{"_id":"689cdbd02d87aee4390dfa3d","slug":"siddharthnagar-news-social-harmony-breaks-down-the-walls-of-caste-and-class-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1002-142824-2025-08-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: सामाजिक समरसता से टूटती हैं जाति-वर्ग की दीवारें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: सामाजिक समरसता से टूटती हैं जाति-वर्ग की दीवारें
Thu, 14 Aug 2025 12:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 14 Aug 2025 12:09 AM IST
विज्ञापन
- पांच परिवर्तन से राष्ट्र परिवर्तन विषय पर आयोजित हुई संगोष्ठी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के कला संकाय में पांच परिवर्तन से राष्ट्र परिवर्तन विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रवादी विचारक रमेश ने पंच परिवर्तन सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली एवं नागरिक कर्तव्य पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
उन्होंने बताया कि सामाजिक समरसता से जाति और वर्ग की दीवारें टूटती हैं और राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है। कुटुंब प्रबोधन से पारिवारिक मूल्यों का पुनरुद्धार होता है जो समाज के नैतिक आधार को मजबूत करता है। पर्यावरण संरक्षण के बिना सतत विकास संभव नहीं, स्वदेशी अपनाने से देश आत्मनिर्भर बनता है और नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजगता ही जिम्मेदार और जागरूक समाज का परिचायक है।
इस दौरान प्रो. कविता शाह, प्रो. नीता यादव, डॉ. मयंक कुशवाहा, प्रो. सतेंद्र कुमार दुबे, डॉ. सुनीता त्रिपाठी, डॉ. सच्चिदानंद चौबे, डॉ. विशाल गुप्ता, डॉ. रविकांत शुक्ला आदि उपस्थित रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के कला संकाय में पांच परिवर्तन से राष्ट्र परिवर्तन विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रवादी विचारक रमेश ने पंच परिवर्तन सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली एवं नागरिक कर्तव्य पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
उन्होंने बताया कि सामाजिक समरसता से जाति और वर्ग की दीवारें टूटती हैं और राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है। कुटुंब प्रबोधन से पारिवारिक मूल्यों का पुनरुद्धार होता है जो समाज के नैतिक आधार को मजबूत करता है। पर्यावरण संरक्षण के बिना सतत विकास संभव नहीं, स्वदेशी अपनाने से देश आत्मनिर्भर बनता है और नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजगता ही जिम्मेदार और जागरूक समाज का परिचायक है।
विज्ञापन
इस दौरान प्रो. कविता शाह, प्रो. नीता यादव, डॉ. मयंक कुशवाहा, प्रो. सतेंद्र कुमार दुबे, डॉ. सुनीता त्रिपाठी, डॉ. सच्चिदानंद चौबे, डॉ. विशाल गुप्ता, डॉ. रविकांत शुक्ला आदि उपस्थित रही।
विज्ञापन