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श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से मिलती है मुक्ति : पं. विनोद
Tue, 28 Oct 2025 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 28 Oct 2025 11:43 PM IST
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भनवापुर के सेमरा बनकसिया में श्रीमदभागवत कथा श्रवंण कराते पं. विनोद कृष्ण शास्त्री। स्रोत विज्ञ
- भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के सेमरा बनकसिया में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बताया महात्म्य
भनवापुर। क्षेत्र के सेमरा बनकसिया में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में दूसरे दिन सोमवार को कथा वाचक पं. विनोद कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मानव के श्रीमद्भागवत कथा के श्रावण मात्र से सभी पाप कट जाते हैं और वह मृत्यु लोक के आवागमन से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कथा में धुंधकारी के जन्म व मुक्ति की कथा का रसपान कराया।
पं. विनोद कृष्ण शास्त्री ने बताया कि मानव के मुक्ति का मार्ग श्रीमद्भागवत कथा से ही खुलता है। महाभारत की समाप्ति के बाद कलयुग के आगमन की आहट के बीच राजा परीक्षित जंगल में शिकार के लिए गए। वहां कलयुग के प्रभाव से परीक्षित की मति भ्रमित हो गया और प्यास से व्याकुल हो कर पानी की तलाश में शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे। जहां शमीक ऋषि को ध्यान मग्न देख उन्हें अपशब्द बोलने लगे तथा पास पड़े मृत सर्प को उनके गले में डाल कर चलते बने। नदी पर स्नान करने गए शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी ऋषि को अन्य बच्चों ने उनके पिता के साथ राजा की ओर से किए गए दुर्व्यवहार की सूचना दी गई। अपने पिता के साथ दुर्व्यवहार की सूचना पर शृंगी ऋषि ने जल लेकर राजा परीक्षित को सात दिनों के अंदर तक्षक सर्प के डसने से मौत का श्राप दे डाला। सुखदेव की ओर से श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। इस दौरान राजा परीक्षित ने सुखदेव से पूछा कि मानव मात्र का उद्देश्य है। इस पर सुखदेव ने कहा कि मानव मात्र का उद्देश्य भगवत भक्ति है। इस दौरान ज्वाला प्रसाद शुक्ल, अमन शास्त्री, विशाल शास्त्री, इंद्र फूल शुक्ल, सुरेंद्र शुक्ल, सुनील शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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भनवापुर। क्षेत्र के सेमरा बनकसिया में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में दूसरे दिन सोमवार को कथा वाचक पं. विनोद कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मानव के श्रीमद्भागवत कथा के श्रावण मात्र से सभी पाप कट जाते हैं और वह मृत्यु लोक के आवागमन से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कथा में धुंधकारी के जन्म व मुक्ति की कथा का रसपान कराया।
पं. विनोद कृष्ण शास्त्री ने बताया कि मानव के मुक्ति का मार्ग श्रीमद्भागवत कथा से ही खुलता है। महाभारत की समाप्ति के बाद कलयुग के आगमन की आहट के बीच राजा परीक्षित जंगल में शिकार के लिए गए। वहां कलयुग के प्रभाव से परीक्षित की मति भ्रमित हो गया और प्यास से व्याकुल हो कर पानी की तलाश में शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे। जहां शमीक ऋषि को ध्यान मग्न देख उन्हें अपशब्द बोलने लगे तथा पास पड़े मृत सर्प को उनके गले में डाल कर चलते बने। नदी पर स्नान करने गए शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी ऋषि को अन्य बच्चों ने उनके पिता के साथ राजा की ओर से किए गए दुर्व्यवहार की सूचना दी गई। अपने पिता के साथ दुर्व्यवहार की सूचना पर शृंगी ऋषि ने जल लेकर राजा परीक्षित को सात दिनों के अंदर तक्षक सर्प के डसने से मौत का श्राप दे डाला। सुखदेव की ओर से श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। इस दौरान राजा परीक्षित ने सुखदेव से पूछा कि मानव मात्र का उद्देश्य है। इस पर सुखदेव ने कहा कि मानव मात्र का उद्देश्य भगवत भक्ति है। इस दौरान ज्वाला प्रसाद शुक्ल, अमन शास्त्री, विशाल शास्त्री, इंद्र फूल शुक्ल, सुरेंद्र शुक्ल, सुनील शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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