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Siddharthnagar News: सड़क पर छुट्टा पशुओं का आतंक... बचाव के इंतजाम फाइलों में

Thu, 08 Jan 2026 11:59 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 08 Jan 2026 11:59 PM IST
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Siddharthnagar News: Stray animals create havoc on the roads... rescue arrangements are in the files
शहर में झुंड बनाकर घूम रहे छुट्टा पशु। संवाद
- कुत्तों को पकड़ कर शेल्टर होम में भेजे जाने का हुआ था तीन माह पहले आदेश, कागजों तक सीमित
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- एक बार फिर कोर्ट ने हानि पहुंचाने वाले घुमंतू कुत्तों सहित अन्य पशुओं को उचित स्थान पर रखे जाने का दिया है आदेश

- जिले में छुट्टा पशुओं के रखने के लिए संचालित हो रहा 67 स्थाई-आस्थाई गोशाला, संरक्षित हैं 7600 पशु
सिद्धार्थनगर। सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्ते और छुट्टा पशु जानलेवा हो चले हैं। आम लोगों के लिए खतरा बन रहे इन घुमंतू कुत्तों समेत अन्य पशुओं को सुरक्षित और उचित स्थानों पर रखने के कोर्ट ने सख्त आदेश दिए, लेकिन इसके इंतजाम सरकारी फाइलों में ही बंद होकर रह गए। हालात यह है कि आज भी लोग इन कुत्तों के हमले और आवारा पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसों में लोगों जान गवां रहे हैं। जिले की बात करें तो पिछले दो साल में सांड और कुत्ते के हमले में सात से अधिक लोगों की जान जा चुकी है जबकि इनके काटने और हादमों में अनगिनत लोग घायल हो चुके हैं। एक बार फिर कोर्ट ने इसको लेकर कड़ा रुख अपनाया है। फिलहाल देखना यह है कि आदेश की तकमील होती है या फिर अब भी फाइलों में ही धूल फांकते रह जाएंगे।
जिले में कुत्तों के हमले और सड़क हादसों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों के इंतजाम कागजों से बाहर नहीं निकल पा रहे। तीन माह पहले कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजने के आदेश जारी हुए थे, मगर इसको अमली जामा पहनाने के लिए कोई ठोस पहल नजर नहीं आई। जमीनी हकीकत अब भी जस की तस बनी हुई है। बृहस्पतिवार को नगर के कुछ ऐसे स्थानों पर पड़ताल की गई जहां लोगों की आवाजाही अधिक रहती है तो वहां सांड और कुत्तों का झुंड नजर आया। शहर के ब्लॉक के ही सामने कुत्तों का झुंड तो वहीं सिद्धार्थ तिराहे पर सांड टहलते हुए नजर आए।
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जिले में छुट्टा पशुओं की समस्या केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं रही बल्कि नगर पालिका क्षेत्र और प्रमुख सड़कों तक फैल चुकी है। सड़क, चौराहों और रिहायशी इलाकों में खुलेआम घूम रहे पशु जाम की बड़ी वजह बन रहे हैं। वहीं, अचानक सामने आ जाने से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा बने रहते हैं। कुत्तों के काटने के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं और इसमें बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा संकट मंडरा रहा है। कई मामलों में लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक जिले में 67 अस्थाई और स्थाई गोशालाएं संचालित हैं, जहां लगभग 7600 पशु संरक्षित बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद सड़कों पर बड़ी संख्या में छुट्टा पशु नजर आ रहे हैं, जो व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं। नगर पालिका और ग्राम पंचायतों को पशुओं को पकड़कर संरक्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन संसाधनों की कमी, लापरवाही और आपसी तालमेल के अभाव में अभियान प्रभावी नहीं हो पा रहा। लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों और छुट्टा पशुओं की समस्या अब सिर्फ अव्यवस्था नहीं बल्कि जनसुरक्षा का गंभीर मुद्दा बन चुकी है। कोर्ट के आदेशों के बाद निगाहें प्रशासन और स्थानीय निकायों पर टिकी हैं कि वे इस बार ठोस और स्थायी समाधान की दिशा में क्या कदम उठाते हैं।
