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Siddharthnagar News: राप्ती तट पर एक माह रहेगा मेले का उल्लास

Fri, 02 Jan 2026 11:37 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 02 Jan 2026 11:37 PM IST
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Siddharthnagar News: The joy of the fair will continue for a month on the banks of Rapti
बांसी। कस्बे के राप्ती नदी तट पर लगने वाले माघ मेला शुरू हो गईं हैं। माघ मेला मौनी अमावस्या नहान से शुरू होकर शिवरात्रि के बाद तक चलता है। बांसी कस्बे में लगने वाले इस मेले की शुरुआत वर्ष 1954 में पं. राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने की थी। तभी से यह चलता आ रहा है।
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राजेंद्र नाथ त्रिपाठी स्काउट से जुड़े हुए थे। उसी दौरान वह प्रयाग माघ मेला गए थे, जहां से उन्हें बांसी में भी मेला लगाने की प्रेरणा मिली। इसके बाद वह मेला लगाने की उधेड़बुन में लग गए। उन्होंने कला अध्यापक मोतीलाल आर्य, ग्राम प्रधान रामशंकर, पूर्व प्रधान महादेव प्रसाद, बच्चा गनेश प्रसाद, हजारी प्रसाद, फूलचंद्र इंस्पेक्टर समेत कस्बे के प्रतिष्ठित लोगों से बात की और उन्हें सहयोग का आश्वासन मिला। इसके बाद उन्होंने मेले में शामिल होने वाले प्रदेशभर के प्रमुख दुकानदारों से मिलकर उन्हें बांसी माघ मेला आने के लिए आमंत्रित किया। मेले की शुरुआत 1954 में हुई। पहले यह मेला तीन दिन, फिर एक सप्ताह उसके बाद 15 दिन तक चलने लगा। बाद में यह अवधि बढ़कर एक माह हो गई।
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वर्तमान में माघ मेला बांसी का संचालन आदर्श नगर पालिका परिषद बांसी कर रही है, जिसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं । नगर पालिका अध्यक्ष चमन आरा राईनी ने बताया कि इस वर्ष प्राचीन माघ मेले की 72वीं वर्षगांठ है। बांसी के प्राचीन राप्ती नदी के तट पर प्रति वर्ष मौनी अमावस्या के पर्व पर लगने वाला यह ‘माघ मेला और प्रदर्शनी’ विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ लगभग एक माह तक चलता है। जहां सुरक्षा की दृष्टिकोण से थाना और मेला नियंत्रण कक्ष की स्थापना की जाती है। मेले के सफल संचालन के लिए नगर पालिका के कर्मचारियों सहित सभासदों को भी जिम्मेदारी सौंपी जाती हैं। मेला मैदान व सड़कों की सफाई का काम तेजी से कराया जा रहा है। मेले में दुकानों, विभिन्न प्रकार के झूला का आगमन शुरू हो गया है।
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जयपुर की चूड़ी की अधिक मांग

मेले में देश के विभिन्न महानगरों से दुकानदार आते हैं। लोग खूब खरीदारी करते हैं। इस मेले में शाहजहांपुर और जयपुर की चूड़ियां, मुरादाबाद के पीतल के सामान, सहारनपुर और बहराइच के लकड़ी के सामान, बुलंदशहर का प्रसिद्ध खजला, दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, संभल, सीतापुर, बिहार सहित विभिन्न प्रांतों और महानगरों से घरेलू उपयोग के सामान की दुकान आती है, जहां दूर-दराज से आकर लोग खरीदारी करते हैं।
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