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Siddharthnagar News: भागवत कथा सुनने से धुंधकारी को मिली प्रेत योनि से मुक्ति
Sat, 24 Oct 2026 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 24 Oct 2026 11:43 PM IST
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- बहेरिया गांव में कथा के दूसरे दिन आचार्य सतीश मिश्र ने सुनाया गोकर्ण-धुंधकारी प्रसंग
डुमरियागंज। क्षेत्र के बहेरिया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार रात कथावाचक आचार्य सतीश मिश्र ने गोकर्ण और धुंधकारी का प्रसंग सुनाया। उन्होंने श्रद्धालुओं को भक्ति, सत्संग और सद्कर्मों का महत्व बताते हुए बुरी संगति से दूर रहने की सीख दी।
आचार्य सतीश मिश्र ने बताया कि गोकर्ण और धुंधकारी दो भाई थे। गोकर्ण धार्मिक प्रवृत्ति के थे, जबकि धुंधकारी बुरी संगति में पड़कर गलत कार्य करने लगा। अपने कर्मों के कारण मृत्यु के बाद भी उसे शांति नहीं मिली और वह प्रेत योनि में भटकने लगा। भाई की इस दशा की जानकारी होने पर गोकर्ण ने उसे मुक्ति दिलाने का उपाय खोजा। इस पर संतों ने श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण को मुक्ति का माध्यम बताया।
कथावाचक ने बताया कि गोकर्ण ने धुंधकारी की मुक्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया। कथा सुनने के लिए धुंधकारी सात गांठों वाले बांस में प्रवेश कर बैठ गया। कथा के प्रभाव से प्रतिदिन बांस की एक गांठ टूटती गई। सातवें दिन अंतिम गांठ टूटने के साथ ही धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई।
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आचार्य ने कहा कि श्रद्धा और एकाग्रता से भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन आता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अच्छे कर्म करने, बुरी संगति से बचने और ईश्वर के प्रति भक्ति भाव बनाए रखने की अपील की।
इस दौरान ज्ञानदास प्रजापति, डॉ. रजनीश, दिलीप पांडेय, चिनमुन यादव, सुरेश गुप्ता और प्रदीप सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
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डुमरियागंज। क्षेत्र के बहेरिया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार रात कथावाचक आचार्य सतीश मिश्र ने गोकर्ण और धुंधकारी का प्रसंग सुनाया। उन्होंने श्रद्धालुओं को भक्ति, सत्संग और सद्कर्मों का महत्व बताते हुए बुरी संगति से दूर रहने की सीख दी।
आचार्य सतीश मिश्र ने बताया कि गोकर्ण और धुंधकारी दो भाई थे। गोकर्ण धार्मिक प्रवृत्ति के थे, जबकि धुंधकारी बुरी संगति में पड़कर गलत कार्य करने लगा। अपने कर्मों के कारण मृत्यु के बाद भी उसे शांति नहीं मिली और वह प्रेत योनि में भटकने लगा। भाई की इस दशा की जानकारी होने पर गोकर्ण ने उसे मुक्ति दिलाने का उपाय खोजा। इस पर संतों ने श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण को मुक्ति का माध्यम बताया।
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कथावाचक ने बताया कि गोकर्ण ने धुंधकारी की मुक्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया। कथा सुनने के लिए धुंधकारी सात गांठों वाले बांस में प्रवेश कर बैठ गया। कथा के प्रभाव से प्रतिदिन बांस की एक गांठ टूटती गई। सातवें दिन अंतिम गांठ टूटने के साथ ही धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई।
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आचार्य ने कहा कि श्रद्धा और एकाग्रता से भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन आता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अच्छे कर्म करने, बुरी संगति से बचने और ईश्वर के प्रति भक्ति भाव बनाए रखने की अपील की।
इस दौरान ज्ञानदास प्रजापति, डॉ. रजनीश, दिलीप पांडेय, चिनमुन यादव, सुरेश गुप्ता और प्रदीप सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।