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Siddharthnagar News: फर्जीवाड़ा कर वारिस बने आरोपियों ने बेच दी पीड़ित की भूमि
Fri, 09 Jan 2026 11:41 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 09 Jan 2026 11:41 PM IST
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सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के चंदई निवासी द्वारिका को फर्जीवाड़ा करते हुए मृत दिखा वारिस बने चचेरे भाइयों के परिजनों ने उसकी भूमि भी बेच दी। मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर 11 लोगों पर धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। पीड़ित के पुत्र उमेश प्रताप का कहना है कि धोखाधड़ी कर नाम दर्ज कराने के बाद आरोपियों ने उनकी पैतृक 18 बीघा भूमि में 13 बीघा भूमि की बिक्री कर दी, अब मौके पर मात्र पांच बीघा भूमि बची है। शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के चंदई गांव निवासी द्वारिका वर्तमान में अपनी मौसी के यहां बलरामपुर जिले के पचपेड़वा कस्बा के मध्य नगर, बसंतपुर पुरानी बाजार में रहते हैं। उसके पिता सकठू और बिंदेश्वरी और उनके बेटे गोकुल ग्राम चंदई, थाना क्षेत्र शोहरतगढ़ के मूल निवासी हैं। पिता की मौत के बाद उत्तराधिकारी के तौर पर संपत्ति पर उसका नाम दर्ज हो गया था, जिस पर प्रार्थी काबिज है।
उसके चाचा बिंदेश्वरी के पुत्र रामपाल, रामविलास, रामानन्द, शिववालक, रामसजीवन थे। चचेरे भाइयों ने उसे मृत दिखाकर 14 मार्च 1992 में उसकी समस्त आराजी पर बतौर वारिस (चचेरा भाई) बनकर अपना नाम भूलेख और राजस्व अभिलेखों में दर्ज करवा लिया।
जनवरी 2024 में उसकी पत्नी की तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसके लिए उसे पैसे की आवश्यकता हुई तो उसने संपत्ति को बेचने के उद्देश्य से खतौनी निकाल कर मुआयना किया तो समस्त आराजी पर चचेरे भाइयों का नाम पाया जबकि वह अभी जिंदा है। उनके वारिसानों के नाम रामरती, राम प्रसाद, रामनिवास, बालकृष्ण, सुग्रीव, भागदेई, राम पाल, अर्जुन, सुलेखा, मोहन, रामानंद का राजस्व अभिलेखों में दर्ज करा दिया गया।
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उसके चाचा बिंदेश्वरी के पुत्र रामपाल, रामविलास, रामानन्द, शिववालक, रामसजीवन थे। चचेरे भाइयों ने उसे मृत दिखाकर 14 मार्च 1992 में उसकी समस्त आराजी पर बतौर वारिस (चचेरा भाई) बनकर अपना नाम भूलेख और राजस्व अभिलेखों में दर्ज करवा लिया।
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जनवरी 2024 में उसकी पत्नी की तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसके लिए उसे पैसे की आवश्यकता हुई तो उसने संपत्ति को बेचने के उद्देश्य से खतौनी निकाल कर मुआयना किया तो समस्त आराजी पर चचेरे भाइयों का नाम पाया जबकि वह अभी जिंदा है। उनके वारिसानों के नाम रामरती, राम प्रसाद, रामनिवास, बालकृष्ण, सुग्रीव, भागदेई, राम पाल, अर्जुन, सुलेखा, मोहन, रामानंद का राजस्व अभिलेखों में दर्ज करा दिया गया।
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