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Siddharthnagar News: विधि-विधान से मनाया गया श्रावणी उपाकर्म पर्व
Thu, 27 Aug 2026 11:30 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 27 Aug 2026 11:30 PM IST
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- वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ दशविधि स्नान, देव-ऋषि-पितृ तर्पण के बाद धारण किया यज्ञोपवीत
- सप्त ऋषियों का पूजन कर निभाई गई सनातन ऋषि परंपरा, बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद
बिस्कोहर। नगर पंचायत बिस्कोहर स्थित ऐतिहासिक शिवचरन पोखरा के श्रीराम जानकी दुर्गा धाम मंदिर परिसर में बृहस्पतिवार को श्रावणी पर्व उपाकर्म परंपरागत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के बीच विभिन्न अनुष्ठान संपन्न कराए गए। आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु और प्रबुद्धजन शामिल हुए।
धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विद्वान ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दशविधि स्नान किया। इसके बाद देव, ऋषि और पितृ तर्पण की विधि पूरी की गई। सामूहिक रूप से यज्ञोपवीत धारण कर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
अनुष्ठान के अगले चरण में अरुंधती सहित सप्त ऋषियों का विधि-विधान से पूजन किया गया। आचार्यों ने श्रावणी उपाकर्म के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व सनातन ऋषि परंपरा, आत्मशुद्धि और वैदिक संस्कारों से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
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पूरा धार्मिक आयोजन काशी, वाराणसी से विशेष रूप से पधारे आचार्य अवधेश शुक्ल के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। उनके मार्गदर्शन में ब्राह्मणों ने निर्धारित विधि के अनुसार सभी धार्मिक क्रियाएं पूरी कराईं। वैदिक मंत्रोच्चार से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
इस अवसर पर आचार्य दयानंद शुक्ल, सुधीर तिवारी, चंद्रशेखर तिवारी, रामबोल पाठक, सूर्य नारायण दुबे, सत्यमणि तिवारी, राममणि तिवारी, विजय मिश्र अखिलेश सहित बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु और प्रबुद्धजन मौजूद रहे।
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- सप्त ऋषियों का पूजन कर निभाई गई सनातन ऋषि परंपरा, बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद
बिस्कोहर। नगर पंचायत बिस्कोहर स्थित ऐतिहासिक शिवचरन पोखरा के श्रीराम जानकी दुर्गा धाम मंदिर परिसर में बृहस्पतिवार को श्रावणी पर्व उपाकर्म परंपरागत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के बीच विभिन्न अनुष्ठान संपन्न कराए गए। आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु और प्रबुद्धजन शामिल हुए।
धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विद्वान ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दशविधि स्नान किया। इसके बाद देव, ऋषि और पितृ तर्पण की विधि पूरी की गई। सामूहिक रूप से यज्ञोपवीत धारण कर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
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अनुष्ठान के अगले चरण में अरुंधती सहित सप्त ऋषियों का विधि-विधान से पूजन किया गया। आचार्यों ने श्रावणी उपाकर्म के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व सनातन ऋषि परंपरा, आत्मशुद्धि और वैदिक संस्कारों से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
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पूरा धार्मिक आयोजन काशी, वाराणसी से विशेष रूप से पधारे आचार्य अवधेश शुक्ल के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। उनके मार्गदर्शन में ब्राह्मणों ने निर्धारित विधि के अनुसार सभी धार्मिक क्रियाएं पूरी कराईं। वैदिक मंत्रोच्चार से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
इस अवसर पर आचार्य दयानंद शुक्ल, सुधीर तिवारी, चंद्रशेखर तिवारी, रामबोल पाठक, सूर्य नारायण दुबे, सत्यमणि तिवारी, राममणि तिवारी, विजय मिश्र अखिलेश सहित बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु और प्रबुद्धजन मौजूद रहे।