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Siddharthnagar News: नेपाल के कसीनो बने करेंसी की हेराफेरी का अड्डा
Tue, 06 Jan 2026 12:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 06 Jan 2026 12:18 AM IST
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बढनी बार्डर से सटा नेपाल के चन्द्रौटा में स्थित कैसीनों में खेलते लोग। स्रोत विज्ञप्ति
सिद्धार्थनगर। नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में चल रहे कसीनो अब केवल मनोरंजन का जरिया नहीं, बल्कि भारतीय करेंसी की हेरफेर, ब्लैक मनी को व्हाइट करने और युवाओं को जुए की लत में धकेलने का संगठित अड्डा बनते जा रहे हैं। गोरखपुर के कैंट थाना क्षेत्र में पुलिस की गिरफ्त में आए सिद्धार्थनगर के व्यक्ति के कब्जे से 50 लाख रुपये का कनेक्शन भी सीधे नेपाल के कैसीनो से जुड़ा है।
सूत्रों की माने तो नेपाल के भैरहवा में छह, चंदरौटा तौलिहवा क्षेत्र सहित बुटवल में 30 से अधिक कसीनो चलता है। रविवार की नेपाल की शाम भारतीयों के नाम ही रहती है, जहां सैकड़ों युवा चंद घंटों में लाखों रुपये उड़ा दे रहे हैं। यही वजह है कि बार्डर पर हर दो माह पर लाखों रुपये भारतीय करेंसी पकड़ी जा रही है, जिसका पकड़े जाने वाले हिसाब नहीं दे पाते हैं। अब गोरखपुर में 50 लाख रुपये बरामदगी और कसीनों से नेटवर्क जुड़ने के बाद नेपाल चर्चा में आ गया है।
जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगती है। बाॅर्डर पर कई प्रकार की अवैध गतिविधियों के संचालित होने के बाद तो सामने आती है, लेकिन नेपाल के कसीनो में पिछले तीन साल से युवाओं के पहुंचने और बर्बाद होने के मामले सामने आए हैं। नेपाल से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि एक संगठित गिरोह इसमें काम कर रहा है। जो पूर्वांचल में फैला हुआ और युवाओं को नेपाल घुमाने और होटल की सुविधा दिलाने के लिए प्रेरित कर रहा है। इससे वह गिरफ्त में आ रहे हैं।
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सूत्र बताते हैं कि यह नेटवर्क पूर्वांचल या यूपी तक नहीं है बल्कि पंजाब तक इसका जाल फैला हुआ है। बाॅर्डर पर जांच के दौरान पूर्व में पंजाब के युवक पकड़े भी जा चुके हैं, जो नेपाल से आ रहे थे। इनके पास से बड़ी रकम बरामद हुई थी। उन पैसों का कनेक्शन कसीनाे से जुड़ा पाया गया था। जांच एजेंसियों और स्थानीय इनपुट्स के मुताबिक, इन कसीनो में खेल के नाम पर बड़े पैमाने पर करेंसी की अदला-बदली होती है। ब्लैक मनी को चिप्स के जरिए घुमाकर व्हाइट किया जाता है और हार-जीत की आड़ में रकम को वैध दिखाने की कोशिश होती है। गोरखपुर में हाल ही में पकड़ी गई 50 लाख रुपये की रकम के तार भी कसीनो से जुड़ने की बात सामने आ रही है।
नुकसान की रिकवरी करने में फंसते हैं युवा
बॉर्डर पर कई बार भारतीय करेंसी पकड़े जाने के मामलों में पूछताछ के दौरान कसीनो कनेक्शन उभर चुका है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि युवाओं को पहले खेल का लालच दिया जाता है, फिर नुकसान के बाद ‘रिकवरी’ के नाम पर उन्हें इसी धंधे में घुसा दिया जाता है। लगातार लुटते युवा कर्ज और अपराध की राह पर बढ़ते जा रहे हैं जबकि नेटवर्क चलाने वाले एजेंट सुरक्षित दूरी बनाए रखते हैं। जानकारों का कहना है कि कसीनो के नाम पर चल रहा यह खेल केवल जुआ नहीं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर सीधा प्रहार है। बॉर्डर पर सख्ती और नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह कनेक्शन और गहराता जाएगा।