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छुट्टा पशु का आक्रामक तेवर, कई जख्मी
बीते 21 दिसंबर को मोहाना थाना क्षेत्र के गायघाट गांव में एक सांड हमलावर हो गया। वह एक-एक करके चार लोगों को घायल कर दिया। इसमें गांव के कल्लू, रामदेव, बुझारत और सुकई जख्मी हो गए। उनका कई दिनों तक इलाज चला। इसके अलावा बीते एक सितंबर को बिस्कोहर कस्बे में अपने बरामदे में बैठे वृद्ध पर सांड टूट पड़ा और जबतक लोग पहुंचते और भाग चित कर चुका था। करीब दो माह तक वृद्ध का इलाज चला। वहीं, वर्ष 2024 में नवंबर माह में एक सांड बिस्कोहर कस्बे में एक घर में घुस गया और 70 वर्षीय महिला पर टूट पड़ा और तबतक मारता रहा जबतक उसने दम नहीं तोड़ दिया। मार्च 2025 में खेसरहा थाना क्षेत्र के बेलौहा बाजार में एक सांड ने एक साथ गांव के ही 10 लोगों को घायल कर दिया था। कई दिनों तक लोग बेड़ पर रहे। इसके अलावा चलते राह में हमला, सड़क पर बैठने से टकरा जाना और मौजूदा समय में फसल की रखवाली कर रहे किसानों पर छुट्टा पशुओं का आक्रमण बढ़ा है। जिले में हर दिन कोई न कोई इनके हमले से घायल हो रहा है।
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कुत्तों ने नोचकर मार डाला
जिले में कुत्तों का आतंक कम नहीं है। वर्ष 2024 में कुत्तों ने चार लोगों को नोचकर मार डाला था। इसमें डुमरियागंज में खेत में घास लेने गई महिला को झुंड में कुत्तों ने हमला कर दिया। उन्होंने उसे इतना नोचा कि अस्पताल तक पहुंचते-पहुंचते उसकी जान चली गई। इसके अलावा उसी साल डुमरियागंज में ही एक बच्चे को नोचकर मार डाला था। उसी साल इटवा थाना क्षेत्र में दो अलग- अलग घटनाओं में खेलने गए दो बच्चे भी कुत्तों का शिकार बने। वहीं, शहर के पुरानी नौगढ़ में मां के साथ बकरी चराने गए बच्चे को नोचकर जान ले ली। शहर में एक कुत्ते ने कपड़े वाली गली में एक-एक करके एक घंटे में 50 लोगों को काटा था। वहीं, मौजूदा समय में सरेराह, गली मोहल्ले में गुजरने वालों पर टूट पड़ रहे हैं। कई बार लोग बाइक और साइकिल से अनियंत्रित होकर गिरकर घायल हो रहे हैं। बाइक और कार पर तो शाम होते ही टूट पड़ रहे हैं। वहीं, जिले के मेडिकल कॉलेज और सीएचसी-पीएचसी की बात करें तो हर माह औसतन 1000-1200 लोग कुत्ते के हमले के शिकार होकर पहुंच रहे हैं, जिन्हें एआरवी लगाई जा रही है।
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जिले में इतनी है आबादी
पशु गणना के आकड़ों पर गौर करें तो 21वीं पशु गणना में लगभग तीन साल पहले घुमंतू कुत्तों की हुई गणना में 21 हजार के करीब थी। पशु विभाग के जानकारों के अनुसार एक कुत्ते की उम्र चार से नौ साल के बीच होती है। जबकि एक बार में एक कुतिया दो से पांच बच्चों तक को जन्म देती है। ऐसे में अनुमान है कि जिले में कुत्तों की आबादी 25 हजार से अधिक हो गई होगी। जो गांव से शहर तक लोगों के लिए मुसीबत बन चुके हैं।

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कोर्ट का सख्त रुख
इंसान को नुकसान पहुंचाने वाले आवारा कुत्तों को तुरंत पकड़ने का आदेश

घुमंतू पशुओं को सुरक्षित और निर्धारित स्थानों पर रखने के निर्देश

स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी तय, लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत

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आंकड़ों में हकीकत

जिले में 67 अस्थाई/स्थाई गोशालाएं संचालित

करीब 7600 पशु बताए जा रहे संरक्षित

फिर भी सड़कों पर बड़ी संख्या में घूम रहे छुट्टा पशु

जाम, हादसे और कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ीं
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बोले जिम्मेदार
छुट्टा पशुओं को नगर पंचायत और न्याय पंचायत स्तर पर बने गोशाला में संरक्षित करवाया जाता है। एक बार फिर अभियान चलाकर जो घूमते हुए मिलेंगे, उन्हें गोशाला में भिजवाया जाएगा। कुत्तों को लेकर तो सेंटर बनाए जाने के संबंध में काम किया जाएगा। जो भी दिशा- निर्देश है, उसका पालन करवाया जाएगा।
- गौरव कुमार श्रीवास्तव, एडीएम
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