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Siddharthnagar News: गलत दवा-इलाज से मरीज गंवा रहे जान... जांच में अटक जाती है कार्रवाई
Tue, 30 Sep 2025 11:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 30 Sep 2025 11:51 PM IST
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-जिले में झोलाछाप की लापरवाही से हर माह चली जाती है किसी न किसी मरीज की जान
-दबाव और जांच के बाद पता चलता है अवैध रूप से हो रहा था संचालन,
-इटवा थाना क्षेत्र के धोबहा में गलत इंजेक्शन लगाने से चली गई थी किशोर की जान, नहीं हुई कार्रवाई
-डुमरियागंज व इटवा क्षेत्र में विभागीय जिम्मेदारों के संरक्षण में संचालित निजी अस्पताल लोगों के लिए बन रहे कब्रगाह
भनवापुर। डुमरियागंज और इटवा क्षेत्र के निजी अस्पतालों और झोलाछाप के क्लीनिकों में लापरवाही से मौतों का सिलसिला जारी है। इटवा थाना क्षेत्र के धोबहा में चौराहे के पास क्लीनिक पर इलाज कराने पहुंचा इंद्रजीत गलत इंजेक्शन लगाने से काल के गाल में समा गया। पिता ने न्याय की गुहार लगाई तो पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। लेकिन स्वास्थ्य महकमा मौत पर अब भी खामोश है। आरोपी भागा हुआ है और अब तक क्लीनिक की जांच तक नहीं हुई है, जिससे स्पष्ट हो सके कि वह पंजीकृत था या नहीं। उसके पास डॉक्टर की डिग्री थी या नहीं। फिर भी विभागीय जिम्मेदार और जांच और कार्रवाई का दम भर रहे हैं।
इटवा और डुमरियागंज में संचालित निजी अस्पताल और अवैध क्लीनिक अब लोगों के लिए कब्रगाह बनते जा रहे हैं। जब मौत हाेती है तो कुछ पीड़ित जहां ईश्वर की नाराजगी मानकर खामोश हो जाते हैं तो कुछ क्षेत्र के लोगों के दबाव में समझौता करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। वहीं विभागीय सांठगांठ से संचालित इन अस्पतालों में संचालकों बड़े-बड़े डाॅक्टरों के नामों का साइन बोर्ड लगाकर क्षेत्रीय लोगों की जिंदगी से खेलने के साथ ही उनसे पैसे ऐंठ रहे हैं। इतना ही नहीं अगर कोई इन अस्पतालों के खिलाफ शिकायत कर देता है तो अधिकारी जांच के नाम पर खानापूर्ति कर अपना हिस्सा लेकर वापस चले जाते हैं। ऐसा शिकायत करने वाले आरोप लगा चुके हैं। जांच अधिकारी से शिकायत के बाद कार्रवाई के बारे में जानकारी पूछने पर अस्पताल बंद है, नोटिस जारी कर दी गई है, जैसी बातें बताकर मामले को रफा-दफा कर देते हैं।
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इन लोगों की हो चुकी है मौत
केस -1
इटवा थाना क्षेत्र के धोबहा चौराहे पर स्थित जनता मेडिकल स्टोर एंड क्लीनिक पर गलत इलाज के चलते क्षेत्र के होलिया पुर गांव निवासी 15 वर्षीय इंद्रजीत की मौत हो चुकी है। पिता विष्णु सहानी के तहरीर पर इटवा पुलिस ने मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच में जुटी है। हालांकि कि आरोपी अभी भी पुलिस के गिरफ्त से बाहर है।
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केस - 2
फरवरी 2025 को त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के पंड़िया गांव निवासी प्रकाश की 42 वर्षीय पत्नी को प्रसव के लिए मन्नीजोत चौराहे पर स्थित एक निजी अस्पताल पर ले गए। डाॅक्टरों ने ऑपरेशन किया। इस दौरान अधिक रक्त स्राव के कारण उसे रेफर कर दिया। पीड़ित ने अपनी पत्नी को ओपेक कैली अस्पताल बस्ती ले गए, जहां डॉक्टरों ने बताया कि इसकी बच्चेदानी पूरी तरह से कट चुकी है। कैली बस्ती में दूसरे दिन इलाज के दौरान मौत हो गई। पति ने संबंधित अस्पताल संचालक के खिलाफ डुमरियागंज थाने में तहरीर दी, लेकिन स्थानीय लोगों ने दबाव बनाकर समझौता करा दिया।
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केस 3
