ब्यूरो/ सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 02 Dec 2015 11:20 PM IST
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तनाव और तकरार के माहौल के बीच भारत, नेपाल ने सीमाओं की पहचान को पुख्ता करने के प्रयास फिर तेज कर दिए हैं। दोनों देशों की ओर से नो मेंस लैंड एरिया में लगे पिलरों (सीमा स्तंभ) के संयुक्त सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुराने मानचित्र के आधार पर सीमा निर्धारित कर नए पिलरों की स्थापना और पुराने की मरम्मत का कार्य किया जाएगा। इस बारे में जल्द ही दोनों देशों के सीमावर्ती जिलों के अधिकारी बैठक कर सर्वेक्षण कार्य को अंतिम रूप देंगे। नो मेंस लैंड एरिया में दोनों देशों की ओर से संयुक्त पिलर स्थापित किए गए हैं।
यह पिलर ही अंतर्राष्ट्रीय बार्डर को इंगित करते हैं। काफी समय से सही देखरेख न होने से बार्डर के कई स्थानों पर लगे पिलर क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
कुछ जगहों के पिलर पूरी तरह ध्वस्त हैं। तस्कर और शरारती तत्व इसका भरपूर लाभ उठा रहे हैं। पिलरों के अभाव में सीमा की पहचान स्पष्ट न होने से सुरक्षा बलों को निगरानी में भी दिक्कतें आती रही हैं। दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे पर प्रतिबंधित क्षेत्र में अतिक्रमण की शिकायतें भी की जाती रही हैं।
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तनाव की मौजूदा स्थिति में तस्करी और आपराधिक गतिविधियां बढ़ने के बाद इन पिलरों को फिर से सुदृढ़ बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है।
इसके लिए सीमा स्तंभ और सीमा मापन की टीम भी आ चुकी है। सर्वे की अन्य औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, अब इसे अंतिम रूप देने के लिए जल्द ही दोनों देशों के सीमावर्ती जिलों के पुलिस-प्रशासन और सुरक्षा बलों के अधिकारी संयुक्त बैठक कर फैसला लेंगे।
पहले यह बैठक 3 दिसंबर को नेपाल के भैरहवां में बुलाई गई थी, मगर प्रदेश में चल रहे पंचायत चुनावों के चलते इसे 15 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। जिलाधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि भारत-नेपाल की सीमा पर पिलर लगाने के लिए सर्वेक्षण कार्य सम्बन्धी बैठक 3 दिसंबर को बुलाई गई थी। पंचायत चुनाव के कारण बैठक का आयोजन संभव नहीं है। लिहाजा नई तिथि घोषित करने को कहा गया है।
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पुराने मानचित्र के आधार पर सीमा निर्धारित कर नए पिलरों की स्थापना और पुराने की मरम्मत का कार्य किया जाएगा। इस बारे में जल्द ही दोनों देशों के सीमावर्ती जिलों के अधिकारी बैठक कर सर्वेक्षण कार्य को अंतिम रूप देंगे। नो मेंस लैंड एरिया में दोनों देशों की ओर से संयुक्त पिलर स्थापित किए गए हैं।
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यह पिलर ही अंतर्राष्ट्रीय बार्डर को इंगित करते हैं। काफी समय से सही देखरेख न होने से बार्डर के कई स्थानों पर लगे पिलर क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
कुछ जगहों के पिलर पूरी तरह ध्वस्त हैं। तस्कर और शरारती तत्व इसका भरपूर लाभ उठा रहे हैं। पिलरों के अभाव में सीमा की पहचान स्पष्ट न होने से सुरक्षा बलों को निगरानी में भी दिक्कतें आती रही हैं। दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे पर प्रतिबंधित क्षेत्र में अतिक्रमण की शिकायतें भी की जाती रही हैं।
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तनाव की मौजूदा स्थिति में तस्करी और आपराधिक गतिविधियां बढ़ने के बाद इन पिलरों को फिर से सुदृढ़ बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है।
इसके लिए सीमा स्तंभ और सीमा मापन की टीम भी आ चुकी है। सर्वे की अन्य औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, अब इसे अंतिम रूप देने के लिए जल्द ही दोनों देशों के सीमावर्ती जिलों के पुलिस-प्रशासन और सुरक्षा बलों के अधिकारी संयुक्त बैठक कर फैसला लेंगे।
पहले यह बैठक 3 दिसंबर को नेपाल के भैरहवां में बुलाई गई थी, मगर प्रदेश में चल रहे पंचायत चुनावों के चलते इसे 15 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। जिलाधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि भारत-नेपाल की सीमा पर पिलर लगाने के लिए सर्वेक्षण कार्य सम्बन्धी बैठक 3 दिसंबर को बुलाई गई थी। पंचायत चुनाव के कारण बैठक का आयोजन संभव नहीं है। लिहाजा नई तिथि घोषित करने को कहा गया है।