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Siddharthnagar News: नारद मोह के प्रसंग का किया मंचन
Sun, 23 Nov 2025 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 23 Nov 2025 12:46 AM IST
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भनवापुर ब्लाक क्षेत्र के गागापुर में रामलीला का मंचन करते कलाकार। सवाद
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भनवापुर। क्षेत्र के गागापुर में शुक्रवार की रात स्थानीय कलाकारों की ओर से नारद मोह की लीला का मंचन कर रामलीला समारोह का आगाज किया। कार्यक्रम के पहले दिन ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि लवकुश ओझा ने फीता काटकर इसका शुभारंभ किया।
रामलीला समारोह में का प्रथम दर्शन में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती होती है। इसके बाद नारद मोह की लीला प्रारंभ हो जाती है। नारद एक उत्तम स्थान पर बैठकर भगवान हरि की तपस्या करने लगते हैं, जिससे भगवान इंद्र का सिंहासन हिलने लगता है। इंद्र को मालूम होता है कि नारद की तपस्या से उनका सिंहासन हिल रहा है। उनकी तपस्या भंग करने के लिए इंद्र देव अप्सराओं को भेजते हैं। रंभा, उर्वशी आदि अप्सराएं भी नारद की तपस्या भंग नहीं कर पातीं और उसके बाद भगवान इंद्र कामदेव को भेजते हैं। कामदेव नारद की तपस्या को भंग नहीं कर पाते हैं। तभी नारद अपनी तपस्या को स्वयं विराम देते हैं और कामदेव को माफ कर देते हैं। इस कारण भगवान नारद को अभिमान आ जाता है कि मैंने काम क्रोध जीत लिया जबकि भगवान शंकर भी क्रोध पर विजय नहीं कर पाए थे।
भगवान अपने भक्तों में कभी भी अभिमानी होना नहीं देखते। भगवान विष्णु के प्रकट होने पर नारद ने उनसे हरि रूप मांगा तो उन्होंने नारद के अभिमान को खत्म करने के लिए नारद को हरि रूप की जगह बंदर का रूप प्रदान किया।
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वहीं रूप लेकर वह एक स्वयंवर में गए, जहां उनका लोगों ने खूब मजाक उड़ाया। तब उनको पता चला कि उनका रूप तो बंदर का है, जिससे नारद क्रोधित हो गए और उन्होंने भगवान को श्राप दिया और कहा आने वाले समय में आप भी पत्नी के लिए वन-वन भटकेगे, तब यही बंदर आपकी मदद करेंगे।
इस दौरान गजेंद्र शुक्ल, रामफेर यादव, छैल बिहारी उर्फ अजय यादव, आशीष मिश्र, राम अजोरे यादव, अक्षय आदि मौजूद रहे।
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रामलीला समारोह में का प्रथम दर्शन में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती होती है। इसके बाद नारद मोह की लीला प्रारंभ हो जाती है। नारद एक उत्तम स्थान पर बैठकर भगवान हरि की तपस्या करने लगते हैं, जिससे भगवान इंद्र का सिंहासन हिलने लगता है। इंद्र को मालूम होता है कि नारद की तपस्या से उनका सिंहासन हिल रहा है। उनकी तपस्या भंग करने के लिए इंद्र देव अप्सराओं को भेजते हैं। रंभा, उर्वशी आदि अप्सराएं भी नारद की तपस्या भंग नहीं कर पातीं और उसके बाद भगवान इंद्र कामदेव को भेजते हैं। कामदेव नारद की तपस्या को भंग नहीं कर पाते हैं। तभी नारद अपनी तपस्या को स्वयं विराम देते हैं और कामदेव को माफ कर देते हैं। इस कारण भगवान नारद को अभिमान आ जाता है कि मैंने काम क्रोध जीत लिया जबकि भगवान शंकर भी क्रोध पर विजय नहीं कर पाए थे।
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भगवान अपने भक्तों में कभी भी अभिमानी होना नहीं देखते। भगवान विष्णु के प्रकट होने पर नारद ने उनसे हरि रूप मांगा तो उन्होंने नारद के अभिमान को खत्म करने के लिए नारद को हरि रूप की जगह बंदर का रूप प्रदान किया।
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वहीं रूप लेकर वह एक स्वयंवर में गए, जहां उनका लोगों ने खूब मजाक उड़ाया। तब उनको पता चला कि उनका रूप तो बंदर का है, जिससे नारद क्रोधित हो गए और उन्होंने भगवान को श्राप दिया और कहा आने वाले समय में आप भी पत्नी के लिए वन-वन भटकेगे, तब यही बंदर आपकी मदद करेंगे।
इस दौरान गजेंद्र शुक्ल, रामफेर यादव, छैल बिहारी उर्फ अजय यादव, आशीष मिश्र, राम अजोरे यादव, अक्षय आदि मौजूद रहे।