18 जुलाई 2024 को इटवा थाना क्षेत्र के कुनगाई गांव निवासी पंकज दूबे की पत्नी सुषमा को प्रसव के लिए इटवा के एक निजी अस्पताल सबनम मेहिया में भर्ती कराया। मौजूद डाॅक्टरों की लापरवाही के कारण जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। मामला आगे बढ़ा परिजनों के शिकायत पर तत्कालीन एडिशनल एसपी के हस्तक्षेप से अस्पताल संचालक के खिलाफ केस दर्ज हुआ। अभी भी मामला न्यायालय में लंबित है।
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केस 4
अगस्त 2023 में डुमरियागंज के एक निजी अस्पताल में त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के सेखुई सेनापति गांव निवासी लवकुश की पत्नी की प्रसव के ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई थी। मृतका के मायके वालों के सुझाव पर लवकुश ने कोई कार्रवाई नहीं की। बात करने पर बताया कि हमारी किस्मत खराब थी,यह ईश्वर के नाराजगी का दंड मिला है।
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केस 5
अगस्त 2023 में ही भनवापुर के मन्नीजोत चौराहे पर स्थित एक निजी अस्पताल में त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के बभनी गांव की एक महिला की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। मृतका के पति जब अस्पताल संचालक से मौत का कारण पूछा तो संचालक पीड़ित पति से झगड़ा करने लगा। स्थानीय लोगों के साथ ग्राम प्रधान ने समझौता करा कर मामले को शांत कराया।
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अधीक्षक को मिल चुकी है धमकी
जिलाधिकारी के निर्देश पर डुमरियागंज के बेवां में संचालित आशीर्वाद हॉस्पिटल को 31 दिसंबर 2024 को अधीक्षक सीएचसी बेवां डॉ. विकास चौधरी ने सील कर दिया था।अस्पताल सील करने के बाद संचालक व उनके तीन साथियों की ओर से अधीक्षक को उनके घर बस्ती जिले के सोनहा में पहुंच कर रात में गाली-गलौज करने के साथ ही जान से मारने की धमकी दी गई थी। अधीक्षक की तहरीर और डीएम के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल संचालक मनोज वर्मा, आनंद वर्मा, विकास वर्मा के साथ ही देवांग मिश्रा के खिलाफ दर्ज किया गया था, जिसका केस अभी न्यायालय में लंबित है।
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बोले जिम्मेदार
जहां भी मामला सामने आता है, शिकायत होती है तो उसकी जांच करके विभागीय कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी जांच कराई जा रही है।
- डॉ. आरके चौरसिया, सीएमओ
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-दबाव और जांच के बाद पता चलता है अवैध रूप से हो रहा था संचालन,
-इटवा थाना क्षेत्र के धोबहा में गलत इंजेक्शन लगाने से चली गई थी किशोर की जान, नहीं हुई कार्रवाई
-डुमरियागंज व इटवा क्षेत्र में विभागीय जिम्मेदारों के संरक्षण में संचालित निजी अस्पताल लोगों के लिए बन रहे कब्रगाह
भनवापुर। डुमरियागंज और इटवा क्षेत्र के निजी अस्पतालों और झोलाछाप के क्लीनिकों में लापरवाही से मौतों का सिलसिला जारी है। इटवा थाना क्षेत्र के धोबहा में चौराहे के पास क्लीनिक पर इलाज कराने पहुंचा इंद्रजीत गलत इंजेक्शन लगाने से काल के गाल में समा गया। पिता ने न्याय की गुहार लगाई तो पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। लेकिन स्वास्थ्य महकमा मौत पर अब भी खामोश है। आरोपी भागा हुआ है और अब तक क्लीनिक की जांच तक नहीं हुई है, जिससे स्पष्ट हो सके कि वह पंजीकृत था या नहीं। उसके पास डॉक्टर की डिग्री थी या नहीं। फिर भी विभागीय जिम्मेदार और जांच और कार्रवाई का दम भर रहे हैं।
इटवा और डुमरियागंज में संचालित निजी अस्पताल और अवैध क्लीनिक अब लोगों के लिए कब्रगाह बनते जा रहे हैं। जब मौत हाेती है तो कुछ पीड़ित जहां ईश्वर की नाराजगी मानकर खामोश हो जाते हैं तो कुछ क्षेत्र के लोगों के दबाव में समझौता करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। वहीं विभागीय सांठगांठ से संचालित इन अस्पतालों में संचालकों बड़े-बड़े डाॅक्टरों के नामों का साइन बोर्ड लगाकर क्षेत्रीय लोगों की जिंदगी से खेलने के साथ ही उनसे पैसे ऐंठ रहे हैं। इतना ही नहीं अगर कोई इन अस्पतालों के खिलाफ शिकायत कर देता है तो अधिकारी जांच के नाम पर खानापूर्ति कर अपना हिस्सा लेकर वापस चले जाते हैं। ऐसा शिकायत करने वाले आरोप लगा चुके हैं। जांच अधिकारी से शिकायत के बाद कार्रवाई के बारे में जानकारी पूछने पर अस्पताल बंद है, नोटिस जारी कर दी गई है, जैसी बातें बताकर मामले को रफा-दफा कर देते हैं।
