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Siddharthnagar News: नौकरी मिली, अब सुरक्षित आवागमन की चुनौती
Wed, 16 Sep 2026 11:15 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 16 Sep 2026 11:15 PM IST
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- स्कूल, अस्पताल और निजी संस्थानों में तैनात महिलाओं को रोज करना पड़ता है लंबा सफर
- दूरदराज तैनाती वाली कर्मचारियों के लिए सार्वजनिक परिवहन और शाम के समय वापसी बड़ी चुनौती
सिद्धार्थनगर। नौकरी के साथ महिलाओं के सामने सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन की चुनौती भी बनी हुई है। जिले में स्कूल, अस्पताल और निजी संस्थानों में काम करने वाली कई महिलाओं को रोजाना घर से कार्यस्थल तक लंबा सफर तय करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तैनाती होने पर सार्वजनिक परिवहन के सीमित विकल्प परेशानी बढ़ा देते हैं। शाम को ड्यूटी खत्म होने के बाद घर लौटने के लिए नियमित साधन नहीं मिलने पर महिलाओं को निजी वाहन या परिवार के सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता है।
जिले में कई महिला कर्मचारी अपने घर से अलग ब्लॉक, तहसील या दूसरे शहर में नौकरी कर रही हैं। सुबह निर्धारित समय पर पहुंचने के लिए उन्हें समय से काफी पहले घर से निकलना पड़ता है। मुख्य मार्गों पर बस और अन्य वाहन मिल जाते हैं लेकिन गांवों से मुख्य मार्ग तक पहुंचने और वहां से वापस घर जाने में अधिक परेशानी होती है। शाम के समय वाहनों की संख्या कम होने से यह समस्या और बढ़ जाती है।
उसका बाजार क्षेत्र की शिक्षिका निधि सिंह का कहना है कि गोरखपुर तक आने-जाने में समय और साधन दोनों की परेशानी होती है। सुबह समय से स्कूल पहुंचने के लिए जल्दी निकलना पड़ता है। वापसी में भी वाहन के समय का ध्यान रखना पड़ता है। सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नियमित नहीं होने पर निजी साधन का सहारा लेना पड़ता है।
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स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी उर्मिला देवी के मुताबिक ड्यूटी का समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। सामान्य ड्यूटी के अलावा अतिरिक्त जिम्मेदारी होने पर देर हो जाती है। ऐसे में घर लौटने के लिए वाहन की उपलब्धता सबसे बड़ी चिंता रहती है। उनका कहना है कि कार्यस्थल तक पहुंचने के साथ सुरक्षित वापसी की व्यवस्था भी जरूरी है।
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निजी क्षेत्र में भी अलग नहीं स्थिति
- निजी कंपनी में काम करने वाली रागिनी और शॉपिंग मार्ट में काम करने वाली कर्मचारियों के लिए भी आने-जाने की समस्या सामने आती है। निजी संस्थानों में कई बार काम का समय तय अवधि से आगे बढ़ जाता है। शाम को छुट्टी होने के बाद घर तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक परिवहन का सहारा लेना पड़ता है। साधन नहीं मिलने पर सहकर्मी या परिवार के सदस्य लेने आते हैं।
शाम की वापसी में अधिक परेशानी
- महिलाओं का कहना है कि मुख्य मार्गों पर आवागमन के साधन उपलब्ध होने के बावजूद गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों पर शाम के समय विकल्प सीमित हो जाते हैं। ऐसे में महिला कर्मचारियों को कार्यस्थल से घर तक पूरे सफर की योजना बनाकर चलना पड़ता है। दूरदराज के स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और कार्यालयों में तैनात महिलाओं के लिए यह समस्या ज्यादा महसूस होती है।
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- दूरदराज तैनाती वाली कर्मचारियों के लिए सार्वजनिक परिवहन और शाम के समय वापसी बड़ी चुनौती
सिद्धार्थनगर। नौकरी के साथ महिलाओं के सामने सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन की चुनौती भी बनी हुई है। जिले में स्कूल, अस्पताल और निजी संस्थानों में काम करने वाली कई महिलाओं को रोजाना घर से कार्यस्थल तक लंबा सफर तय करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तैनाती होने पर सार्वजनिक परिवहन के सीमित विकल्प परेशानी बढ़ा देते हैं। शाम को ड्यूटी खत्म होने के बाद घर लौटने के लिए नियमित साधन नहीं मिलने पर महिलाओं को निजी वाहन या परिवार के सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता है।
जिले में कई महिला कर्मचारी अपने घर से अलग ब्लॉक, तहसील या दूसरे शहर में नौकरी कर रही हैं। सुबह निर्धारित समय पर पहुंचने के लिए उन्हें समय से काफी पहले घर से निकलना पड़ता है। मुख्य मार्गों पर बस और अन्य वाहन मिल जाते हैं लेकिन गांवों से मुख्य मार्ग तक पहुंचने और वहां से वापस घर जाने में अधिक परेशानी होती है। शाम के समय वाहनों की संख्या कम होने से यह समस्या और बढ़ जाती है।
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उसका बाजार क्षेत्र की शिक्षिका निधि सिंह का कहना है कि गोरखपुर तक आने-जाने में समय और साधन दोनों की परेशानी होती है। सुबह समय से स्कूल पहुंचने के लिए जल्दी निकलना पड़ता है। वापसी में भी वाहन के समय का ध्यान रखना पड़ता है। सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नियमित नहीं होने पर निजी साधन का सहारा लेना पड़ता है।
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स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी उर्मिला देवी के मुताबिक ड्यूटी का समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। सामान्य ड्यूटी के अलावा अतिरिक्त जिम्मेदारी होने पर देर हो जाती है। ऐसे में घर लौटने के लिए वाहन की उपलब्धता सबसे बड़ी चिंता रहती है। उनका कहना है कि कार्यस्थल तक पहुंचने के साथ सुरक्षित वापसी की व्यवस्था भी जरूरी है।
निजी क्षेत्र में भी अलग नहीं स्थिति
- निजी कंपनी में काम करने वाली रागिनी और शॉपिंग मार्ट में काम करने वाली कर्मचारियों के लिए भी आने-जाने की समस्या सामने आती है। निजी संस्थानों में कई बार काम का समय तय अवधि से आगे बढ़ जाता है। शाम को छुट्टी होने के बाद घर तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक परिवहन का सहारा लेना पड़ता है। साधन नहीं मिलने पर सहकर्मी या परिवार के सदस्य लेने आते हैं।
शाम की वापसी में अधिक परेशानी
- महिलाओं का कहना है कि मुख्य मार्गों पर आवागमन के साधन उपलब्ध होने के बावजूद गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों पर शाम के समय विकल्प सीमित हो जाते हैं। ऐसे में महिला कर्मचारियों को कार्यस्थल से घर तक पूरे सफर की योजना बनाकर चलना पड़ता है। दूरदराज के स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और कार्यालयों में तैनात महिलाओं के लिए यह समस्या ज्यादा महसूस होती है।