किन जिलों के युवा ज्यादा जा रहे
बलरामपुर
गोंडा
सिद्धार्थनगर
कुशीनगर
देवरिया
महाराजगंज
संतकबीरनगर
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हार के बाद कर्ज, पलायन और आत्महत्या
शहर के कई लोग कसीनो में भारी रकम हारकर कर्ज में डूबे हैं। इसमें जनपद मुख्यालय के कुछ लोग कसीनो में बर्बाद होने के बाद जब जरूरत से अधिक कर्ज में डूब गए तो गैर प्रांत में जाकर काम रहे हैं, जिससे कर्जदार उनसे ताकादा न करें। वहीं, बीते वर्ष लोटन कोतवाली क्षेत्र का एक युवक जान दे दी। कसीनो में लाखों हारने के बाद वह कर्ज में डूब गया, जब कुछ नहीं सूझा तो गला काट लिया। कुछ दिन भर्ती रहा और फिर दम तोड़ दिया। वहीं कुछ लोग आर्थिक तंगी के चलते कुछ लोग परिवार छोड़कर बाहर चले गए, स्थानीय स्तर पर यह मामला कसीनो की लत से जुड़ा सबसे गंभीर उदाहरण कहा जा सकता है।
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क्वीन गेम और करेंसी कन्वर्जन
कसीनो में ‘क्वीन’ जैसे खेल कराए जाते हैं
जीत के बाद रकम को भारतीय करेंसी में कन्वर्ट किया जाता है
इसी प्रक्रिया के जरिए पैसे की हेरफेर और रोटेशन की आशंका
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सीमावर्ती बॉर्डर और पकड़े गए मामले
खुनुवां बॉर्डर, अलीगढ़वा बॉर्डर, ककरहवा बॉर्डर इन बॉर्डरों पर दिल्ली और पंजाब के लोग भारतीय करेंसी के साथ पकड़े जा चुके हैं। पूछताछ में नेपाल के कसीनो के संकेत मिले हैं। बरामद रुपये के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दे सका है।
केस 1
19 दिसंबर 2024 को बढ़नी बाॅर्डर 9.95 लाख रुपये बरामद किए गए। पकड़ा गया आरोपी नेपाल का रहने वाला था। वह बरामद रुपये के बारे में कागजात नहीं दिखा पाया था।
केस 2
23 अक्तूबर को 3.80 लाख रुपये भारतीय करेंसी के साथ नेपाली नागरिक को पकड़ा गया था, जिसके बारे में वह कागजात नहीं दे पाया था।
केस 3
3 अक्तूबर 2025 को एक लाख रुपये भारतीय करेंसी के साथ एक युवक पकड़ा गया था। जो जांच में बरामद करेंसी के बारे में कागजात नहीं दे पाया था।
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तेजी से बढ़ रही है दौलत
बाॅर्डर से जुड़े सूत्राें के मुताबिक कैसिनो में हवाला का पैसा भेजने में शोहरतगढ़ के कुछ लोग सक्रिय हैं। कारण यहां से महज 12 किलोमीटर पर खुनुवां बाॅर्डर है, जहां भंसार भी है, यहां से लोग आसानी आ-जा सकते हैं। इसलिए शोहरतगढ़ के लोग सक्रिय हो गए हैं। वह प्रतिदिन कैरियर के माध्यम से लाखों रुपये नेपाल भेज रहे हैं। कुछ महीनों में कई लोगों के आय में बढ़ोतरी आई है। इस खेल में कई युवा शामिल हैं।
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बोले जिम्मेदार
बाॅर्डर पर सुरक्षा एजेंसी और पुलिस लगातार जांच करती है। सीमा पर जब भी करेंसी पकड़ी जाती है तो उसकी जांच संबंधित एजेंसी करती है। सीमा पर सुरक्षा एजेंसी के साथ पुलिस नियमित जांच करती है।
डॉ. अभिषेक महाजन, पुलिस अधीक्षक
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रविवार को भैरहवा में जुटती है भीड़
- एक हजार से अधिक युवा करते हैं प्रवेश, एजेंट रहते हैं सक्रिय