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इन लोगों की हो चुकी है मौत
केस -1
इटवा थाना क्षेत्र के धोबहा चौराहे पर स्थित जनता मेडिकल स्टोर एंड क्लीनिक पर गलत इलाज के चलते क्षेत्र के होलिया पुर गांव निवासी 15 वर्षीय इंद्रजीत की मौत हो चुकी है। पिता विष्णु सहानी के तहरीर पर इटवा पुलिस ने मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच में जुटी है। हालांकि कि आरोपी अभी भी पुलिस के गिरफ्त से बाहर है।
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केस - 2
फरवरी 2025 को त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के पंड़िया गांव निवासी प्रकाश की 42 वर्षीय पत्नी को प्रसव के लिए मन्नीजोत चौराहे पर स्थित एक निजी अस्पताल पर ले गए। डाॅक्टरों ने ऑपरेशन किया। इस दौरान अधिक रक्त स्राव के कारण उसे रेफर कर दिया। पीड़ित ने अपनी पत्नी को ओपेक कैली अस्पताल बस्ती ले गए, जहां डॉक्टरों ने बताया कि इसकी बच्चेदानी पूरी तरह से कट चुकी है। कैली बस्ती में दूसरे दिन इलाज के दौरान मौत हो गई। पति ने संबंधित अस्पताल संचालक के खिलाफ डुमरियागंज थाने में तहरीर दी, लेकिन स्थानीय लोगों ने दबाव बनाकर समझौता करा दिया।
केस 3
18 जुलाई 2024 को इटवा थाना क्षेत्र के कुनगाई गांव निवासी पंकज दूबे की पत्नी सुषमा को प्रसव के लिए इटवा के एक निजी अस्पताल सबनम मेहिया में भर्ती कराया। मौजूद डाॅक्टरों की लापरवाही के कारण जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। मामला आगे बढ़ा परिजनों के शिकायत पर तत्कालीन एडिशनल एसपी के हस्तक्षेप से अस्पताल संचालक के खिलाफ केस दर्ज हुआ। अभी भी मामला न्यायालय में लंबित है।
केस 4
अगस्त 2023 में डुमरियागंज के एक निजी अस्पताल में त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के सेखुई सेनापति गांव निवासी लवकुश की पत्नी की प्रसव के ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई थी। मृतका के मायके वालों के सुझाव पर लवकुश ने कोई कार्रवाई नहीं की। बात करने पर बताया कि हमारी किस्मत खराब थी,यह ईश्वर के नाराजगी का दंड मिला है।
केस 5
अगस्त 2023 में ही भनवापुर के मन्नीजोत चौराहे पर स्थित एक निजी अस्पताल में त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के बभनी गांव की एक महिला की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। मृतका के पति जब अस्पताल संचालक से मौत का कारण पूछा तो संचालक पीड़ित पति से झगड़ा करने लगा। स्थानीय लोगों के साथ ग्राम प्रधान ने समझौता करा कर मामले को शांत कराया।
अधीक्षक को मिल चुकी है धमकी
जिलाधिकारी के निर्देश पर डुमरियागंज के बेवां में संचालित आशीर्वाद हॉस्पिटल को 31 दिसंबर 2024 को अधीक्षक सीएचसी बेवां डॉ. विकास चौधरी ने सील कर दिया था।अस्पताल सील करने के बाद संचालक व उनके तीन साथियों की ओर से अधीक्षक को उनके घर बस्ती जिले के सोनहा में पहुंच कर रात में गाली-गलौज करने के साथ ही जान से मारने की धमकी दी गई थी। अधीक्षक की तहरीर और डीएम के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल संचालक मनोज वर्मा, आनंद वर्मा, विकास वर्मा के साथ ही देवांग मिश्रा के खिलाफ दर्ज किया गया था, जिसका केस अभी न्यायालय में लंबित है।
बोले जिम्मेदार
जहां भी मामला सामने आता है, शिकायत होती है तो उसकी जांच करके विभागीय कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी जांच कराई जा रही है।
- डॉ. आरके चौरसिया, सीएमओ