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Siddharthnagar News: जंग-ए-आजादी में पीछे नहीं सिद्धार्थनगर
Mon, 26 Jan 2026 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 26 Jan 2026 12:11 AM IST
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बांसी। बुद्ध भूमि सिद्धार्थनगर देश के आजादी की लड़ाई में अपना सबकुछ न्यौछावर करने में किसी भी अंचल से पीछे नहीं रहा। देश को आजाद कराने की भावन से ओतप्रोत कई दीवानों ने हंसते-हंसते कुर्बादी दे दी। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ और 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू हुआ। लेकिन, इसके लिए हमारे सेनानियों ने जो कीमत चुकाई उसके पीछे गौरवशाली इतिहास है।
प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद स्वतंत्रता आंदोलन को रोकने के लिए सन 1919 को रोलेट एक्ट जैसा काला कानून अंग्रेजों ने देश पर लाद दिया। महात्मा गांधी ने जब इसका विरोध किया तो पूरे देश में विरोध प्रदर्शन और गोली बारी का दौर शुरू हो गया। इसी बीच जलियांवाला बाग कांड हुआ, जिसने कश्मीर से कन्याकुमारी तक विरोध की ज्वाला धधक उठी। इसमें सिद्धार्थनगर पीछे नहीं रहा।
हिन्दू मुस्लिम ने आपस में मिलकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़े। इसी समय बांसी कस्बे से पूरब लगभग पांच किलोमीटर पर बसे तेजगढ़ गांव के लोगों ने पंचायत गठित कर ब्रिटिश सरकार का विरोध करना शुरू कर दिया। इससे घबराए अंग्रेज सरकार के समर्थक राजा चंगेरा अष्टभुजा प्रसाद ने तेजगढ़ गांव को फुंकवा दिया और पंचायत के मुखिया अयोध्या प्रसाद यादव को पीटकर गांव से निकाल दिया।
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इसके विरोध में उसका बाजार, शोहरतगढ़ में विरोध प्रदर्शन हुए प्रदर्शनकारियों का दमन करने के लिए उन्हें पीटा गया। उसका में आंदोलनकारियों को मालगाड़ी के डिब्बे के नीचे दबा दिया गया। शोहरतगढ़ में कांग्रेस का दफ्तर जलाया गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं परमेश्वर दत्त पांडेय को कोड़ों से पीटकर अधमरा कर छोड़ा गया और आमजन पर घोड़ा दौड़ाया गया। इस जंग-ए आजादी की लड़ाई में कुछ लोग शहीद भी हो गए।
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प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद स्वतंत्रता आंदोलन को रोकने के लिए सन 1919 को रोलेट एक्ट जैसा काला कानून अंग्रेजों ने देश पर लाद दिया। महात्मा गांधी ने जब इसका विरोध किया तो पूरे देश में विरोध प्रदर्शन और गोली बारी का दौर शुरू हो गया। इसी बीच जलियांवाला बाग कांड हुआ, जिसने कश्मीर से कन्याकुमारी तक विरोध की ज्वाला धधक उठी। इसमें सिद्धार्थनगर पीछे नहीं रहा।
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हिन्दू मुस्लिम ने आपस में मिलकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़े। इसी समय बांसी कस्बे से पूरब लगभग पांच किलोमीटर पर बसे तेजगढ़ गांव के लोगों ने पंचायत गठित कर ब्रिटिश सरकार का विरोध करना शुरू कर दिया। इससे घबराए अंग्रेज सरकार के समर्थक राजा चंगेरा अष्टभुजा प्रसाद ने तेजगढ़ गांव को फुंकवा दिया और पंचायत के मुखिया अयोध्या प्रसाद यादव को पीटकर गांव से निकाल दिया।
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इसके विरोध में उसका बाजार, शोहरतगढ़ में विरोध प्रदर्शन हुए प्रदर्शनकारियों का दमन करने के लिए उन्हें पीटा गया। उसका में आंदोलनकारियों को मालगाड़ी के डिब्बे के नीचे दबा दिया गया। शोहरतगढ़ में कांग्रेस का दफ्तर जलाया गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं परमेश्वर दत्त पांडेय को कोड़ों से पीटकर अधमरा कर छोड़ा गया और आमजन पर घोड़ा दौड़ाया गया। इस जंग-ए आजादी की लड़ाई में कुछ लोग शहीद भी हो गए।