सिद्धार्थनगर। भैरहवा क्षेत्र में 6 कसीनो सक्रिय हैं। इसमें एक हजार से अधिक भारतीय युवक एक ही दिन पहुंचते हैं। नेपाली युवकों के प्रवेश पर रोक और केवल विदेशी या भारतीयों को अनुमति ही मिल पाती है। इसके लिए एजेंट और ट्रांसपोर्ट का नेटवर्क पहले से सक्रिय है। वहीं, कसीनो के खेल पर गौर करें तो वह इस प्रकार से चलता है, जिसमें बॉर्डर पार करते ही एजेंट संपर्क में लेते हैं। भारतीय करेंसी को चिप्स में बदला जाता है। हार-जीत के नाम पर रकम का रोटेशन होता है। बड़ी रकम जीतने का लालच देकर बार-बार खेलने को उकसाया जाता है। नुकसान के बाद ‘सेटलमेंट’ के नाम पर और पैसा लगवाया जाता है।
भैरहवा के बाद चंदरौटा
भारतीय सीमा से सटे नेपाल में सबसे पहले कसीनों भैरहवा में था। वहां सिद्धार्थनगर, महराजगंज, गोरखपुर, संतकबीरनगर, बस्ती और लखनऊ से लेकर अन्य शहरों के लोग तैयारी करके कसीनों में अपना दाव आजमाते थे। यहां भारतीय क्षेत्रों के छोटे-छोटे कस्बे लोग दूर की वजह महीने एक या दो बार ही आ-जा पाते थे। लेकिन, जबसे बढ़नी बॉर्डर से लगभग 20 किमी की दूरी पर चंद्रौटा में कसीनो खुल जाने से लोग आसानी से पहुंचकर जुआ खेल रहे हैं। यहां खुलेआम जुए का धंधा बड़े पैमाने पर खेला जा रहा है।
इस कसीनो में 90 प्रतिशत लोग लगाए गई रकम हार जाते हैं। जीतने की लालच में दूसरे दिन फिर पैसा लेकर पहुंचते हैं। जब जुए में घर का सारा पैसा हार जाते तो खेत, आभूषण और वाहन को बेचने व गिरवी रखने में मजबूर हो जाते हैं। इससे उनका परिवार तबाह हो जाता है। सूत्रों की मानें तो कसीनो में केवल जुए के लिए ही लोग नहीं जाते बल्कि वहां शराब पीने के लिए भी लोग जाते हैं क्योंकि वहां शराब व बियर पीने का कोई शुल्क नहीं लिया जाता। लोग पहले तो मुफ्त शराब व खाने की लालच में कसीनो में इंट्री कराते हैं। जब नशा उनपर हावी होता है तो जुए में अपना रकम गवां देते हैं। प्रति माह अधिक की रकम का जुआ खेलने वाले भारतीयों के लिए कसीनो संचालकों ने वीआईपी पास जारी किया जाता है।
आजकल बढ़नी में कसीनो में ले जाने वाले दलाल भी सक्रिय हो गए हैं। भारतीयों को गुमराह कर कसीनो में लाने वाले इन दलालों को मोटी कमीशन दी जाती है। बीते गत माह एक भारतीय युवक कैसिनो में जुआ खेलते-खेलते कर्ज मे डूब गया था। उसके बाद अपने चार पहिया वाहन को गिरवी रख कर अन्य वाहन से नेपाल से भारत लौटा था। इसी तरह कुछ माह पहले एक भारतीय अपनी पत्नी का आभूषण गिरवी रखकर कसीनो जुआ खेलने गया, वहां पूरा पैसा हार गया। जब घर वालों को इसकी जानकारी हुई, तो घर वालों ने उस व्यक्ति को कड़ी फटकार लगाई।
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सूत्रों की माने तो नेपाल के भैरहवा में छह, चंदरौटा तौलिहवा क्षेत्र सहित बुटवल में 30 से अधिक कसीनो चलता है। रविवार की नेपाल की शाम भारतीयों के नाम ही रहती है, जहां सैकड़ों युवा चंद घंटों में लाखों रुपये उड़ा दे रहे हैं। यही वजह है कि बार्डर पर हर दो माह पर लाखों रुपये भारतीय करेंसी पकड़ी जा रही है, जिसका पकड़े जाने वाले हिसाब नहीं दे पाते हैं। अब गोरखपुर में 50 लाख रुपये बरामदगी और कसीनों से नेटवर्क जुड़ने के बाद नेपाल चर्चा में आ गया है।
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जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगती है। बाॅर्डर पर कई प्रकार की अवैध गतिविधियों के संचालित होने के बाद तो सामने आती है, लेकिन नेपाल के कसीनो में पिछले तीन साल से युवाओं के पहुंचने और बर्बाद होने के मामले सामने आए हैं। नेपाल से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि एक संगठित गिरोह इसमें काम कर रहा है। जो पूर्वांचल में फैला हुआ और युवाओं को नेपाल घुमाने और होटल की सुविधा दिलाने के लिए प्रेरित कर रहा है। इससे वह गिरफ्त में आ रहे हैं।
