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Siddharthnagar News: मझाैली सागर की लहरें लेकर आएंगी पर्यटन विकास

Sat, 29 Nov 2025 11:11 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 29 Nov 2025 11:11 PM IST
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Siddharthnagar News: The waves of Majhauli Sagar will bring tourism development
कपिलवस्तु क्षेत्र में ​स्थित मझौली सागर। संवाद
सिद्धार्थनगर। नेपाल बॉर्डर पर स्थित की मझौली सागर की दिशा और दशा जल्द ही बदल जाएगी। लगभग 10 हजार बीघा में फैले विशाल जल क्षेत्र को टूरिज्म के नक्शे पर लाने के लिए प्रदेश सरकार की नई पर्यटन नीति के तहत इसका चयन कर लिया गया है।
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प्रदेश के कई सागर और झील को विकसित करने के साथ मझौली सागर भी इको टूरिज्म की लिस्ट में शामिल कर लिया गया है। इससे इको टूरिज्म के नए केंद्र के रूप में इसकी नई पहचान बनेगी। विकास के बाद यह क्षेत्र न सिर्फ भारत-नेपाल सीमा पर आने-जाने वाले पर्यटकों को आकर्षित करेगा बल्कि अब तक तस्करी के हॉट स्पॉट रहे, इस इलाके में सुरक्षा चौकसी बढ़ने से अवैध गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी।
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नेपाल बॉर्डर पर कई सागर और झील हैं जो लंबे समय से उपेक्षा के शिकार हैं। तत्कालीन जिलाधिकारी डाॅ. राजा गणपति आर ने इन्हें इको टूरिज्म के तौर पर विकसित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। उन्होंने सागर को देखने के बाद इस पर पहल शुरू की थी। सीमा से सटे मझौली सागर को कई वर्षों से विकास की दरकार थी। मौजूदा ताल का प्राकृतिक स्वरूप और विशाल जल क्षेत्र इसे पर्यटन की दृष्टि से बेहद संभावनाशील बनाता है।
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प्रशासन ने प्रदेश के अन्य जनपदों की तर्ज पर यहां वेटलैंड आधारित इको-टूरिज्म विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया, जिस पर शासन ने हरी झंडी दे दी है। अब यहां ऐसे प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे जो प्राकृतिक सौंदर्य को संरक्षित रखते हुए पर्यटक सुविधाओं को बढ़ाएंगे। अनुमान है कि विकास के बाद भारत के साथ-साथ नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने और पक्षी अवलोकन के लिए आएंगे।
इको टूरिज्म बनने के बाद टूटेगा तस्करी का नेटवर्क: मझौली सागर और उसके आसपास का क्षेत्र वर्षों से तस्करों के लिए मुफीद माना जाता था। सागर के अस्तित्व में आने से यहां पर चहल-पहल बढ़ेगी। सुरक्षा कर्मी अलर्ट मोड में रहेंगे। इससे तस्करों की कमर टूटेगी और तस्करी के लिए सेफ जोन माने जाने वाला इलाका बदनामी के धब्बा से मुक्त होगा।
पर्यावरणीय महत्व: वेटलैंड बनने से मिलेगा प्रकृति को संबल, प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाना मिलेगा और ठंड के सीजन में लंबे समय तक रहेंगे। दुर्लभ जलीय प्रजातियों का संरक्षण होगा। उनका अस्तित्वबचेगा। आसपास के भू-जल स्तर में सुधार होगा। हरियाली बढ़ने से तापमान नियंत्रण में रहेगा और समय पर बारिश होगी। हवा साफ रहेगी।
स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार : परियोजना से सीधे जुड़े आय के अवसर मिलेगा। इसमें नाव संचालन और गाइड सेवा, पर्यटक दुकानों व फूड स्टॉल की बढ़ोतरी, जिसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी। जब यहां रोजगार मिलेगा तो बाहर नहीं जाना पड़ेगा। होमस्टे व गेस्ट हट में रोजगार, स्थानीय मछुआरा समुदाय की आय में वृद्धि होगी।
नेपाल बॉर्डर का फायदा: सीमा पर होने से बढ़ेगा ट्रैवल फुटफॉल, सिद्धार्थनगर-कपिलवस्तु क्षेत्र के लोगों की आसान पहुंच हो जाएगी। नेपाल से धार्मिक और पारिवारिक पर्यटक आएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा। भारत-नेपाल सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। सीमा पार व्यापारियों के लिए नया आकर्षण स्थल बनेगा।

नहीं सिकुड़ेगा ताल का दायरा: सालों से उपेक्षित ताल के सामने बड़ी चुनौतियां थीं। इसमें गाद भराव से जलक्षेत्र सिकुड़ रहा था। सफाई के अभाव में कई हिस्से दलदल में बदल गए थे। चरागाह बनने से धीरे-धीरे खत्म हो रहा था प्राकृतिक स्वरूप। रात में अंधेरा के कारण अवैध गतिविधियां तेजी से बढ़ती थी।
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