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Siddharthnagar News: बंदियों को टीका लगा, स्वस्थ रहने की कामना
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सिद्धार्थनगर। जिला कारागार में बृहस्पतिवार को भैया दूज का पर्व भावनात्मक वातावरण में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। यह अवसर पर बंदी भाइयों और मिलने आई बहनों के लिए अत्यंत हर्ष और संवेदना से भरा रहा। कुल 315 महिलाएं अपने बंधक भाइयों से मिलने कारागार पहुंचीं, जहां प्रशासन द्वारा सुव्यवस्थित व्यवस्था के अंतर्गत बहनों ने भाइयों का तिलक कर उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कारागार प्रशासन ने इस अवसर पर पूरे परिसर को सादगीपूर्ण तरीके से सजाया। बहनों के स्वागत के लिए जलपान, प्रतीक्षा स्थल और बैठक व्यवस्था की विशेष तैयारी की गई। मुलाकात के समय का विस्तार किया गया ताकि सभी बहनें शांति और स्नेह पूर्वक भाइयों से मिल सकें। महिला बैरक में भी भैया दूज का उत्सव पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। बंदिनी बहनों ने भगवान श्रीगणेश और यमराज की पूजा अर्चना कर परिवार के सभी सदस्यों के मंगल की कामना की।
कारागार अधीक्षक सचिन वर्मा ने कहा कि भैया दूज प्रेम, अपनत्व और संस्कारों का प्रतीक है। यह पर्व हमें पारिवारिक भावनाओं को सहेजने और समाज में मानवीय संबंधों की गरिमा को बनाए रखने की प्रेरणा देता है। आज यहां 315 बहनों का अपने भाइयों से मिलना इस बात का प्रमाण है कि प्रेम की डोर किसी दीवार से नहीं टूट सकती। उन्होंने बताया कि ऐसे पर्व बंदियों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और भावनात्मक संतुलन लाते हैं। इससे उनके भीतर समाज से जुड़ने और सुधार की भावना प्रबल होती है।
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इस दौरान जेलर रामसिंह यादव, महेश सिंह, अजीत चंद, अभिषेक कुमार पांडेय सहित समस्त कारागार स्टाफ उपस्थित रहा।
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कारागार प्रशासन ने इस अवसर पर पूरे परिसर को सादगीपूर्ण तरीके से सजाया। बहनों के स्वागत के लिए जलपान, प्रतीक्षा स्थल और बैठक व्यवस्था की विशेष तैयारी की गई। मुलाकात के समय का विस्तार किया गया ताकि सभी बहनें शांति और स्नेह पूर्वक भाइयों से मिल सकें। महिला बैरक में भी भैया दूज का उत्सव पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। बंदिनी बहनों ने भगवान श्रीगणेश और यमराज की पूजा अर्चना कर परिवार के सभी सदस्यों के मंगल की कामना की।
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कारागार अधीक्षक सचिन वर्मा ने कहा कि भैया दूज प्रेम, अपनत्व और संस्कारों का प्रतीक है। यह पर्व हमें पारिवारिक भावनाओं को सहेजने और समाज में मानवीय संबंधों की गरिमा को बनाए रखने की प्रेरणा देता है। आज यहां 315 बहनों का अपने भाइयों से मिलना इस बात का प्रमाण है कि प्रेम की डोर किसी दीवार से नहीं टूट सकती। उन्होंने बताया कि ऐसे पर्व बंदियों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और भावनात्मक संतुलन लाते हैं। इससे उनके भीतर समाज से जुड़ने और सुधार की भावना प्रबल होती है।
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इस दौरान जेलर रामसिंह यादव, महेश सिंह, अजीत चंद, अभिषेक कुमार पांडेय सहित समस्त कारागार स्टाफ उपस्थित रहा।