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सूत्र बताते हैं कि यह नेटवर्क पूर्वांचल या यूपी तक नहीं है बल्कि पंजाब तक इसका जाल फैला हुआ है। बाॅर्डर पर जांच के दौरान पूर्व में पंजाब के युवक पकड़े भी जा चुके हैं, जो नेपाल से आ रहे थे। इनके पास से बड़ी रकम बरामद हुई थी। उन पैसों का कनेक्शन कसीनाे से जुड़ा पाया गया था। जांच एजेंसियों और स्थानीय इनपुट्स के मुताबिक, इन कसीनो में खेल के नाम पर बड़े पैमाने पर करेंसी की अदला-बदली होती है। ब्लैक मनी को चिप्स के जरिए घुमाकर व्हाइट किया जाता है और हार-जीत की आड़ में रकम को वैध दिखाने की कोशिश होती है। गोरखपुर में हाल ही में पकड़ी गई 50 लाख रुपये की रकम के तार भी कसीनो से जुड़ने की बात सामने आ रही है।
नुकसान की रिकवरी करने में फंसते हैं युवा
बॉर्डर पर कई बार भारतीय करेंसी पकड़े जाने के मामलों में पूछताछ के दौरान कसीनो कनेक्शन उभर चुका है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि युवाओं को पहले खेल का लालच दिया जाता है, फिर नुकसान के बाद ‘रिकवरी’ के नाम पर उन्हें इसी धंधे में घुसा दिया जाता है। लगातार लुटते युवा कर्ज और अपराध की राह पर बढ़ते जा रहे हैं जबकि नेटवर्क चलाने वाले एजेंट सुरक्षित दूरी बनाए रखते हैं। जानकारों का कहना है कि कसीनो के नाम पर चल रहा यह खेल केवल जुआ नहीं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर सीधा प्रहार है। बॉर्डर पर सख्ती और नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह कनेक्शन और गहराता जाएगा।
किन जिलों के युवा ज्यादा जा रहे
बलरामपुर
गोंडा
सिद्धार्थनगर
कुशीनगर
देवरिया
महाराजगंज
संतकबीरनगर
हार के बाद कर्ज, पलायन और आत्महत्या
शहर के कई लोग कसीनो में भारी रकम हारकर कर्ज में डूबे हैं। इसमें जनपद मुख्यालय के कुछ लोग कसीनो में बर्बाद होने के बाद जब जरूरत से अधिक कर्ज में डूब गए तो गैर प्रांत में जाकर काम रहे हैं, जिससे कर्जदार उनसे ताकादा न करें। वहीं, बीते वर्ष लोटन कोतवाली क्षेत्र का एक युवक जान दे दी। कसीनो में लाखों हारने के बाद वह कर्ज में डूब गया, जब कुछ नहीं सूझा तो गला काट लिया। कुछ दिन भर्ती रहा और फिर दम तोड़ दिया। वहीं कुछ लोग आर्थिक तंगी के चलते कुछ लोग परिवार छोड़कर बाहर चले गए, स्थानीय स्तर पर यह मामला कसीनो की लत से जुड़ा सबसे गंभीर उदाहरण कहा जा सकता है।
क्वीन गेम और करेंसी कन्वर्जन
कसीनो में ‘क्वीन’ जैसे खेल कराए जाते हैं
जीत के बाद रकम को भारतीय करेंसी में कन्वर्ट किया जाता है
इसी प्रक्रिया के जरिए पैसे की हेरफेर और रोटेशन की आशंका
सीमावर्ती बॉर्डर और पकड़े गए मामले
खुनुवां बॉर्डर, अलीगढ़वा बॉर्डर, ककरहवा बॉर्डर इन बॉर्डरों पर दिल्ली और पंजाब के लोग भारतीय करेंसी के साथ पकड़े जा चुके हैं। पूछताछ में नेपाल के कसीनो के संकेत मिले हैं। बरामद रुपये के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दे सका है।
केस 1
19 दिसंबर 2024 को बढ़नी बाॅर्डर 9.95 लाख रुपये बरामद किए गए। पकड़ा गया आरोपी नेपाल का रहने वाला था। वह बरामद रुपये के बारे में कागजात नहीं दिखा पाया था।
केस 2
23 अक्तूबर को 3.80 लाख रुपये भारतीय करेंसी के साथ नेपाली नागरिक को पकड़ा गया था, जिसके बारे में वह कागजात नहीं दे पाया था।
केस 3
3 अक्तूबर 2025 को एक लाख रुपये भारतीय करेंसी के साथ एक युवक पकड़ा गया था। जो जांच में बरामद करेंसी के बारे में कागजात नहीं दे पाया था।
