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Siddharthnagar News: बंदरों के आतंक से सहमे लोग, कार्रवाई नहीं
Sun, 07 Dec 2025 11:01 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 07 Dec 2025 11:01 PM IST
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घोसियारी। बाजार में लोग काफी दिनों से बंदरों के आतंक से परेशान हैं। कई बार इस संबंध में शिकायत भी की गई लेकिन अब तक किसी ने समस्या पर ध्यान नहीं दिया, जिससे 12 से अधिक लोगों को बंदर घायल कर चुके हैं।
करीब तीन वर्ष पहले इनकी संख्या केवल छह थी, लेकिन वर्तमान में यह 35 के करीब पहुंच चुकी है। पुराने घोसियारी गांव के पुराने रास्तों पर यह ज्यादातर रहते हैं और आने जाने वाले को निशाना बनाते हैं। घोसियारी के व्यापारी वर्ग और विद्यालय संचालक एक वर्ष से इस समस्या से परेशान हैं। फल व्यवसायी लाला चौरसिया का कहना है कि अक्सर पलक झपकते ही बंदर दुकान पर धावा बोल देते हैं अगर उन्हें अकेले भगाया जाए तो वह काटने को दौड़ाते हैं। घोसियारी निवासी राधे रमण का कहना है कि घर की छत पर रखी पानी की टंकी को कांटों से घेर कर रखा गया है क्योंकि पड़ोस की टंकी को बंदरों ने तोड़ दी है। घोसियारी निवासी शिव कुमार मोदनवाल का कहना है कि विद्यालय जाते समय छह वर्षीय बेटे को बंदरों ने घेर कर काट लिया था। आसपास के लोग दौड़े तब जाकर बंदर भागे।
इस संबंध में रेंजर खेसरहा सुशील कुमार का कहना है कि बंदरों को पकड़वाना वन विभाग का काम नहीं है। इसके लिए नपं या नगर निगम से संपर्क के लोग सहयोग कर पाएंगे।
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करीब तीन वर्ष पहले इनकी संख्या केवल छह थी, लेकिन वर्तमान में यह 35 के करीब पहुंच चुकी है। पुराने घोसियारी गांव के पुराने रास्तों पर यह ज्यादातर रहते हैं और आने जाने वाले को निशाना बनाते हैं। घोसियारी के व्यापारी वर्ग और विद्यालय संचालक एक वर्ष से इस समस्या से परेशान हैं। फल व्यवसायी लाला चौरसिया का कहना है कि अक्सर पलक झपकते ही बंदर दुकान पर धावा बोल देते हैं अगर उन्हें अकेले भगाया जाए तो वह काटने को दौड़ाते हैं। घोसियारी निवासी राधे रमण का कहना है कि घर की छत पर रखी पानी की टंकी को कांटों से घेर कर रखा गया है क्योंकि पड़ोस की टंकी को बंदरों ने तोड़ दी है। घोसियारी निवासी शिव कुमार मोदनवाल का कहना है कि विद्यालय जाते समय छह वर्षीय बेटे को बंदरों ने घेर कर काट लिया था। आसपास के लोग दौड़े तब जाकर बंदर भागे।
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इस संबंध में रेंजर खेसरहा सुशील कुमार का कहना है कि बंदरों को पकड़वाना वन विभाग का काम नहीं है। इसके लिए नपं या नगर निगम से संपर्क के लोग सहयोग कर पाएंगे।
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