तेजी से बढ़ रही है दौलत
बाॅर्डर से जुड़े सूत्राें के मुताबिक कैसिनो में हवाला का पैसा भेजने में शोहरतगढ़ के कुछ लोग सक्रिय हैं। कारण यहां से महज 12 किलोमीटर पर खुनुवां बाॅर्डर है, जहां भंसार भी है, यहां से लोग आसानी आ-जा सकते हैं। इसलिए शोहरतगढ़ के लोग सक्रिय हो गए हैं। वह प्रतिदिन कैरियर के माध्यम से लाखों रुपये नेपाल भेज रहे हैं। कुछ महीनों में कई लोगों के आय में बढ़ोतरी आई है। इस खेल में कई युवा शामिल हैं।
बोले जिम्मेदार
बाॅर्डर पर सुरक्षा एजेंसी और पुलिस लगातार जांच करती है। सीमा पर जब भी करेंसी पकड़ी जाती है तो उसकी जांच संबंधित एजेंसी करती है। सीमा पर सुरक्षा एजेंसी के साथ पुलिस नियमित जांच करती है।
डॉ. अभिषेक महाजन, पुलिस अधीक्षक
रविवार को भैरहवा में जुटती है भीड़
- एक हजार से अधिक युवा करते हैं प्रवेश, एजेंट रहते हैं सक्रिय
सिद्धार्थनगर। भैरहवा क्षेत्र में 6 कसीनो सक्रिय हैं। इसमें एक हजार से अधिक भारतीय युवक एक ही दिन पहुंचते हैं। नेपाली युवकों के प्रवेश पर रोक और केवल विदेशी या भारतीयों को अनुमति ही मिल पाती है। इसके लिए एजेंट और ट्रांसपोर्ट का नेटवर्क पहले से सक्रिय है। वहीं, कसीनो के खेल पर गौर करें तो वह इस प्रकार से चलता है, जिसमें बॉर्डर पार करते ही एजेंट संपर्क में लेते हैं। भारतीय करेंसी को चिप्स में बदला जाता है। हार-जीत के नाम पर रकम का रोटेशन होता है। बड़ी रकम जीतने का लालच देकर बार-बार खेलने को उकसाया जाता है। नुकसान के बाद ‘सेटलमेंट’ के नाम पर और पैसा लगवाया जाता है।
भैरहवा के बाद चंदरौटा
भारतीय सीमा से सटे नेपाल में सबसे पहले कसीनों भैरहवा में था। वहां सिद्धार्थनगर, महराजगंज, गोरखपुर, संतकबीरनगर, बस्ती और लखनऊ से लेकर अन्य शहरों के लोग तैयारी करके कसीनों में अपना दाव आजमाते थे। यहां भारतीय क्षेत्रों के छोटे-छोटे कस्बे लोग दूर की वजह महीने एक या दो बार ही आ-जा पाते थे। लेकिन, जबसे बढ़नी बॉर्डर से लगभग 20 किमी की दूरी पर चंद्रौटा में कसीनो खुल जाने से लोग आसानी से पहुंचकर जुआ खेल रहे हैं। यहां खुलेआम जुए का धंधा बड़े पैमाने पर खेला जा रहा है।
इस कसीनो में 90 प्रतिशत लोग लगाए गई रकम हार जाते हैं। जीतने की लालच में दूसरे दिन फिर पैसा लेकर पहुंचते हैं। जब जुए में घर का सारा पैसा हार जाते तो खेत, आभूषण और वाहन को बेचने व गिरवी रखने में मजबूर हो जाते हैं। इससे उनका परिवार तबाह हो जाता है। सूत्रों की मानें तो कसीनो में केवल जुए के लिए ही लोग नहीं जाते बल्कि वहां शराब पीने के लिए भी लोग जाते हैं क्योंकि वहां शराब व बियर पीने का कोई शुल्क नहीं लिया जाता। लोग पहले तो मुफ्त शराब व खाने की लालच में कसीनो में इंट्री कराते हैं। जब नशा उनपर हावी होता है तो जुए में अपना रकम गवां देते हैं। प्रति माह अधिक की रकम का जुआ खेलने वाले भारतीयों के लिए कसीनो संचालकों ने वीआईपी पास जारी किया जाता है।
आजकल बढ़नी में कसीनो में ले जाने वाले दलाल भी सक्रिय हो गए हैं। भारतीयों को गुमराह कर कसीनो में लाने वाले इन दलालों को मोटी कमीशन दी जाती है। बीते गत माह एक भारतीय युवक कैसिनो में जुआ खेलते-खेलते कर्ज मे डूब गया था। उसके बाद अपने चार पहिया वाहन को गिरवी रख कर अन्य वाहन से नेपाल से भारत लौटा था। इसी तरह कुछ माह पहले एक भारतीय अपनी पत्नी का आभूषण गिरवी रखकर कसीनो जुआ खेलने गया, वहां पूरा पैसा हार गया। जब घर वालों को इसकी जानकारी हुई, तो घर वालों ने उस व्यक्ति को कड़ी फटकार लगाई।